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History of Computer in Hindi

Computer History: दोस्तों computer शब्द का उत्पत्ति latin word से हुआ तो है. मगर इसका भी कई परजाइ है. इसका नाम में इतिहास छुपा हुआ है कंप्यूटर की कार्य परिधि का. आज हम जानेगे history computer के बारेमे. जानेगे हिस्ट्री में उल्लेखित कंप्यूटर का अबिष्कारकों का नाम. जो एक नहीं बल्कि कई लोग है. और बताएँगे first generation से लेकर present generation का कंप्यूटर प्रगति का इतिहास, आज का हिंदी ब्लॉग में जिसका नाम है आप सबका subhra som.

कंप्यूटर शब्द का उत्पत्ति – Origin of the term computer

Latin Word:
Computare ➛ To Count
Com With (साथ)
Putare Reckoning (गणना)

Computer एक Latin Word का विकसित रूप है. ये शब्द, एक Latin शब्द Computare से लिया गया. इसका अर्थ है गणना या calculation करना.

दोस्तों इंग्लिश में computer के जगह पर “compute” शब्द का इस्तेमाल इतिहास में सदियों तक किया गया. फिर सं 1660 में King Charles II के ज़माने में England royal navy का प्रशासक और Member of Parliament रह चुके Samuel Pepys नाम के बेक्ति ने computing शब्द का इस्तेमाल किये. फिर 1731 में Edinburgh Weekly Journal ने अपने एक लाइन में कंप्यूटर शब्द को इस्तेमाल किया.

सं 1939 और 1942 के बीच का कोई एक समय पर एक electronic device को बनाया गया Iowa State University में. और इस machine को Computer नाम दिया गया. मशीन को बनाने बाले थे American physicist and inventor John Vincent Atanasoff.

कंप्यूटर का आविष्कारक – Inventor Of Computer

Computer को बनाने वाले कई inventors है. जिन्होंने धीरे धीरे invention को आगे बढ़ाते हुए आज का कंप्यूटर हमें उपहार दिए. पर history में पहली बार इसकी सुरुवात की Charles Babbage ने. ये एक अंग्रेजी गणितज्ञ और आविष्कारक थे. इन्होने पहली automatic digital computer बनाये. इन्हे father of computer कहा जाता है.

Computer Inventors List

Charles Babbage
(1791-1871)
Alan Turing
(1912-1954)
Konrad Zuse
(1910-1995)
John Vincent Atanasoff
(1903-1995)
John Mauchly
(1907-1980)
J. Presper Eckert
(1919-1995)
John von Neumann
(1903-1957)
Clifford Berry
(1918-1963)
Douglas Engelbart
(1925-2013)
William Shockley
(1910-1989)
Vannevar Bush
(1890-1974)
Tommy Flowers
(1905-1998)
Walter Houser Brattain
(1902-1987)
Steve WozniakArthur Burks
(1915-2008)
Robert Noyce
(1927-1990)
Howard H. Aiken
(1900-1973)
Jack Kilby
(1923-2005)
Stanley MazorVint Cerf
Marcian HoffRobert E. KahnTim Berners-LeeFederico Faggin
Paul Allen
(1953-2018)
Herman Hollerith
(1860-1929)
James Thomson
(1822-1892)
Maurice Wilkes
(1913-2010)
Harold Locke Hazen
(1901-1980
Joseph Marie Jacquard
(1752-1834)
Guido Van RossumJohn Backus
(1924-2007)
John Napier
(1550-1617)
Julius Edgar Lilienfeld
(1882-1963)
Masatoshi ShimaWilhelm Schickard
(1592-1635)
Larry PageSergey BrinRobert MetcalfeDennis Ritchie
(1941-2011)
Pier Giorgio Perotto
(1930-2002)
An Wang
(1920-1990)
William Oughtred
(1574-1660)
Phiippe Khan
Paul Baran
(1926-2011)
Leonard KleinrockDorr Felt
(1862-1930)
Charles Xaviar Thomas
(1785-1870)
Curt Herzstark
(1902-1988)
Gary Starkweather
(1938-2019)
James Gosling
Source: en.wikipedia.org

कंप्यूटर का फुल फॉर्म – Full form of computer

COMPUTER
Common Operating Machine Purposely Used for Technological and Educational Research
सामान्य ऑपरेटिंग मशीन तकनीकी और शैक्षिक अनुसंधान के लिए उपयोग की जाती है

दोस्तों ये computer का full form के हिसाब से जाना जाता है. मगर वैसे देखा जाये तो इसके आक्षरिक full form कुछ नहीं है. जैसे की आपको इस hindi blog में पता चल गया कंप्यूटर नाम का कैसे उत्पत्ति हुआ. ये नाम धीरे धीरे बिक्षित हुआ है. purposely नहीं दिया गया.

क्या आप जानते है: Primary और Secondary कंप्यूटर मेमोरी क्या है?

कंप्यूटर का इतिहास – History of computer

कंप्यूटर का इतिहास (history) को अगर पूरी तरह लिखा जाये, तो एक पूरी आर्टिकल बन जाएगी. फिरभी हम संक्षिप्त वर्णन करने का प्रयास कर रहे है.
दोसतो क्या आप Abacus के बारे में सुना है? ये था सुमेरियन सब्यता का कंप्यूटर. इसका आविष्कार लगभग 2700–2300 BC की बीच के समय पर Babylon में हुआ था. Abacus में कंकड़ से रेत में लाइन खींच कर calculation किया जाता था. आज का मॉडर्न टाइम में भी इसे इस्तेमाल किया जाता है, नाम है Abaci. जो अबेकस का updated version है. इसे ही ‘पहला कंप्यूटर’ (first computer) कहा जाता है. ये गणना के लिए सबसे उन्नत और popular method थी.

Digital Computers

1050–771 BC के मध्य में प्राचीन china में पहला mechanical computer बनाया गया. जिसमे कई gear लगा हुआ था. जो बाद में जाकर analog computer में भी इस्तेमाल होना सुरु हुआ. गियर के विकास का बाद 200 BC में device को बनाना संभव हुआ. पर ये computer नहीं बल्कि astronomy में इस्तेमाल होने लगा.

100 AD में ग्रीक(Greek) mathematician Heron of Alexandria ने odometer जैसी एक डिवाइस का बर्णन किये थे. जो automatic चलाया जा सकता था और digital form में काउंट कर सकता था. मगर ये सिर्फ एक विवरण थी. असलमे mechanical devices बनाया गया था गया था 1600 के दशक में. जो digitally count कर सकता था.

सन 1901 में Greek island Antikythera में एक जहाज के मलबे से एक analog computer को खोज निकाला गया. जिसे पहला mechanical analog computer के रूप में जाना जाता है. Mathematician और Physicist जॉन नेपियर ने 17 वीं शताब्दी की शुरुआत में logarithms की खोज की. इनमे काफी मदत हुआ computer बनाने की छेत्र में. उसी समय Charles Babbage नाम की गणितज्ञ analytical engine का डिज़ाइन को बनाये। जिसके बोहोत सरे components आज मोडेर कंप्यूटर से मिलता जुलता है. जैसे की scratch memory नाम का फीचर हुआ करता था. जो आज का RAM से मिलता है.

Personal Computer

1959 Mohamed Atalla aur Dawon Kahng ने MOS ट्रांजिस्टर का अविष्कार किये. इसका असली नाम मॉस्फेट है (metal–oxide–silicon field-effect ट्रांजिस्टर). इससे इंटीग्रेटेड सर्किट बनाने में मदत मिला. अब जमाना आने बाला था integrated circuit और उससे पर्सनल कंप्यूटर(PC) का.

1960 में microprocessor का निर्माण हुआ. और ये मुमकिन हुआ Integrated circut की मदत से. फिर आठ साल के भीतर 1968 में पहला Intel 4004 प्रोसेसर बन कर तैयार थी. ये पहला single chip microprocessor थी. जिसे Federico Faggin डेवेलोप किये. माइक्रोप्रोसेसर का अबिष्कार होने के बाद सुरु हुआ microcomputer की जमाना. जिसे आगे चलकर personal computer या P C के नाम से जाना गया.

कंप्यूटर की पीढ़ी – Computer Generation

हम कंप्यूटर की पांचवी पीढ़ी में रह रहे है. जिसमे AI-Artificial Inteligence का नाम हम सबने सुना है. ये एक ऐसा तकनीक है जिसमे computer इन्शान की brain के जैसा सोच सकता है. आपने Sophia का नाम तो सुना ही होगा. ये एक humanoid robot है. जो इन्शान जैसा सोचते है, बातें करते है.

First-generation – Vacuum tubes (1937 – 1946)

सं 1937 में Dr. John V. Atanasoff और Clifford Berry दोनों मिलकर पहला डिजिटल कंप्यूटर को बनाये. जिसे ABC की नाम से जाने जाना लगा. उसके बाद सं 1943 military के लिए Colossus नाम का इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर बनाया गया.

1946 में 30 टन वज़न का ENIAC को बनाया गया. जो पहला general computer था. इस कंप्यूटर में 1800 Vacuum tubes को processing के लिए इस्तेमाल किया जाता था. जो size में बोहोत बड़ा और भरी भरकम हुआ करता था. magnetic drum इसमें memory unit के रूप में इस्तेमाल होता था. कंप्यूटर को चलना बेहद hard था. इसमें machine language को उसे किया जाता था. और सबसे बड़ी बात है, इसमें कोई प्रोसेसर नहीं था और ये single task computer था. Example: IBM-70, ENIAC

Second-generation – Transistors (1947 – 1962)

Computer की दूसरी generation सुरु हुयी transistors का अविष्कार के बाद. इसमें vacuum tubes के जगह पर transistors का इस्तेमाल होता था. पहला commercial purpose के लिए 1951 में कंप्यूटर को पब्लिक के लिए मार्किट में उतारा गया. Example: UNIVAC I (UNIVersal Automatic Computer I)

1953 the International Business Machine (IBM) 650 and 700 series
IBM ने 1953 को 650 and 700 series के कंप्यूटर को लेकर आया.कंप्यूटर की प्रगति की इस पीढ़ी बोहोत सारे नया system computer के साथ जुड़ता गया. जैसे tape and disk, printer. इसी समय 100 कंप्यूटर programming language भी बनाया गया. इसी समय computer memory और operating systems भी ईजाद हुए.

Third-generation – Integrated Circuit (1965-1971)

ICs आविष्कार हुआ 3rd generation मैं. Integrated circuit ने transistor का जगह लिया और advanced computer को जनम दिया. एक IC में transistors, resistors, and capacitors लगा हुआ रहता था. जिससे कंप्यूटर का आकार को compact किया. साथ ही में इसे ज्यादा efficient भी बनाया.

इसी पीढ़ी ने कंप्यूटर में multi programming operating system को introduce किया गया. इसके साथ advanced features जैसे remote processing और time-sharing का भी इस्तेमाल हुआ. FORTRAN-II TO IV, COBOL, PASCAL PL/1, BASIC जैसा High-level languages का इस्तेमाल सुरु हुआ.

Fourth-generation – VLSI technology (1971 – 1980)

Microprocessor है VLSI technology का चर्चित नाम. इसका मतलब और फुलफॉर्म है Very Large Scale Integrated(बहुत बड़े पैमाने पर एकीकृत). Intel ने बनाया पहला Microprocessor. जो एक small chip में लगभग 5000 transistors को एकत्रित किया गया. जो high-level tasks को करने में सक्षम था. इसका hitech chip का electricity consumption बोहोत ही कम था.

चौथा पीढ़ी computing में कई बड़े बड़े पन्ना जोरता गया. पहला supercomputers को इसी समय बनाया गया. Personal computer or PC भी इसी पीढ़ी की देन है. C, C+, C++, DBASE जैसे computer language को इस समय इस्तेमाल किया गया.

Fifth-generation – Artificial Intelligence (1981 – present day)

पांचवी पीढ़ी में VLSI बन गया और भी powerful और बेहतर ULSI. जिसे Ultra Large Scale Integration technology, कहते है. इसमें एक microprocessor चिप में ‘दस million electronic components’ को डाला गया.

ये जमन है AI का. और कंप्यूटर में Artificial Intelligence software को इस्तेमाल इस पीढ़ी में सुरु हुआ. जो कंप्यूटर को एक ईशान जैसे सोचने का ताक़त दिया. कंप्यूटर और भी powerful and compact बन गया. Java, .Net, C++ जैसा high-level languages यूज़ होता है.

Natural language processing, Superconductor technology, Speech recognition, Quantum Calculation जैसा फीचर कंप्यूटर को miraculous technology बना दिया है. फिर भी अभी और developments आना बाकी है.

भविष्य के कंप्यूटर – future computers

Computer प्रगति की यात्रा 1937 से लेकर आज 2020 में AI technology तक आ पौछा. हर एक generation के साथ कंप्यूटर और भी efficient होते गया. और ज्यादा powerful बनते गया. और अगर आगे की तरफ देखे तो future computer और भी शानदार होने बाला है. हो सकता है भबिस्य का कंप्यूटर एक molecules का size में हर जगह पर मौजूद रहे.

Ubiquitous computing का concept पर काम चल रहा है. जो capable होगा कोईभी device पर, कोईभी location में किसीभी format में अपनेआप को ढालने में. कोई भी डिवाइस को कंप्यूटर बना देगी. Advanced नई computer technologies बनाने जा रही है Quantum computer. जिसमे शोधकर्ता उन्नति के और तेजी से आगे भी बढ़ रहे है.

DNA computers का कांसेप्ट भी रिसर्च में है. जो एक Bio computers या genetic computers के रूप में आएंगे. जिसमे एक ग्राम DNA स्टोर कर पायेगी one trillion डिस्क में जितना data समां सकता है. Photons का इस्तेमाल करके Optical Computers बनाने का भविष्य में सूची है. इतना कहा जा सकता है. future में computer ऐसा होने बाला है, जिसे अभी हम सिर्फ कल्पना ही कर सकते है.

image showing that instagram run in laptop and pc with title

Instagram on PC/Laptop: How to run? Step by step guide in Hindi

Instagram on PC/Laptop: हम इंस्टाग्राम को mobile application मानते है. और ये सही भी है. Instagram mobile यूजर के लिए ही बनाया गया एक फोटो और वीडियो saring app है. मगर आजकल हम काम करते करते, mobile को बिना हाथ लगाए अपना instagram account का status check करना चाहते है. वो भी हमारा laptop या desktop का screen में. मगर कैसे किया जाताहै वो हमें पता नहीं होता है. आज का लेख उसी का हल को लेकर.

हम इस hindi article में बताएँगे कैसे आप instagram को pc/laptop में आसानी से इस्तेमाल कर सकते है. मोबाइल के जैसा ही photo और video अपलोड कर सकते है. और share भी कर सकते है. और ये जानकारी आपको step by step दिया गया है सुभ्रा सोम ब्लॉग में. दो तरीका बताया जायेगा, जो कोई भी कर सकता है technical हो या न हो. पढ़ते रहे.

How to run Instagram on PC and Laptop?

दोस्तों पहला प्रोसेस जो हम दिखाने जा रहे है. वो है keyboard में कुछ बटन को दबा कर. जो बिलकुल आसान है और इसके लिए आपको कोई भी software या extension को इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. मगर इसमें आप इंस्टाग्राम को मोबाइल के जैसा इस्तेमाल तो कर लोगे. मगर फोटो वीडियो बगेरा upload या फिर delete नहीं कर पाओगे.
मगर जो दूसरा तरीका हम दिखाने जा रहे है वो बिलकुल Instagram on mobile ही है. सिर्फ फरक ये है की ये आप big स्क्रीन जैसा laptop और desktop में चला रहे होंगे. इसमें photo and video upload के साथ remove भी कर पाओगे. like, comment सभी होगा. निचे देखिये step by step process. और सीखिए कैसे इंस्टाग्राम को लैपटॉप और PC में चला सकते है.

Run Instagram on PC/Laptop by keyboard soft keys

  • 1 स्टेप: google में Instagram लिखे और enter दबाएं.
  • 2 स्टेप: फर्स्ट रिजल्ट जहा instagram लिखा है उसे क्लिक करें. instagram.com खुलेगा. जैसा की निचे पिक्चर में दिख रहा है.
  • 3 स्टेप: अगर आप पहले कभी इंस्टाग्राम को pc या laptop में खुले है तो “continue as” के बाद आपका instagram user name दिखेगा. उसे दबाये. बरना आप सेकंड ऑप्शन signup with email or phone number को दबाये.
  • 4 स्टेप: left top position में जो 3 dots दिख रहा है उसे दबाये.
    (अगर 3rd और 4th steps आपका ब्राउज़र में नहीं आ रहा है, तो सीधा 5th स्टेप में आपको जाना है. और आपको निचे दिए गए इमेज का जैसा layout मिलेंगे)
  • 5 स्टेप: Log In option को दबाये.
Instagram login process in laptop
  • 6 स्टेप: फर्स्ट बॉक्स में Phone number, username or email को डालें. जो आपका insta account में डाला हुआ है.
  • 7 स्टेप: सेकंड बॉक्स में Password डालें और Log In में क्लिक करें.
enter login ID and Password process in instagram
  • 8 स्टेप: इसके बाद जो स्टेप है, ‘Save your login info’. अगर Save Info करते है, तो अगला बार आप same laptop या pc में login info दिए बिना ही login कर पाओगे.
Login details save process
  • 9 स्टेप: अब आपको अपना keyboard में Ctrl + Shift + I दबाना है.
  • 10 स्टेप: अब Ctrl + Shift + M दबाये. इससे आप जब भी pc या laptop से login करोगे, वो mobile view में ही ओपन होगा.
Mobile View open on Laptop or Desktop process

Note: ये क्रोम ब्राउज़र में होगा, पेज इमेज के जैसा दिखेगा. क्रॉस को दबाके एक्स्ट्रा पोरशन को ऑफ कर दें. और अगर आप Mozilla Firefox इस्तेमाल कर रहे है तो सिर्फ Ctrl + Shift + M को दबाये, mobile view खुल जायेगा.

How to open Instagram on PC via Extension

  • 1 स्टेप: गूगल में लिखिए Instagram Extension. और पहला रिजल्ट को क्लिक करें.
  • 2 स्टेप: Extension for Instagram नाम का एक्सटेंशन ओपन होगा. उसे ‘Add to Chrome’ बटन को दबाके इनस्टॉल करें.
Extension for Instagram
  • 3 स्टेप: ‘Add Extension’ में क्लिक करें.
how to ad extension on chrome browser on laptop
  • 4 स्टेप: extension क्रोम में ऐड हो चूका है. उसे पिन करने के लिए exiension button को दबाये. जैसा की इमेज में दिख रहा है.
how to open extension menu
  • 5 स्टेप: अब Pin Button को दबाये. निचे इमेज के जैसा.
how pin extension, before after process
  • 6 स्टेप: ब्राउज़र के left top corner में instagram logo दिख रहा है. उसे दबाके instagram open करें.
instagram logo of the extension and how to open it

Conclusion

Instagram को mobile view में कैसे खोल सकते है? ये अपने सिख लिया. मगर Instagram एक मोबाइल अप्लीकेशन है. उसे mobile के लिए ही बनाया गया है. तो उसे मोबाइल में अगर उसे मोबाइल में अगर उसे करते है तो ज्यादा efficiently काम करेगा. मगर laptop या desktop में काम करते करते अपना काम चलाने के लिए instagram excess ऊपर दिए गए उपाय से कर सकते है.
दूसरा तरीका है एक्सटेंशन के जरिये. और ये chrome web store में मौजूद है. लाखो लोगोने इसे डाउनलोड और इनस्टॉल भी किया है. और ये सेफ भी है. मगर फिरभी गूगल आपको report करने का ऑप्शन देता है. अगर आपको लगता है की ये आपका डाटा का मिसयूज कर रहा है तो इसे गूगल में रिपोर्ट भी कर सकते है. इससे google द्वारा जरुरी कदम उठाया जायेगा.

How to delete all photos at once on Instagram?

cover image of the article "how to delete multiple photo on instagram in hindi"

Instagram multiple photos: how to delete in Hindi (steps)

Instagram multiple photos delete: Instagram एक मोबाइल में चलने वाली application है. जो काफी पॉपुलर है. इंस्टाग्राम को ज्यादातर photo sharing application के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. और इसे youths के द्वारा बोहोत ही ज्यादा पसंद किया जाता है. हम इस्टाग्राम में fashion, lifestyle, makeup, diy crafts, memes या फिर new gadgets आदि का फोटो शेयर करते रहते है. मगर हरदिन का images upload तो कर देते है, मगर उसे delete करते वक़्त परेशानी आती है. किउकी instagram में एक साथ multiple photos delete करने का कोई फीचर नहीं है. और एक एक करके photo remove करना मुमकिन भी नहीं है.

इस हालत में करे तो करें क्या! खैर इसी problem का solution को लेकर आज का आर्टिकल. इसमें हम आपको आसान तरीके से step by step बताएँगे कैसे आप multiple photos को delete कर सकते है Instagram account से एक क्लिक के जरिये. ताकि आपकी पुरानी instagram images remove हो सके.

Instagram multiple photos delete Hindi (Step by step)

अपना Instagram account से एक से ज्यादा old photos को रिमूव करते वक्त आपको कोई challenge का सामना न करना पड़े. इसलिए हम subhra som की इस hindi blog में आपको step by step प्रोसेस से, अनावश्यक फोटो को permanent delete या फिर temporary remove करने का प्रणाली बता रहे है. और वो भी एक नहीं, बल्कि कई सारे प्रोसेस. एक एक करके देखे.

1.Cleaner for Instagram (Unfollow, Block & Delete)

Instagram multiple photo delete article steps
  • 1 स्टेप: सबसे पहले Cleaner for Instagram एप्लीकेशन को डाउनलोड और इनस्टॉल करें.
  • 2 स्टेप: App को खोलने के बाद, instagram account का login ID या Username और password से लॉगइन कर लें.
  • 3 स्टेप: Media option पर क्लिक करें. जैसा की इमेज में दिख रहा है.
  • 4 स्टेप: Photos / Videos को सेलेक्ट करें, जिसे आप डिलीट करना चाहते है. अगर all images और videos को डिलीट करना चाहते है तो ‘quick select’ ऑप्शन को दबाएं.
  • 5 स्टेप: Flash sign का blue button को दबाये.
  • 6 स्टेप: फ़्लैश साइन के अंदर जो delete option दिख रहा है, उसे दबाएं.

Note: इसका पूरा नाम है “Cleaner for instagram – Unfollow, block & delete” और ये एप्लीकेशन playstore पर मौजूद नहीं है. इस टूल को गूगल में सर्च करते ही ये मिल जायेंगे. वहाँ से apk को डाउनलोड कर लेना है. ये application आपको एकबार में 50 images या videos को डिलीट करने का मौका देता है. अगर ज्यादा चाहिए तो इसका pro वर्शन मौजूद है.

2.Mass delete for Instagram

  • 1 स्टेप: Mass delete for Instagram को डाउनलोड और इनस्टॉल करें. Apk google में मौजूद है.
  • 2 स्टेप: login with instagram बटन को दबाएं. और अपना इंस्टाग्राम ID और password को डालें.
  • 3 स्टेप: App का Bottom bar में post option को क्लिक करें.
  • 4 स्टेप: File को longpress करके select करें जो डिलीट करना है.
  • 5 स्टेप: ऊपर दाये और delete button को दबायें.
  • 6 स्टेप: एक confirmation मैसेज आएगा उसे Ok करें.
  • 7 स्टेप्स: अब setings में जा कर statistics देह सकते है.

3.Instant Cleaner for Instagram

  • 1 स्टेप: Instant cleaner for Instagram एक थर्ड पार्टी एप्लीकेशन है. इसे गूगल में सर्च करें. एप्लीकेशन को डाउनलोड और इनस्टॉल करें.
  • 2 स्टेप: app install होने के बाद ‘login with instagram’ बटन को दबाएं.
  • 3 स्टेप: इंस्टाग्राम ID और password से लॉगइन करें.
  • 4 स्टेप: निचे बॉटम बार में post ऑप्शन को दबाएं.
  • 5 स्टेप: photos or videos को लोंगप्रेस करके सेलेक्ट करें.
  • 6 स्टेप: ऊपर दिख रहा delete बटन को दबाएं। डिलीट होते ही आपको एक dialog box नज़र आएगा, जो दिखायेगा total delete count को.

4.Unfollow & Cleaner for Instagram 2020

Unfollow & Cleaner for Instagram 2020 एक एंड्राइड एप्लीकेशन है, ये playstore पर मौजूद है. साथ ही में इस tool का apk आप गूगल में सर्च करके भी थर्ड पार्टी वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते है.

  • 1 स्टेप: App को play store से डाउनलोड और इंस्टॉल करें.
  • 2 स्टेप: login with instagram करे. अपना इंस्टाग्राम का creadential का इस्तेमाल करके.
  • 3 स्टेप: Photo को चयन करें और delete बटन को दबाएं.
  • 4 स्टेप: मल्टीपल फोटो डिलीट होने का stats को चेक करें.

How to delete a single photo from Instagram Hindi

दोस्तों आपका कई सारे पिक्चर को एक साथ डिलीट करने का समस्या का समाधान तो हमने बता दिया इस हिंदी ब्लॉग में. मगर हमारे कई दोस्तों को ये भी जानकारी नहीं होती है, की एक single photo delete कैसे करना है instagram के account से. हम हमारे उन्ही दोस्तों के लिए सुभ्रा सोम वेबसाइट का निर्माण किये है, जिन्हे सिखने का इच्छा है हिंदी में. तो चलिए देखते है केबल

एक फोटो को कैसे हम इंस्टाग्राम में रिमूव कर सकते है step by step.
खैर ये ऑप्शन हमें instagram में ही मिल जाता है जो की multiple photo delete करते वक़्त नहीं था. Single photo या video को delete करने का प्रक्रिया को दोहराएं.

  • 1 स्टेप: Instagram App को अपने मोबाइल में open करें.
  • 2 स्टेप: App का निचे bottom bar में प्रोफाइल आइकॉन को दबएं.
  • 3 स्टेप: Photo/Video को सेलेक्ट करें, जिसे डिलीट करना चाहते है.
  • 4 स्टेप: तीन verticle dots को क्लिक करें, जो ऊपर दाये और दिख. जैसा की इमेज में दिख रहा है.
insta-single-post-delete-pic
how to delete instagram single photo steps
  • 5 स्टेप: लिस्ट में से Delete ऑप्शन को दबाये.
  • 6 स्टेप: फिर एक बार delete को दबाये.

AdSense का ads में से पीला बैकग्राउंड कैसे हटाएँ?

this image showing yellow background of adsense ads

Adsense Yellow Background: how to remove in Hindi

Ad sense Yellow Background: Adsense में हम जब अकाउंट बनाते है, और Ad Code को अपने ब्लॉग पर लगाते है, तब ads display होता है. मगर ads के साथ ही पीछे की तरफ एक background colour नज़र आता है. जो आम तौर पर yellow colour या पीला रंग का नज़र आता है. जो पूरी webpage का लुक्स को बिगाड़ देता है. किउकी हमारा theme का कलर के साथ वो बैकग्राउंड कलर मैच नहीं करता है.

नए bloggers या website users इसे हटाने में भी असमर्थ रहता है. किउकी अगर वेबसाइट wordpress में है तो हम किसी plugins के जरिये ad code को pages पर लगाते है. जैसा की wp quads, Advanced Ads, Quick Adsense, WordPress Ad Widget, Google AdSense बगेरा बगेरा plugins.

मगर ज्यादातर plug ins हमें yellow background colour को remove करने का option प्रदान नहीं करता है. और yellow background ads में दिखी जाने पर revenue को भी प्रभाबित करता है. और अभी हमारे ज्यादातर bloggers है non technical, जिन्हे कोड्स का इस्तेमाल करना नहीं आता. उसके लिए कुछ आसान तरीका हम इस hindi blog में बताएँगे adsense yellow background remove करनेका.

Ads Background color किउ होता है?

this image shows a four link ads as sample ads and yellow background behind it

असल में adsense Ads के पीछे yellow color में दिखाई देने बाला background, ads का spot को दर्शाती है. जब भी हम adcodes को अपने ब्लॉग में लगा लेते है, ads show होते है रेस्पॉन्सिव (responsive) unit के रूप में. (हालांकि आप fixed size का ads भी लगा सकते है. मगर उस हालत में बिज्ञापन शो होने का संभावना काम हो जाता है. इसीलिए responsive size ही बेहतर माना जाता है.)

अर्थात आपके विज्ञापन निर्धारित होता है जहा आपने उसका प्लेसमेंट किये है, उस जगह को देखते हुए. कभी छोटा और कभी बड़ा. मगर ad spot एक निर्दिस्ट परिधि में रहता है. तो अगर आपका ad unit छोटा आकर का ad show कर रही है, तो बाकि का हिस्सा एक बैकग्राउंड कलर से भरा जाता है. ताकि पता चले वह पर कितनी बड़ी जगह बिज्ञापन के लिए मौजूद है.

सिर्फ जगह का avalability के ऊपर ही ads का चयन नहीं होता है. बल्कि कोण सी device में ad show हो रही है और कौन सा Advertiser का ads दिखाई दे रहा है इसके ऊपर भी निर्भर करता है. इसके लिए adsense अपने algoritham के मुताबिक काम करता है.

असलमे ये background color नहीं है. ये है ad spot का background color. ad-sense में बैकग्राउंड कलर ads में दिए गए text का background को कहा जाता है. जो पुराने एडसेंस में अलग तरीके से आप चयन कर सकते थे. मगर अभी वैसा नहीं होता है. Yellow या पीला एक डिफ़ॉल्ट कलर है जो adspot को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसे आप अन्य रंग में परिबर्तन कैसे कर पाओगे या transparent कैसे कर सकते है, ये subhra som के इस hindi blog में जानिए.

How to change Ad Yellow Background Hindi

दोस्तों अगर आप नया ad-set बना रहे हो तो पहले बैकग्राउंड रंग का चयन कर सकते थे. मगर ad बनाने के बाद दो तरीके से yellow background को हटा सकते है. एक एक करके निचे बताया गया है, देखिये.

1.Ads Transparent’ Plugin के मदत से:

हमारे नॉन टेक्निकल दोस्तों के लिए wordpress plugin के एक बेहतरीन प्लगइन्स मौजूद है. जिसका नाम है Ads Transparent. और इस प्लगइन की मदत से कोई coding के बगैर ही adspot को transparent या yellow color से अन्य कोई भी कलर में बदला जा सकता है. आसान interface और इजी टू यूज़ इस प्लगइन को step by step बताये गए प्रोसेस से इस्तेमाल करें.

  • 1 स्टेप: सबसे पहले अपना wordpress dashboard में लॉगइन करें।
  • 2 स्टेप: plugins मेनू में क्लिक करके add new ऑप्शन में क्लिक करें. जैसा की इमेज में दिख रहा है.
  • 3 स्टेप: सर्च बॉक्स में “Advanced Ads” सर्च करें.
  • 4 स्टेप: प्लगइन को इनस्टॉल कर लें और एक्टिवेट करें. जैसा की इमेज में दिख रहा है.
  • 5 स्टेप: इनस्टॉल होने के बाद, Advanced Ads plugin के डैशबोर्ड में जा कर settings में क्लिक करें.
  • 6 स्टेप: adsense ऑप्शन को क्लिक करें.
  • 7 स्टेप: आपको transparent background ऑप्शन दिख रहा होगा
  • 8 स्टेप: ट्रांसपेरेंट बैकग्राउंड ऑप्शन को टिक करें. (note: transparent ऑप्शन आपको तभी दिखेंगे, जब आप अपना adsense accont को advanced ads के साथ कनेक्ट कर चुके होंगे.)

बस आपका काम हो गया. इसके कुछ देर बाद आप अपना वेबसाइट का webpage को refrese करें. आपको adsense का yellow background के जगह खाली दिखेगी. वो remove हो चुकी होगी.

2.Theme CSS coding के मदत से:

दोस्तों ये दूसरा प्रक्रिया है हमारे technical बन्दों के लिए. अगर आप भी टेक्निकल भाई हो तो आप अपना wordpress theme के अंदर. CSS code को परिवर्तन करके पूरी वेबसाइट का adsense yellow ad background को आसानीसे remove कर सकते है. इसके लिए आपको क्या करना है? निचे steps देखिये.

  • 1 स्टेप: wordpress में login हो जाएँ.
  • 2 स्टेप: Appearence मेनू में क्लिक करें.
  • 3 स्टेप: Editor में क्लिक करें. जो theme editor के नाम से भी रह सकता है. इमेज में देखिए.
  • 4 स्टेप: एडिटर में आपको style.css file को ढूंढ़ना है.
  • 5 स्टेप: फाइल मिल गयी? अब ctrl + f प्रेस करें. इससे searchbar ओपन होंगे.
  • 6 स्टेप: अब yellow color का code name को सर्च करें. जो की सामान्य रूप से #fff9c0 या #ff9 होता है. अगर इस कोड से नहीं मिला तो अपने थीम नाम को google में देखे और उसके कलर कोड्स को सर्च करें.
  • 7 स्टेप: अब आपको yellow color का कोड को transparent color का कोड से बदल देना है. और file save कर देना है. transparent color code है RBG(25,25,25,0).

आप कोई भी कलर का कोड को ads background के रूप में इस्तेमाल कर सकते है. आप google में अपना मनपसंद कलर का कोड देख सकते है. और उसको इस्तेमाल कर सकते है. हर वर्डप्रेस थीम में custom CSS या फिर additional CSS का ऑप्शन जरूर होता है. जिसे edit करना भी आसान है customization को सेव करने से ही काम हो जाता है. मगर आप कोई भी theme file को छेड़ने से पहले एक backup जरूर ले लें.

3.Additional CSS के मदत से:

ये तीसरा प्रोसेस है addistional CSs coding का मगर बिलकुल आसान है. ये टेक्निकल और नॉन टेक्निकल दोस्तों के लिए सबसे बेस्ट तरीका है. इससे adsense yellow background remove हो जायेंगे सिर्फ एक ही simple process में. इसके लिए निचे दिए गए स्टेप्स को दोहराएं.

  • 1 स्टेप: अपना wordpress login हो कर dashboard में जाएँ.
  • 2 स्टेप: Apperence में क्लिक करके customize को क्लिक करें. जो बिलकुल theme ऑप्शन के निचे नज़र आएंगे. (हो सकता है किसी किसी थीम्स में ये तीसरे या चौथे स्थान पर दिखे)
  • 3 स्टेप: अब आपको नया डैशबोर्ड मिलेंगे जैसा की इमेज में दिख रहा है. बहा आपको Aditional CSS में क्लिक करना है.
  • 4 स्टेप: अब आपको (1.) लिखा हुआ जगह में निचे दिए गए कोड को paste कर देना है. और publish ऑप्शन में क्लिक करना है. जैसा इमेज में दिखाया गया है.

ins.adsbygoogle { background: transparent !important; }
Note: Comment Box में कोड को फर्स्ट कमेंट से कॉपी करें।

4.AD Code के मदत से yellow background remove:

चौथा तरीका आपको अड कोड को थोड़ा सा एडिट करना है. इसके लिए तकनीकी ज्ञान का आवश्यकता नहीं है. ये कोई भी कर सकता है. कम से कम वो तो कर ही सकता है, जो adsense का इस्तेमाल कर रहे है. इससे ads का पीछे का पीला रंग का बैकग्राउंड आसानी से हट जायेगा. सिर्फ इसमें आपको हर adset का code को बदलना पड़ेगा. स्टेप्स देखिये.

  • 1 स्टेप: wordpress पर लॉग इन हो कर, सीधा adcode में जाएँ। अगर आप कोई plugin के मदत से ads लगाएं है, तो plugin को खोलिये।
  • 2 स्टेप: कोड का style में “background-color:transparent” ये लाइन को ऐड करना है. जैसे की निचे तस्बीर में दिख रहा है.
  • 3 स्टेप: बस save option में क्लिक करें. बस हो गया.

क्या आप जानते है! गूगल ऑफिस भारत में कहा कहा है? जानिए.

computer memory visuals with text "computer memory hindi me"

computer memory: types, primary and secondary memory, history in Hindi

कंप्यूटर में डाटा (input data) को सम्भाल कर रखना(save) और जरूरत पड़ने पर उसे फिरसे हाज़िर(retrieve) करनेका काम जो करता है उसे Computer Memory कहते है.

Intro: Computer Memory हिंदी: Computer Memory एक सामान्य शब्द है. जो भी डिवाइस कंप्यूटर में डाटा को store करने का काम करता है, उसे हम computer memory कहते है. memory का अर्थ है स्मृति. और computer जैसा हर electronic device में भी ये database को याद रखता है, अपने अंदर स्टोर करके. और जबभी user कोई डाटा को फिरसे पुनर्प्राप्त करना चाहता है, उसे memory से प्राप्त करवाया जाता है. मेमोरी का एक popular name, storage या store भी है.

Computer Memory in Hindi

in image a question asked "what is computer memory in hindi"

दोस्तों, Computer या किसीभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में Memory का मतलब है स्मृति या याददाश्त. जैसा की हम इन्शानो में होता है. एक उदाहरण से समझते है. Input device, जैसा माउस और कीबोर्ड द्वारा प्राप्त निर्देश को कंप्यूटर मेमोरी में स्टोर और सेव किया जाता है. यूजर (यानि के हम और आप) mouse के माध्यम से कोई program को संचालित करके क्लिक करते है. Keyboard से कुछ type करते है, और ये data के रूप में memory में store होता है.

इसके बाद मान लीजिये user ने computer device को बंद कर दिया. फिर कुछ देर बाद वो वापस से device power on करता है और उसी काम को continue करता है. तो वो पहले अपने अधूरा काम को माउस के मदत से फिरसे खोलता है. डाटा पुनर्प्राप्त होता है किउकी वो मेमोरी में store किया हुआ रहता है. बरना data lost हो जाता. इसे ही मेमोरी कहते है और computer memory इसी काम को अंजाम देता है.

कंप्यूटर या अन्य कोईभी electronic device में दो स्टेप्स में data store और retrieve (पुनर्प्राप्त) का काम होता है. इसी आधार पर प्राइमरी और सेकेंडरी इस दो भाग में computer memory को बिभाजित किया गया है. जिसके बारेमे निचे जानेगे.

What are the types of computer memory

this image represents computer memory type
computer memory type

कंप्यूटर में मेमोरी का मतलब समझा जाता है प्राथमिक मेमोरी (primary memory) को. पर general category किया जाये तो computer memory को हम दो basic type में बिभाजित करते है. दो तरह का computer memory होता है.

1. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) या माध्यमिक मेमोरी

Primary memory in hindi

RAM and ROM
RAM & ROM
  • RAM
  • ROM

प्राथमिक या primary memory वो होता है जो motherboard और cpu के संग्ल्ग्न होता है. और ये मदरबोर्ड में ही संगयुक्त रहता है. जैसा की RAM and ROM. प्राइमरी मेमोरी processor(cpu) के साथ साथ काम करते है. और इससे cpu आसानीसे और तेज़ीसे data read कर पाते है. जो कंप्यूटर को fast work करने में मदत मिलता है. Primary Memory को main memory भी कहते है. किउकी कंप्यूटर का एक मुख्य काम data read इसी के माध्यम से होता है.
Primary memory का दो केटेगरी होता है. Volatile memory और Non-volatile memory. Volatile Memory किसे कहते है? दोस्तों Volatile का मतलब है, जब भी हम device को power off करते है RAM में save हुआ data भी erased हो जाता है. Non volatile में ऐसा नहीं होता है. इसमें power off करने के बाद भी डाटा वही पर रहता है. मगर modern system में primary memory का volatile रूप का ही इस्तेमाल किया जाता है.

what is RAM (random access memory)

RAM का पूरा नाम है random access memory. ये कंप्यूटर का एक primary memory है और इसे main memory कहते है. दरहशल हम जो भी program या application हमारे compute या mobile डिवाइस में खोलते है, वो पहले RAM में ही load होता है. और डिवाइस जरुरत का primary data read करते है इसी से.

हम अक्षर मोबाइल पर multiple application का इस्तेमाल करते है एक साथ. और कंप्यूटर में भी multi tasking करते है. इस सभी को प्राथमिक स्तिथि में RAM का सहारा मिलता है. इस वजय से, अगर system ram ज्यादा हो तो हमारा डिवाइस भी फ़ास्ट चलता है. RAM volatile होने के कारन ये डाटा को temporary store करता है.

Types of RAM

  • DRAM
  • SRAM
  • NVRAM

DRAM: Dynamic RAM को शॉर्ट फॉर्म में DRAM कहते है. आमतौर पर Computer RAM का मतलब DRAM को ही समझा जाता है. किउकी ज्यादातर इस्तेमाल इसका ही होता है. ज्यादातर कंप्यूटर में DRAM ही लगते है, और ये कई दशकोसे चले आ रहे है. DRAM में दो तरह का प्रणाली होता है. Single data rate और double data rate. पुराणी कंप्यूटर में सिंगल डाटा रेट का इस्तेमाल होता था. वही नए ज़माने का कंप्यूटर डबल डाटा रेट का इस्तेमाल करता है.
(Note: जिस गति से डेटा कंप्यूटर के अंदर या फिर एक peripheral devices (जैसे माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर) या कोईभी input और output device और कंप्यूटर के बीच data transfer किया जाता है. उसे Data Rate कहते है.)

SRAM: SRAM का पूरा नाम है Static RAM. ये DRAM से आधुनिक और ज्यादा तेज़ है. SRAM ज्यादातर high-end server में इस्तेमाल होता है. ये आकार में काफी बड़ा होता है. और बोहोत ज्यादा expensive भी होता है. साधारण डेली यूज़ का कंप्यूटर में ये इस्तेमाल नहीं होता है. मगर, अगर हो भी तो data cache के लिए ही होता है. जिससे कंप्यूटर speed से काम कर पाता है.
चलिए नीचे देख लेते है DRAM और SRAM में क्या क्या मुख्य अंतर है?

DRAMSRAM
DRAM सस्ता है.SRAM DRAM महंगा है.
ये average speed देता है.ये लगभग तीन गुना faster काम करता है DRAM से.
ये पतला होता है.ये आकार में बड़ा होता है.
DRAM मिलता है Gigabytes(GB) में.SRAM मिलता है Megabytes(MB) में.
DRAM ज्यादा energy का खपत करता है.SRAM काम energy का करता खपत है.

NVRAM: NVRAM का पूरा नाम है non volatile random access memory. जी हाँ दोस्तों ये एक ऐसा कंप्यूटर मेमोरी का form है जो power off करने पर भी अपने अंदर data safely रख सकता है. इस NVRAM के बारेमे ज्यादा चर्चा नहीं होता है. किउकी इसकी अलग form ज्यादा popular हो चूका है. जैसे की flash memory. मगर है तो ये भी non volatile RAM ही. NVRAM का सबसे unique बात ये है, की इसमें battery लगते है. ये CMOS की बैटरी से power लेता है.
NVRAM का उदहारण है Ferroelectric RAM, FeRAM(F-RAM) और Magnetoresistive RAM(MRAM).

दोस्तो RAM का और भी कई प्रकार होता है. जिसे हमने एक दूसरा hindi article में डिटेल्स में बताया है. RAM के बारे मे पूरी जानकारी इस आर्टिकल में पढ़िए “RAM क्या है? कितने प्रकार का होता है? RAM काम कैसे करता है?”

what is ROM (read only memory)

ROM का full form है read only memory. ये भी device का primary memory है मगर इसका काम थोड़ा अलग होता है. सबसे पहलीबाट ये RAM के जैसा volatile नहीं होता है. ये Non volatile है. इसका मतलब डिवाइस off होनेके बाबजूद डाटा इसीमे मौजूद रहता है. मगर इसका डाटा कुछ अलग होता है. ROM में जो data रहता है, वो device manufacture द्वारा डाला हुआ कुछ programming होता है. जो system अच्छी तरह ran करने के लिए आबस्यक होता है. इसीलिए इसमें feed किया हुआ data को erase नहीं किया जा सकता है.

Types of ROM

  • PROM
  • EPROM
  • EEPROM

PROM: PROM का पूरा नाम है Programmable Read-Only Memory. ये ROM का ही एक प्रकार होता है. मगर इससे थोड़ा अलग होता है. किउकी ROM में system manufacturer द्वारा पहले से ही प्रोग्राम को डाला हुआ है. मगर PROM में ऐसा नहीं होता है. इसमें यूजर का जरुरत अनुशार एक programmer द्वारा प्रोग्राम इसमें डाला जाता है. मगर program को इंस्टॉल करने के बाद इसे मिटाना मुश्किल है.

EPROM: इसका पूरा नाम Erasable Programmable Read-Only Memory है. नाम से ही पता चल रहा है इसमें प्रोग्राम डालने के बाद इसे मिटाया भी जा सकता है. और फिरसे reprogram भी जा सकता है. बाकि ये PROM का जैसा ही है. मगर इसके खास बात ये है, की जब भी data erase किया जाता है. इसे ultra violate रोशनी के साथ रख्हा जाता है.

EEPROM: EPROM का ही advanced रूप है Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory (EEPROM). इसकी खास बात है, इसे कंप्यूटर में ही इरेस करके नए प्रोग्राम को इनस्टॉल भी किया जा सकता है. ये एक मात्र ROM है जिसमे read and write features देखने को मिलता है. program को अपडेट करते वक्त इसमें codes को write भी कर सकते है.

Difference between RAM and ROM

RAMROM
Volatile Memory हैNon-Volatile Memory है
Memory Capacity 1 to 256 GB प्रति chip या उससे भी ज्यादाMemory Capacity 4 to 8 MB प्रति chip
Read and Write दोनों कर सकता हैसिर्फ read कर सकता है
ये Temporary स्टोरेज हैये Permanent स्टोरेज है
इसे primary memory कहते हैइसे secondary memory कहते है
ये Fast हैये RAM से slow है
इसकी Type है SRAM and DRAMइसकी Type है PROM, EPROM and EEPROM
RAM को erase किया जा सकता हैROM को erase किया नहीं जा सकता

What is secondary memory in hindi

this image shows secondary computer memories
secondary computer memory
  • Hard disk drives (HDD)
  • Solid-state drives (SSD)
  • Optical drives (CD/DVD)
  • Pen drive, Memory Card (sd card)

सेकेंडरी मेमोरी या secondary memory मूल रूप से एक अलग device होता है. जो मदरबोर्ड के ऊपर mount किया हुआ नहीं रहता है. ये separate storage device होता है. जैसे Hard Disk, SSD, CD, DVD, Memory Card, Pen Drive इत्यादि. इनमे से HDD या hard disk drive और SSD (Solid State Drive) कंप्यूटर केस के अंदर ही बिठाया जाता है. बाकि सब external storage device है. Computer case के अंदर HDD या SDD मेमोरी में प्राइमरी मेमोरी से data transfer होता है. जरूरत पड़ने पर. किउकी ये दोनोही storage device है. डाटा को ट्रांसफर किया जाता है एक विशेष internal process के जरिये, जिसे virtual memory कहते है.

What is Hard disk drive?

Hard disk drive कंप्यूटर की एक secondary memory है. ये computer case के अंदर मदरबोर्ड से अलग बैठता है. ये एक electro-mechanical data storage device है. इसे permanent storage डिवाइस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. ये. data सुरक्षित सेव करके रख्हा जाता है. और जब भी future use के जरुरत परता है, ये मिल जाता है. modern electronic device में नए तौर का HDD भी देखने को मिलता है. जिसे external hard disk है. और ये एक pen drive के जैसा ही computer USB port में लगता है. जिसे आप बाहर से लगा कर इस्तेमाल कर सकते हो.

HDD की विशेषताएं (characteristics)

  1. इसमें heads लगी रहती है, जो घूमती है. इसे mechanical arm कहते है. इसीलिए ये slow भी होती है.
  2. Start up के लिए लंबा समय लगता है.
  3. Disk access times: 9 से 15 milliseconds(MS) का वक़्त लगता है.
  4. Hard disk drive फैन लगी रहती है. किउकी इसमें लगी mechanical heads घूमते वक़्त बोहोत heat produce करता है.
  5. Power Consumption ज्यादा होता है.

what is ssd in computer in hindi?

मॉडर्न स्टोरेज डिवाइस में Solid state drive आते है. ये एक external storage device है जो modern computer में और laptop में लगते है. ये आधुनिक और ज्यादा efficient device है. जो data store करते है तेज़ी से. इसमें integrated circuit लगा हुआ रहता है और flash memory के जरिये files को स्टोर करता है.

SSD की विशेषताएं (characteristics)

  1. SSD बोहोत ही fast होता है. ये HDD से लगभग सौ गुना तेज़ीसे file transfer कर सकती है. किउकी इसमें कोई mechanical arm नहीं रहता है.
  2. ये बहुत हल्की और आकार में भी पतली होती है.
  3. power consumption HDD के मुकाबले बहुत ही काम होता है.
  4. इसमें कोई मैकेनिकल head न होने के कारण ये silent भी होता है.
  5. SSD ज्यादा समय तक चलती है. इसकी durability HDD से ज्यादा होता है.

CD/DVD in hindi

Modern एक्सटर्नल स्टोरेज डिवाइस में से DVD popular storage device है. ये secondary storage में आते है. इसका पूरा नाम Digital Versatile Disc or Digital Video Disc है. ये एक digital optical disc होता है. जो rapidly rotate करते हुए डाटा को सेव करते है. जिसे disc write कहते है. इसके लिए optical DVD writer का इस्तेमाल किया जाता है.
CD भी इसी तरह का disc होता है. जिसका पूरा नाम Compact Disc है. ये DVD से कम storage capacity बाला होता है. मगर काम उसी तरह करता है.

CD/DVD की विशेषताएं (characteristics)

  1. Compact Discs (CDs) और Digital Versatile Discs (DVDs) इलेक्ट्रो ओप्टिकल डिवाइस है.
  2. इनमे कोई magnetic field नहीं होता।
  3. Hard disk के जैसा CD/Dvd चुम्बकीय छमता से छतिग्रस्त नहीं होता।
  4. read and write प्रक्रिया में इसमे power consumption ज्यादा होता है.
  5. CD और DVd को laser तकनीक से इस्तेमाल किया जाता है. DVd writer में laser लगा हुआ रहता है.
  6. दोनों में से ज्यादा storage DVd में मिलता है. और दोनों में ही Rewrit का ऑप्शन रहता है.

what is pen drive in hindi

Pen Drive भी एक सेकेंडरी डिवाइस है, जो external storage device है. Pen के जैसा ढक्कन लगा हुआ ये डिवाइस मिलता है. आज कल दूसरे तरह का भी पेन ड्राइव मार्किट में उपलब्ध है. ये एक USB Flash drive होता है. जिसमे flash memory का इस्तेमाल किया जाता है डाटा स्टोर करने के लिए. ये एक portable storage device है. Flash drive के बारेमे हमने निचे बताया है.

Pen Drive की विशेषताएं (characteristics)

  1. Storing और data transferring करने का एक सहज, आसान और भरोसेमंद storage device है.
  2. आकार में small size और पेन के जैसा देखने में.
  3. USb port में ही connect हो जाता है, ये plug and play डिवाइस।
  4. high capacity storage का सुबिधा. जो modern pendrive में 1Tb(Tera Byte) से 2Tb का space मिल सकता है. जो Large file को स्टोर और ट्रांसफर कर सकता है.
  5. ये एक Flash Drive है.
  6. Data transfer rate: USB version 2.0 में 35 Mbps तक स्पीड दे सकता है. USB version 3.0 में 625 Mbps तक स्पीड देता है.
  7. ये सस्ता भी होता है.

sd card

इसका पूरा नाम Secure Digital है. जिसे short-form में SD Card कहा जाता है. ये सेकण्डरी स्टोरेज है, जो बोहोत ही छोटा आकर का होता है. ये mobile, tablet, computer में इस्तेमाल किया जाता है. ये भी flash memory का इस्तेमाल करता है. SD कार्ड का बोहोत सारे variation मौजूद है. उनमे से एक है micro SD card. आज कल बोहोत high capacity बाले कार्ड्स भी उपलब्ध होते है.

SD card की विशेषताएं (characteristics)

  1. ये सेकेंडरी मेमोरी है और इसलिए इसमें non-volatile memory है.
  2. SD कार्ड में स्टोरेज capacity range 128 MB to 2GB.
  3. cards का default format होता है FAT16.
  4. इस memory में बिभिन्य तरह का variation देखने को मिलता है. normal SD card, SDHC card, or SDXC card.
  5. SDHC का पूरा नाम है SD High Capacity.
  6. SDHC cards capacities होता है 4GB से 32GB तक. और default format FAT32 है.
  7. SDXC का पूरा नाम है SD Extended Capacity.
  8. इसकी 64GB to 2TB तक storage capacity होता है. और default format exFAT होता है.
  9. SD cards की और दो वैरिएंट्स है Mini SD card और Micro SD Card.
  10. SD कार्ड durable होता है. और लम्बे समय तक चलता है. अगर अच्छे से रख्हा.
  11. इन Secure digital Cards(SD Cards) की एक विशेष फीचर ये है, की इसमें रख्हा images format के बाद भी recover किया जा सकता है. इसके लिए card recovery softwares का इस्तेमाल किया जाता है. formatting भी अगर इन सॉफ्टवेयर के द्वारा किया जाये तो फिर full format होता है.

ऊपर बताया गया basic computer memory का दो types प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी. आपने प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी का कुछ example भी देख चुके है. मगर इसके अलावा और भी कई प्रकार का कंप्यूटर मेमोरी मौजूद है. जैसे cache memory, flash memory. चलिए अब जानते इनके बारेमे. उससे पहले, आपका टेक्निकल ब्लॉग subhra som आपको कैसा लग रहा है, कमेंट में जरूर बताएं. इस हिंदी ब्लॉग में क्या क्या टॉपिक आपको चाहिए ये भी बता सकते है. चलिए आगे बढ़ते है.

Cache computer memory

दोस्तों Cache Memory एक छोटा सा memory device है जो processor core के आसपास ही नज़र आते है. ये एक बिशेस काम में मदत करता है. ये data copy करके अपने अंदर सेव करके रखता है, जो बार बार user द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए ये main memory locations को नज़र रखता है. और ये पता लगता है main memory का कौनसा लोकेशन repeatedly use किया जा रहे है. और जो डाटा अधिकबार इस्तेमाल किये जाते है, cache memory उसका एक कॉपी बना लेता है. इससे फ़ायदा ये होता है, की यूजर को fast response मिलता है.

Cache Memory प्राथमिक और सेकेंडरी दोनों रूप से इस्तेमाल होता है. अगर primary memory के रूप में ये इस्तेमाल हो तो, cache को सीधा processor के ऊपर या आसपास ही integrate किया जाता है.

Flash Memory definition

Flash Memory को flash storage भी कहा जाता है. ये एक non volatile memory chip होता है. जिसका इस्तेमाल USB flash drive मतलब pen drive में किया जाता है. pen drive का केस के अंदर ये एक electronic solid-state chip नज़र आते है. इसका काम भी data transfer करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अक्षर एक computer से अन्य कंप्यूटर में डाटा को हम pen drive जैसा flash memory storage के माध्यम से ही करते है. इस chip को electronically erase और reprogram भी किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल MP 3 players, digital cameras और SSD Cards (solid-state drive cards) में भी किया जाता है.

Difference Between Flash Memory and Cache Memory

FlashCache
Non volatileVolatile
Flash memory is slow then cacheCache memory is faster
Flash memory type: Secondary memoryCache memory type: primary or secondary cache memory
Location: Outside CPULocation: CPU chip or Motherboard
two types of flash memory: NOR and NANDtwo types of Cache memory: L1 Cache and L2 Cache

3D XPoint Drive

थ्री डी क्रॉस पॉइंट नाम से जाना जाता है 3D XPoint ड्राइव एक non volatile memory है. इसे July 2015 में Intel and Micron Technology साथमे मिलकर बनाया. Optane और QuantX नाम से बाजार में मिलने बाले ये storage device प्रीमेरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी का बिच का characteristic बाला है. ये secondary memory से कई ज्यादा fast है. मगर DRAM से slow है. वही कीमत में ये RAM से सस्ता भी है. मगर सेकेंडरी मेमोरी से कुछ महंगा है.

3D XPoint को लगाने का सबसे अच्छी बात ये है की non volatile होने के कारन, RAM के जैसा power off करने पर data lost नहीं होता है. मगर इसे आमतौर पर hosting server पर ही इस्तेमाल किया जाता है. साधारण daily use computer में को नहीं मिलता है.

First Computer Memory

Freddie Williams and Tom Kilburn ने पहला “random-access digital storage device” को बनाया. जिसे Williams tube या the Williams–Kilburn tube नाम से जाना जाता था. इसमें कई सारे tubes लगे रहते थे. जिसमे एक tube 1024 से 2560 bits of data को स्टोर करने का छमता था.
इसे British patents के लिए उन्होंने 11 December 1946 और 2 October 1947 को अप्लाई किये. और United States patent के लिए 10 December 1947 और 16 May 1949 को अप्लाई किये.

Who invented computer memory

Robert Heath Dennard
सन् 1967, सितंबर का महीने में, अमेरिकी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और आविष्कारक रॉबर्ट हीथ डेनार्ड ने सिंगल ट्रांजिस्टर बाले dynamic random access memory या DRAM का अबिष्कार किये. इसे सबसे प्रख्यात और आधुनिक कंप्यूटर मेमोरी माना जाता है.

History in hindi

  • सबसे पहला memory storage का इस्तेमाल हुआ था punch card के रूप में. जिसे computer में program डालने और उसे store करने के लिए बनाया गया था. इसे 1837 में Charles Babbage ने Analytical engine में इस्तेमाल किये थे. जो कप्यूटर का आदि रूप था.
  • पहला drum memory को बनाया गया 1932 में. इसे बनाने बाले थे Austrian developer “Gustav Tauschek” ने.
  • Atanasoff-Berry Computer का नाम बोहोतो ने सुना होगा. हमने subhra som में इसके बताया है what is RAM इस आर्टिकल में. खैर, Atanasoff computer में पहलीबार regenerative capacitor drum memory का इस्तेमाल हुआ.
  • इसके बाद आया Williams tube नाम का कंप्यूटर मेमोरी आया 1947 में। जो असल में CRT (cathode-ray tube) था.
  • UNIVAC 1101 या ERA 1101 वो पहला कंप्यूटर था जिसमे working memory देखा गया. जो मेमोरी से प्रोग्राम चलने में सक्षम था. फिर 1951 में पहला RAM का पेटेंट किया गया, और इसे करने बाले थे अमेरिकी कंप्यूटर बैज्ञानिक Jay Forrester.
  • Z22 नाम का कंप्यूटर में पहलीबार magnetic storage memory का इस्तेमाल हुआ.
  • one-transistor DRAM cell के लिए 4th June, 1968 में Dr. Robert Dennard को पेटेंट मिला।
  • 1969 में Intel द्वारा बाजार में लाया गया पहला 1024-bit ROM और 64-bit SRAM.
  • 1978 में पहला EEPROM develop किया गया. जिसका नाम था Intel 2816. और इसे बनाये थे Intel के साथ George Perlegos ने.
  • 1996 से सुरु हुआ DDR SDRAM और September 2014 से DDR4 SDRAM का बिक्री. source:computerhope.com

Conclusion – निष्कर्ष

हमारे नए धरा के जीवन शैली में कंप्यूटर का महत्व पूर्ण साधन है. और computer memory कंप्यूटर में इस्तेमाल किये जाने बाले एक बिशेष computer part है. आज हमने जाना computer memory किसे कहते है. और इसकी types के बारेमे जाना. हमने ये भी जाना primary और secondary memory किसे कहते है. हर popular memory का नाम और उसका इस्तेमाल characteristic हमने बताया.

हमने Hindi में history of computer memory भी उपलब्ध करवाया. भबिस्य में भी हम subhra som के द्वारा आपको quality article आपके भासा हिंदी में लाते रहेंगे. आपको इस आर्टिकल में दिए गए जानकारिया valuable लगा तो Facebook, twitter, WhatsApp में दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है. भबिस्य में भी आपका hindi blog subhrasom के साथ बने रहिये. अपने अपना समय दिया, इसके लिए आपको तहे दिलसे द्य्न्यवाद। जाते जाते एक comment जरूर करें. Thank You All!!!

image of computer RAM and text written what is ram in hindi in blue color

RAM क्या है? काम कैसे करता है? RAM को हिंदी में क्या कहते है?

RAM कंप्यूटर का अस्थायी(temporary) memory होता है. जिसे काम करते वक़्त, कंप्यूटर data save करने के लिए इस्तेमाल करते है..

Introduction of RAM(Hindi): RAM जिसका पूरा नाम है Random-access memory, कंप्यूटर का एक memory form है. ये ROM से अलग है. इसे भी storage की तरह इस्तेमाल किया जाता है. मगर ये temporary storage के जैसा काम करता है. computer में जब कोई data हम process करते है, तब उस वक़्त RAM में वो डाटा सेव होते है. इसके कारन इसे working memory कहते है.

RAM के बारे में विस्तार से जानने से पहले, जान लेते है computer memory कितने प्रकार का होता है. दोस्तों computer या Mobile device में जो मेमोरी इस्तेमाल होता है उसे दो भाग में बिभाजित किया जाता है. Primary Memory और Secondary Memory. और RAM इसी primary memory में आते है.

Computer, Tablet, Mobile जैसा डिवाइस में प्राइमरी मेमोरी भी दो भाग में बंटा हुआ है. जिसका नाम है RAM and ROM. आज हम RAM के बारे में ही बात करेंगे. सेकण्डरी मेमोरी में आते है Hard Disk, Floppy Disk, CD, Pen-drive इत्यादि. तो चलिए जानते है RAM in Hindi इस हिंदी ब्लॉग में. जिसका नाम है subhra som.

RAMROM
2 Types of Computer’s Primary Memory: RAM and ROM

RAM क्या है? (What is RAM in Hindi)

दोस्तों हम आज के समय में computer का इस्तेमाल अक्सर करते है. हमारे घरों में एक Desk Top Computer जरूर होता है. अगर कभी कंप्यूटर ठीक से काम ना किया, या सफाई करते वक़्त हम CPU को जरूर खोलते है. उसके अंदर लम्बा हरा रंग का एक या दो RAM नज़र आते है. PC Upgrade करते समय भी हम RAM को change करते है. ताकि हमारा System और Fast हो जाएँ. इसी RAM के बारे में जरुरी जानकारी आज जानेगे.

RAM असलमे motherboard का एक मुख्य component के तौर पर जानी जाती है. ये computer processing speed के लिए जिम्मेदार है. मतलब तेज़ी से काम करने के लिए RAM का Use किया जाता है. ये एक computer device है जो कंप्यूटर को allow करते है Input Data को read and write करने के लिए. जिससे processor समझते है क्या प्रोसेसिंग करना है. और उसके हिसाब से user को result देता है.

Random Access Memory इसका पूरा नाम है. नाम में ही RAM का काम को दर्शाता है. किउकी ये कंप्यूटर का working memory है, वर्क करते समय डाटा RAM में सेव होते रहता है और erased भी होते रहता है. RAM को Direct access memory भी कहते है. किउकी ये temporary save हुआ डाटा है. और इसे hard drive में सेव नहीं किया गया. और data का हर byte RAM से direct access किया जा सकता है. इसके लिए complicated path का जरुरत नहीं होता है. किउकी सबसे पहले data RAM में सेव होता है, इसीलिए इसे primary storage भी कहते है.

Computer RAM image with hindi text written in red color 'RAM in Hindi'
RAM in Hindi

RAM किसने बनाया? (Who Invented RAM)

सं 1967 में पहलीबार RAM का अबिष्कार किये Robert Heath Dennard ने. वो एक American electrical engineer और Inventor है. वो बनाये थे dynamic random access memory या DRAM को. जिसके लिए वो transistor का इस्तेमाल किये थे.

RAM को हिंदी में क्या कहते है?(RAM in Hindi)

किउकी रैम, कंप्यूटर का primary मेमोरी है. इसीलिए hindi में हम रैम को कंप्यूटर प्राथमिक ममोरी कह सकते है. वैसे रैम का official Hindi name तो कुछ नहीं है. पर काम का ऊपर base करके ये नाम से हम इसे समझ सकते है.

RAM काम कैसे करता है? (How does RAM work)

Random-access memory या RAM काम करते है कुछ साधारण steps में. जबभी यूजर computer में कुछ click करता है. वो सबसे पहले RAM में load होता है. इसका मतलब अगर आप कोई movie play करने के लिए destination folder में जाकर movie का फाइल में क्लिक किये. झट से RAM उस file को अपने अंदर ले लेता है.

इसके बाद display screen में RAM आपका movie को दर्शाता है. फिर अगर आप movie को forward या backward करते हो तो वो RAM से आगे पीछे होता है. किउकी पहले ही RAM data को store कर चुके है.

image represents the steps of RAM when it work
ram steps of work

वैसा ही अगर आप कोई software को click किये है, तो सबसे पहले program file जो computer drive में store है. वह से RAM में data load होता है. फिर जो भी command आप देते हो, उसके हिसाब से RAM data supply करते रहता है. और processor उसे प्रोसेस करते रहता है. ऐसे आपका काम होता है. RAM इसलिए main memory नाम से भी जानी जाती है.

Basic RAM कितने प्रकार का होता है? (types of basic RAM)

दोस्तों तीन प्रकार का RAM देखा जाता है. SRAM, DRAM और MRAM. मगर रैम का दो प्रकार ही बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. Static RAM (SRAM) और Dynamic RAM (DRAM). निचे हम एक एक करके सारे RAMs का डिटेल्स जानेगे.

  • SRAM
  • DRAM
  • MRAM

SRAM

Static Random Access Memory या SRAM कोई भी डाटा को instant load कर सकता है. CPU यहाँ से Data को direct access करता है. और इस काम के लिए ये six-transistor memory cell का इस्तेमाल करता है. जिसे MOSFETs कहते है. ये SRAM बोहोत ही fast data load करने में सक्छम है. और इसकी फ़ास्ट काम करने के कारन ये DRAM से expensive भी है.

इसे चलने के लिए बहुत ही कम power की जरूरत परता है. ये SRAM कंप्यूटर का Cache memory बनाने में मुख्य भूमिका निभाती है. 1990 दशक से आज भी ये इस्तेमाल होते जा रहे है. ज्यादातर LCD Screen, Router, Digital Camera में इस्तेमाल किया जाता है.

SRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • DRAM से SRAM तेज है.
  • ये Long term चलती है.
  • ये DRAMs की तुलना में कई गुना अधिक महंगा है.
  • इसे ज्यादातर Cache Memory के लिए use होता है.
  • ये DRAMs की तुलना ज्यादा space लेता है.
  • इसे बार बार refresh नहीं होना परता है, DRAM के जैसा.
  • SRAM module का Electricity Consumption कम है.
  • इसकी 1 Cycle का समय DRAM से कम लगता है. किउकी access के बिच में इसे pause होने की जरुरत नहीं पड़ता. इसलिए ये fast काम करता है.
  • SRAM volatile है, मगर system power on रहते वक़्त ये खुदको बिना recharge किये ही data value बरकरार रखता है.

DRAM

Dynamic Random Access Memory या DRAM थोड़ा slow है SRAM के मुकाबले. ये काफी पुराना system है. ये पाया जाता था 1970 से 1990 के मध्य भाग में. और ये transistor and capacitor का इस्तमाल करता है मेमोरी स्टोर करने के लिए. जो साथ में मिलकर DRAM cell का निर्माण करता है.

इसे चलने के लिए electric power की जरुरत परता है. ये खुदको समय समय पर refresh करते रहता है. ताकि charge बनी रहे. बार बार रिफ्रेश करने के कारण इसकी काम करने के छमता slow हो जाती है. ज्यादा तर पुराने home PC में DRAM ही इस्तेमाल होता था. ये मुख्य तौर पर networking hardware, video games, PC में इस्तेमाल किये जाते थे. अभी DDR RAM का इस्तेमाल होता है. जिसके बारे में नीचे बताया गया है.

DRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • SRAM से DRAM काफी slow है.
  • ये short term चलती है.
  • SRAM से सस्ता है.
  • इसे बार बार refresh होने की जरुरत पड़ता है.
  • ये space कम लेता है.
  • DRAM का Electricity consumption ज्यादा है, किउकी इसे refresh होने के लिए every milliseconds ज्यादा power की जरुरत पड़ता है.
  • इसे data access के बिच में विराम चाहिए, इसलिए ये slow हो जाता है.
  • DRAM volatile है. PC power off करते ही ये shut down हो जाता है. और power on रहते वक़्त भी इसे बारबार खुदको recharge होना पड़ता है data value बरकरार रखने के लिए.

MRAM

Magnetoresistive Random Access Memory या MRAM के नाम से ही पता चल रहा है, की इसमें चुम्बकीय शक्ति का इस्तेमाल होता है. जी हाँ ये data save करता है magnetic power से. ये आधुनिक technology का कमाल है. ये अन्य RAMs के तुलना में काफी कम power consume करता है. small devices जैसे mobile, tablet के लिए ये आदर्श है. इसमें बेहतर storage भी मौजूद है. और ये फ़ास्ट भी है. ये nonvolatile है.

MRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • ये high speed operation में सक्षम है.
  • MRAM की long टाइम तक चलती है.
  • ये inexpensive भी है.
  • ये आकार में SRAM छोटा भी है.
  • MRAM काफी lower power consumption करती है.
  • ये electric charge की जगह पे magnetic storage elements के रूप में स्टोर होती है.
  • ये non-volatile है.

Modern RAM का प्रकार (types of Modern RAM)

रैम तो बहुत सारे किस्म का है. मगर आज का कंप्यूटर (today’s computer) में निचे बताई गयी रैम को ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. उनमे से कुछ basic ram है जो हमने ऊपर ही बता चुके है.

  • SRAM (Static RAM)
  • DRAM (Dynamic RAM)
  • SDRAM (Synchronous Dynamic RAM)
  • SDR SDRAM (Single Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • DDR SDRAM, DDR2, DDR3, DDR4 (Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • GDDR SDRAM, GDDR2, GDDR3, GDDR4, GDDR5 (Graphics Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • Flash Memory

SDRAM क्या है? (What is SDRAM in Hindi)

Synchronous dynamic random access memory या SDRAM जो DRAM का परिवर्तित रूप है. ये रैम Simple DRAM से बोहोत ज्यादा fast और advanced है. ये system clock के साथ खुदको सिंक्रनाइज़ करता है. इसका मतलब दोनों एक ही समय पर processing हो सकता है. ये CPU clock के साथ sync होता है.

SDRAM यूजर का input देने के बाद respond करता है. Synchronize होने के कारण CPU parallel data को साथ में operate कर सकता है. SDRAM में ये खूबी है. इसका मतलब हुआ अगर यूजर ने कोई input दिया, मगर पहला इनपुट अभी तक processing हो रहा है. फिरभी ये नया input को भी साथ में ही process करेंगे. जिसे pipe-lining कहते है.

SDR SDRAM क्या है? (What is SDR SDRAM in Hindi)

‘Single Data Rate Synchronous Dynamic Random Access Memory’ या SDR SDRAM भी डायनामिक मेमोरी का एक variation है. ये एक clock cycle में single data process कर सकता है. असलमे ये SDRAM का ही बर्धित नाम है. ये दोनों ही एक ही है. सं 1993 में बाजार में आये और अभी भी मौजूद है. इसे मुख्य तौर पर Computer और Video Gaming console के लिए बनाया गया था.

DDR SDRAM क्या है? (What is DDR SDRAM in Hindi)

इसका पूरा नाम Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM है. इसमें और SDR में मुख्य अंतर ये है, इसमें Double Data परती क्लॉक साइकिल प्रोसेस होता है. गति में ये SDR से दुगना है. किउकी डबल डाटा प्रोसेसिंग करने का छमता इसमें है. सं 2000 में ये मार्किट में आयी और आज भी मौजूद है. और इसे Computer Memory के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. निचे DDR की और variation को देख लेते है.

DDR2 क्या है?

DDR SDRAM का उन्नत रूप है DDR2 . ये इसकी short नाम है. इसका पूरा नाम DDR2 SDRAM है. किउकी ये इन्ही के बिरादरी का है. double data rate को upgrade किया गया है DDR2 में. इसमें भी दो read और दो write होता है प्रति clock cycle में. मगर इसका clock speed को बढ़ाया गया है. इसके लिए ये और भी गतिशील हो चूका है अपने पुराने version DDR1 के मुक़ाबले. इसकी speed 533 MHz है. जहा पुराणी DDR1 में 200 MHz में ही सिमित था. इसकी power consumption भी कम है DDR(DDR1) के तुलना में. जो 1.8 V है. इसमें 240 pins का संरचना किया गया. जो की DDR से बोहोत ज्यादा है. इसके लिए ये ज्यादा capable हुआ.

DDR3 क्या है?

Up gradation के साथ DDR RAM का और उन्नत रूप है DDR3. ये सं 2007 में बाजार में आयी. जिसका processing power और बेहतर के साथ ये speed up हो गया. इसकी electricity consumption और कम हुयी. जो 1.5 V है. साथ में ये और भरोसेमंद हुआ पहले के मुक़ाबले. इसमें pins की संख्या 240 ही है.

DDR4 क्या है?

आज ज्यादा इस्तेमाल होने वाले RAM है DDR4. ये बाजार में आयी सं 2014 में. इस advanced RAM में बेहतर signal processing के साथ 1600 Mhz का क्लॉक स्पीड दिया गया है. इसमें memory capacity ज्यादा है. ये SDRAM का सबसे improved रूप है. reliability में भी ये अन्य से ज्यादा शक्तिशाली है. इसमें pins के संख्या 288 है.

DDR5 क्या है?

14 July 2020 को release किया गया नवीनतम RAM को, electronic device के मार्किट में. इसका ऑफिसियल नाम है Double Data Rate 5 Synchronous Dynamic Random-Access Memory. इसमें मुख्य विशेषताएं है बिजली की खपत कम करना और doubling bandwidth.

इसे Rambus द्वारा बनाया गया. जो एक अमेरिकी technology कंपनी है. इसकी memory voltage to 1.1 V है. जो power consumption को कम करती है. ये बोहोत ही फ़ास्ट ram है. इसमें on-board voltage regulators का इस्तेमाल किया गया इसकी अधिकतम गति को प्राप्त करने के लिए. DDR 5 में 288 pin है और ये 51.2 GB/s per module स्पिड को ये सपोर्ट करता है.

Memory cell क्या है? (What is Memory Cell Hindi)

कंप्यूटर में RAM का Memory Cell होता है. जो असल मे building blocks है. ये वो electronic circuit है, जो बाइनरी जानकारी 0 and 1 को संग्रहीत करता है. ये काम करता है set reset process से. ये प्रक्रिया चलता है, जबतक value में set के चैत्र में 1 और reset के चैत्र में 0 न आ जाये. dynamic RAM memory में सेल बनता है एक transistor और एक capacitor से. और static RAM memory में cell बनता है लगभग five transistors की मदत से.

VRAM क्या है? (what is VRAM in hindi)

Video Random Access Memory इसका पूरा नाम. नाम से ही पता चल रहा है ये graphic data के लिए होता है. VRAM के द्वारा हम हमारे कंप्यूटर का graphic power को बढ़ाते है. ये image data को store करने का काम करता है. ये CPU और video card के बिच में लगी हुयी buffer है.

RAM की clock Speed किसे कहते है?

मूल तौर पर RAM में Clock Speed की मतलब RAM की Speed को समझा जाता है. मतलब कितनी fast RAM की data save करने की छमता है, उसकी measurement. एक सेकंड में RAM कितनी बार मेमोरी को एक्सेस कर पता है. इसे ही clock speed कहते है. ये मापा जाता है megahertz (MHz) में.

RAM की clock cycle क्या है?

क्लॉक स्पीड के बाद clock cycle आती है. घड़ी की एक पूर्ण चक्कर लगाने को क्लॉक साइकिल कहते है. उसी तरह प्रति सेकंड में कितनी बार RAM पूर्ण चक्कर पूरा करता है. उसे Clock Cycle of RAM कहते है. उद्धरण के तौर पर, अगर RAM का clock speed है 3200 MHz. फिर इसकी clock cycle होगी 3.2 billion प्रति सेकंड. इसका मतलब ये हुआ, अगर RAM cycle प्रति सेकंड में ज्यादा होगी, तो ये ज्यादा तेज़ी से डाटा स्टोर कर पायेगी. और system भी फ़ास्ट और स्मूथ चलेगी. सूत्र: wepc.com

RAM Form Factor क्या है?

दोस्तों फॉर्म फैक्टर क्या होता है? हमने motherboard का form factor के बारेमे यहाँ बताया है. इसे पढ़ेंगे तो आपको form factor क्या है उसकी आईडिया जरूर हो जाएगी. मगर Ram form factor के बारेमे थोड़ा सा जानना जरुरी है.

दो तरह का कॉमन फॉर्म फैक्टर रैम में भी देखा जाता है. एक है DeskTop PC के लिए और दूसरा है Laptop के लिए. DIMM (Dual In-Line Memory Module) form factor है PC के लिए होता है. SO-DIMM (Small Outline DIMM) रहता है Laptop में. आप मदरबोर्ड फॉर्म फैक्टर जरूर पढ़ लें. दोनों का काम एक ही है. मगर ये अलग है इनकी size और शेप में. DIMM और SODIMM slots एक दूसरे से अलग होता है.

How Much RAM Do You Need?

दोस्तों आपका कंप्यूटर का configuration मुताबिक आपको कितने Gb का RAM लेना चाहिए? साधारण परिस्तिथि में कितना रैम पर्याप्त होता है? ये सब जानते है. उससे पहले आप ये धियान जरूर रखे, computer RAM और Laptop RAM दोनों अलग होता है. दोनोको आप अदलाबदली नहीं कर सकते.

साधारण PC या Laptop में 4 GB RAM पर्याप्त होता है. मगर अगर आपका सिस्टम में आप light gaming करना चाहते हो, तो 8 GB का रैम का जरुरत होता है. मगर extreme gaming के लिए 16 GB या उससे ज्यादा रैम आपको बेहतर performance देंगे.

रैम का जरूरत कई चीजों के ऊपर base करता है. जैसे की आपका Operating System का Version, software कोनसा चलेगा, motherboard कौनसा है इत्यादि इत्यादि. motherboard का slot जिसमे आप रैम को बिठाओगे. उसे भी देखना जरुरी है. जिसे DIMM slots कहते है. मगर normal तौर पर ज्यादातर रैम compatible होता है slots के साथ.

RAM की इतिहास हिंदी में (History of RAM in Hindi)

दुनिया का सबसे पहला RAM बनाया गया 1947 में. जिसका नाम था Williams Tube . इसे बनाये थे Freddie Williams और उनके नाम के ऊपर ही इस memory का नाम विलियम tube. ये पहले के ज़माने का कम्प्यूटर्स में बतौर digital storage इस्तेमाल किया जाता था. इसको बनाने में Tom Killburn भी Freddie के साथ थे. इसमें मूल तौर पर एक cathode ray tube लगा रहता था. पर इसकी storage capacity काफी कम था. सिर्फ सौ से हज़ार bits ही इसका कैपेसिटी था. इससे पहले data store करने के लिए vacuum tube का इस्तेमाल होता था. जो बोहोत ज्यादा बड़ा और स्लो भी होते थे. मगर williams tube आकार में छोटा और speed में fast था.

Magnetic-core memory

सन 1955 से 1975 के बीच में Magnetic-core memory का इस्तेमाल होता था रैम के रूप में. इसे बनाया गया था 1947 में और develop किया गया था सत्तर के दशक का मध्य भाग तक. इसमें magnetized rings लगा हुआ होता था. और इसमें हर रिंग में 1 bit data store हुआ करता था. 1968 में Robert Dennard ने invent किये पहला Dynamic Random Access मेमोरी (DRAM). फिर Intel ने बनाया 1 Kb का RAM Chip सं 1969 में.

First IC RAM

इसके बाद 1970 के सुरुवात में integrated circuits का दौर सुरु हुआ. IC असल में silicon surface के ऊपर electronic circuits का कुछ सेट बैठा हुआ रहता है. MOS Dynamic रैम का अबिष्कार हुआ इसी साल. एक साल बाद ROM को बाजार में लाया गया. ये था erasable and programmable मेमोरी. जो RAM से अलग है. सं 1971 में इंटेल द्वारा digital multichip computer memory को लाया गया.

First 1 MB RAM

सन् 1983 में Apple द्वारा पहला 1 Mb RAM को लाया गया. जो तहलका मचाने बाला था. 1 Mega Bite से सफर 1 Tera Bite तक पोछा लगभग चौबीस सालों में. 2007 को 1 Tb बाला External Hard Drive को बाजार में लाया गया. ये रैम तो नहीं है. पर storage का माध्यम तो है. इस बिच में कई आबिष्कार हुए. कुछ कुछ successful रहा और कुछ नहीं चले. पर धीरे धीरे technology के छेत्र में बढ़ते बढ़ते आज हम DDR3L और DDR4 memory तक पोहोच चुके है.

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Motherboard: क्या है? कैसे काम करता है? Details in Hindi

Motherboard एक printed सर्किट बोर्ड होता है. जिसमें connectors/dedicated ports की मदत से computer या अन्य डिवाइस के प्रमुख उपकरण जुड़े रहते है..

परिचय – Motherboard in Hindi: Motherboard मूल तोर पर एक plate के ऊपर circuit draw किया हुआ एक आधार है. इसे जरुरत अनुशार system के लिए circuit के मुताबिक components को जोड़ने के लिए इस्तेमाल करते है. ये computer (या other expandable device) का मुख्य बोर्ड है, इसलिए इसे main printed circuit board या PCB कहते है. ये Layers of fiberglass(शीसे रेशा) और Copper(तांबा) से बनाई जाती है. फाइबर ग्लास Insulation के लिए और तांबा से सर्किट का रास्ता बनता है.

Motherboard क्या है? (What is Motherboard – Hindi)

Computer motherboard का definition के बात करें तो, ये कंप्यूटर में लगी वो platform है जहा सारे Units वापस में जुड़ते है. इस पतली सी प्लेट में प्रिंट किया हुआ सर्किट के जरिये electronic components एक दूसरे के बीच में communication कर पाते है. जैसे Hard disk, Mouse & keyboard, USB, Parallel port, CPU Chip, RAM slots, PCI slot इत्यादि.

कोनसी unit में क्या data किस components के जरिये input और output करेंगे ये motherboard की circuit के जरिये डिवाइस को बताया जाता है. मदरबोर्ड ये भी सुनिश्चित करता है की हर यूनिट में power supply ठीक तरह हो पाए. ये बनते है fiberglass और copper से. ये है मदरबोर्ड की परिभाषा(definition).

Two main functions of the motherboard
Power Supply: Properly supply electrical power to the individual components
Provide Route: Give a route to allow the components to communicate with each other

उदाहरण के लिए: ये mother board कुछ हमारे घर का बिद्युत का mainboard के जैसा काम करता है. कौनसा कोने मे क्या चल रहा है, एहि से plan करते है. वैसा ही कोई device में कोनसा circuit क्या काम करेंगे वो motherboard में ही printed रहता है. इसलिए इसे planar board भी कहते है. इसके अलावा भी बोहोत सारे नाम है. जैसा की – main circuit board, system board, baseboard, logic board, mobo.

motherboard picture and written motherboard hindi
motherboard in hindi

Motherboard को किसने बनाया?(Inventor of Motherboard)

First Motherboard का निर्माण में किसी एक बेक्ति का तो नाम नहीं है. पर इसे IBM कंपनी ने personal computer के लिए बनाया. जिसे Planar कहा जाता था. इसके बाद पहला AT motherboard को IBM ने August 1984 में प्रस्तुत किया. AT का डिटेल्स नीचे बताया गया है.

Motherboard का प्रकार (How many types of Motherboard)

4 types of Motherboard: मूल तौर पर चार तरह का motherboard पाया जाता है. जैसे की XT, AT, Baby AT and ATX.

XT Motherboard

eXtended Technology से बनाये जाने के कारण इन्हें XT motherboard कहते है. ये पहले के ज़माने का model motherboard है. जिनमे Low Insertion Force (LIF) sockets रहता था. इसमें पुराने processor लगते थे. इनमे कोई port नहीं होते थे. 12 पिन वाले कनेक्टर की मदत से power supply किया जाता था. इनमे RAM slot में Dual In-Line Memory Module लगते थे. इसके साथ एक Industry Standards Architecture (ISA) स्लॉट दिखी जाती थी. extra cards लगाने के लिए.

AT Motherboards

Advanced Technology(AT) मदरबोर्ड थोड़ा आधुनिक थे. इनमे 20 पिन बाले power connector का इस्तेमाल होता था. इसके साथ PGA (Pin Grid Array) Socket, SD Ram slots, ISA slots भी रहते थे. इसे IBm ने बनाया था. और बादमे Baby AT द्वारा अधिक्रमण किया गया था. Baby AT के बारे में निचे बताया गया है. AT का एक्साम्पल 386, 486 motherboard.

Baby AT

इसके बाद XT और AT motherboard का मिलाजुला रूप आया Baby AT नाम का मदरबोर्ड. इनमें पहली बार DDR Ram slots दिया गया. इसमें दो तरह का processor sockets रहता था. slot type सॉकेट्स और PGA sockets. इसके अलावा SD Ram slots, PCI slots, ISA slots भी थे. इसमें 12 Pin power connector, 20 Pin power connector और Ports ये तीनो सुबिधा मौजूद था. Pentium-III और Pentium-IV इस तरह का मदरबोर्ड है.

ATX Motherboard

Advanced Technology eXtended या ATX motherboard आज हम इस्तेमाल करते है. ये latest motherboard है. इसे ATX form factor से डिज़ाइन किया जाता है. (form factor का बारेमे निचे बताया गया है.) ATX में 20 pins और 24 pins का कनेक्टर और port रहता है. साथ में MPGA Processor Sockets, DDR Ram slots, PCI slots, AGP slots, SATA connectors जैसा मुख्य features भी रहते है. Pentium-IV, Dual-Core, Core 2 Duo, Quad Core, i3, i5, i7 आदि इसके उधारण.

Motherboard पोर्ट और कंपोनेंट्स (Motherboard Ports and Components)

  1. Mouse & keyboard
  2. CPU Chip
  3. CPU slot
  4. RAM slots
  5. ROM Chip
  6. Hard Drive slots
  7. Northbridge with heat sink
  8. Southbridge
  9. USB
  10. Parallel port
  11. PCI slot
  12. IDE controller
  13. CMOS Battery
  14. Floppy controller
  15. AGP slot
  16. ISA slot
  17. Power connector
this image demonstrate the motherboard in a CPU case
Motherboard in a computer case

functions of Mouse & Keyboard, CPU Chip, CPU Slot

Mouse & keyboard:
माउस और कीबोर्ड के जरिये हम कोई भी data computer में डालते है. Motherboard के साथ माउस और कीबोर्ड External port के जरिये direct connect रहता है. ये सबसे प्रचलित सिस्टम है. इसमें DIN connector का इस्तेमाल होता है. इसे AT-style keyboard कहा जाता है. ये हमारे घरोमे पुराने Computer में देखने को मिलेंगे. जिसमे mouse और keyboard DIN connector से ज़ुरा हुआ है.

मगर अभी modern computer में छोटा आकृति का PS/2 port keyboard connector का इस्तेमाल हो रहा है. जो मदर बोर्ड के साथ माउस और कीबोर्ड को जोरते है.

CPU Chip:
Motherboard में वर्ग की आकृति की, एक छोटा सा electronic components रहता है. इसे chip कहते है. ये एक motherboard parts है. और इस CPU chip का main काम होता है डाटा का प्राथमिक processing करना. microprocessor, microcontroller इस तरह का Cpu chip है.

CPU Slot:
CPU socket को CPU slot भी कहा जाता है. इसमें mechanical components लगी होती है. जिसका मुख्य काम है microprocessor और printed circuit board (PCB) को जोड़कर रखना.

functions of RAM Slots, ROM Slot, HD Slot

RAM Slots:
ये मुख्य रूप से computer में memory (RAM) को जोड़ने का काम करता है. ये एक socket होता है जो motherboard में लगी रहती है. जिसके ऊपर हम हमारे RAM को बिठाते है. इसे DIMM Slot कहते है (or DRAM). RAM कंप्यूटर का एक temporary memory होता है. जो काम करते वक़्त data save करता है. इसलिए इसे हम working memory भी कहते है. एहि कारन है RAM बढ़ने से computer speed भी बढ़ जाता है. किउकी तब कंप्यूटर एकसाथ ज्यादा programs में काम कर पाता है.

ROM Slot:
ये chip computer में रीड-ओनली मेमोरी को जोरता है. ये भी motherboard का एक unit है. इसके द्वारा कंप्यूटर में permanent or semi-permanent data को रखा जाता है. ROM के बजह से हम कंप्यूटर को ऑफ करने के बाद भी डाटा delete नहीं होता है.

BIOS का नाम आपने सुना होगा. ये एक Firmware होता है. जो कंप्यूटर ऑन करने के बाद booting process के समय hardware initialization को परफॉर्म करता है. ये BIOS chip भी ROM में ही लगी होती है.

Hard Drive Slot:
SATA Slot (serial advanced technology attachment slots) के जरिये hard drive को motherboard से जोड़ा जाता है. ये एक connector होता है जो कंप्यूटर का permanent storage जैसे HDD (hard drive) or SSD (Solid State Drive) को जोड़ता है. इशिमे हमारा saved files स्टोर रहता है. पुराने कंप्यूटर में PATA port का इस्तेमाल किया जाता था.

HDD में एक spinning platters रहता है. जो घूम कर data save करता है. ये पुराणी हो चुकी है. SDD आधुनिक है. और fast speed के साथ flash memory में डाटा सेव करता है

functions of North & South Bridge, USB Ports, Parallel Port

Northbridge with heat sink:
PAC या northbridge एक integrated circuit है. इसका main काम है CPU, AGP और memory के साथ कम्यूनिकेट करना. motherboard में एक socket के माध्यम से ये जुड़ी रहती है. नए कंप्यूटर में ये एक single chip के रूप में लगता है. पर पुराने कम्प्यूटर्स में तीन अलग अलग chips को मिलाकर northbridge बनता था. इसके साथ heatsink भी ज़ुरा रहता है. जो गर्मी को control करता है.

Southbridge:
कंप्यूटर का I/O functions, जैसा USB, audio, serial, BIOS आदि को कण्ट्रोल करता है Southbridge. एक सर्किट से जुड़ा होता है ये component.

USB Ports:
Motherboard में चार, छे या आठ USB Ports रहता है. जिनमे से दो या चार पोर्ट डायरेक्ट mother board के पिछले हिस्से में सोल्डर किया हुआ रहता है. इनका काम है USB Device को connect करना.

Parallel Port:
25 Pins वाले parallel port का इस्तेमाल किया जाता है printer, monitor, external Zip drive, scanner जैसे एक्सटर्नल डिवाइस को जोड़ने के लिए. इन्हे peripherals devices कहते है. और ये पोर्ट एक बार में डेटा के कई बिट्स send कर सकते है. इसीलिए इन्हे parallel port कहते है. ये motherboard के साथ peripherals को संगयुक्त करने में काम आते है.

functions of PCI Slot, IDE Controller, CMOS Battery

PCI Slot:
PCI connectors को इस्तेमाल किया जाता है controller cards और अन्य उपकरणों को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए. ये मदरबोर्ड में बना हुआ एक सॉकेट है. तीन तरह का मुख्य PCI motherboard connector मिलते है. जिन्हे एकसाथ Slots कहते है.

IDE Controller:
Integrated Drive Electronics या IDE मूल तौर पर hard drive को motherboard के साथ जोड़ने का काम करता है. इन्हे ribbon cable लगा हुआ रहता है. जो flexible होता है और देखने में फीता का जैसा लगता है.

CMOS Battery:
Current time and date को सठिक रखने के लिए motherboard में ये बैटरी लगी होती है. system reboot के समय CMOS Battery घरी को backup power देता है. और इसके बजह से System Clock का parameter सठिक समय बता पाता है.

functions of Floppy Controller, AGP Slot, ISA Slot, Power Connector

Floppy Controller:
FDC एक electronic chip controller है. जो मदरबोर्ड पर embed किया हुआ रहता है. और ये floppy drive का कार्यक्षमता को नियंत्रण करते है.

AGP Slot:
Accelerated Graphics Port या AGP Slot इस्तेमाल किया जाता है video card लगाने के लिए. Motherboard में ये connector के साथ graphic card को लगाकर high graphic games को खेला जाता है. Gaming PC में ये इस्तेमाल होता है.

ISA Slot:
expansion cards लगाने के लिए ISA Slot का इस्तेमाल होता है. इसका Industry Standard Architecture है. इन्ह कनेक्टर के जरिये मदरबोर्ड में video card, network card, extra serial port इत्यादि लगाया जाता है.

Power Connector:
PC में इलेक्ट्रिसिटी की आपूर्ति करने के लिए power supply unit का इस्तेमाल किया जाता है. और mother board में power supply करने के लिए दो 4 pin या एक 8-pin बाले auxiliary connector का इस्तेमाल होता है. यह कनेक्टर motherboard में प्रोसेसर और अन्य उपकरणों को अतिरिक्त बिजली प्रदान करता है.

Motherboard Diagram

motherboard with labeled as parts name
motherboard diagram

ऊपर हमने motherboard की रेखा-चित्र उपलब्ध करवाया है. इस diagram से आपको आसानी होगी, मदर बोर्ड में कौनसी parts कैसी दिखती है. इस motherboard diagram में labels के साथ हर एक अंश को आप देख सकते है. इस diagram में CPU socket कहां पर लगता है ये देख सकते हो. CPU मतलब माथेरबोर्ड का ब्रेन जिसे processor कहते है. ये इसी स्थान पर है.

इसके बाद RAM के लिए स्लॉट को पीला और हल्दी रंग में देख हो. Northbridge और Southbridge किसे कहते है ये तो आप जान ही चुके हो. diagram में look भी देख लीजिये. इसके बाद ATX power, IDE, AGP Slot को देखा जा सकता है. डायना चैत्र में PCI स्लॉट मिलेंगे. घरी और तारिक को बैकअप देने बाले CMOS battery बिच में है. मगर ये निचे के तरफ भी होते है. Keyboard, Mouse, Audio Port, USB पोर्ट जैसा peripheral को नाम के साथ चिन्हित किया गया है.

Motherboard Form Factor क्या है?

Motherboard का Form Factor निर्धारित करता है इसकी shape and size को. फॉर्म फैक्टर से निर्धारित होता है किस प्रकार के case और power supply मदरबोर्ड के लिए उपयुक्त होगा. इसके अलावा motherboard का structure भी form-factor निर्दिस्ट करता है.

असलमे form factor एक दर्जी जैसा काम करता है. जैसे आपके बॉडी शेप के मुताबिक आपका कपड़ो का शिलाई होता है. जैसे दर्ज़ी आपका शोल्डर, कॉलर, रिस्ट का अलग अलग माप लेता है. जैसे आपका शैर्ट के हिसाब से पैंट बनता है. और दोनों के हिसाब से शूट बनता है. वैसा ही form factor से पता चलता है. motherboard में कोनसा चीज कहा बैठेगी. किस तरह का मदरबोर्ड का कंप्यूटर केस होना चाहिए. RAM कैसा होना चाहिए. RAM का form factor यहाँ जानिए. एक लाइन में कहे तो form factor असल में एक measurement chart होता है. कोईभी device के लिए.

मदरबोर्ड का इतिहास (History of Motherboard in Hindi)

image of a old motherboard and text written "history of motherboard (hindi) in yellow color
motherboard history

साल 1970 में, जब motherboard की आज की model नही बनी थी, ये पतली प्लेट का circuit board जो हम आज इस्तेम्मल करते है. तब, उस वक्त कुछ अलग सा system का प्रचलन था. एक बोर्ड के जगह पर, कई सारे printed circuit board तब इस्तेमाल किये जाते थे. जिन्हे एक card-cage case में सेट किया जाता था. components को backplane के द्वारा sockets के माद्यम से बोर्ड के साथ जोड़ा जाता था. ये एक classic system था. Backplane असल में छोटा आकृति का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड होता है. जिनमे कई सारे sockets लगे रहते है. Example: ubiquitous S-100 bus(1970)

Planar

1981 में पहलीबार modern motherboard को IBM company ने हमारे पर्सनल कंप्यूटर में इस्तेमाल करने के लिए बनाया. इसे Planar कहा जाता था. इस “Planar” Motherboard कई छोटे छोटे holes बना हुआ रहता था. जिनके जरिये electronic components को कनेक्ट किया जाता था. इस system को breadboard कहा जाता है. इन्ह मदरबोर्ड में तार के मदत से chips, RAM, CPU को लगाया जाता था.

फिर आया AT mother board का दौर, जब 1984 के अगस्त महीने में IBM ने AT और Full-size AT motherboard form factor को बाजार में लाया. AT के बारेमे हमने ऊपर बात किया है. फुल AT साइज अनुपात 12″ wide और 13.8″ deep था. जो एक full size AT tower case में बैठता था.
फिर IBM ने इसको और upgrade करके 1985 में baby AT को ले कर आएं. इसे BAT भी खा जाने लगा. और ये बेबी AT early 1990s तक चलता रहा.

Western Digital नाम की कंपनी 1987 में बनाया LPX motherboard. जिसका पूरा नाम है “Low-Profile EXtended motherboard”. ये मदरबोर्ड फिट होते थे slim-line और low-profile case में. इसमें expansion boards motherboard के समानांतर रहते थे. जिसके कारन system बोहोत ही पतला दिखाई देता था. और size में भी छोटा होता था. मगर size-small होने के कारन इसमें expansion slots दो या तीन ही रहता था. इस board में video adapters लगी रहती थी. साथ में sound भी बोर्ड में मौजूद थी. मगर दाम में सस्ता था.

इससे एक साल पहले ही 1986 में Gigabyte(GB) का जनम हुआ. जिसे बनाया है Taiwan के Yeh pei-cheng ने. 1987 में ही Taiwan में स्थित, दुनिया का fifth largest motherboard निर्माण संस्था Elitegroup(ECS) ने ECS boards को बनाया.

Our gen motherboard

इसके बाद मार्किट में आया Intel अपने ATX motherboard का पहला संस्करण लेके. साल था 1995. जुलाई के महीने में इंटेल के द्वारा बनाई गयी हमारे आज का मदरबोर्ड. जो बोहोत ही ज्यादा advanced और configuration बाले थे. फिर तो ये चलता रहा और बहुत सारे कंपनी ने motherboard बनाया. इनमे से AMD, Kontron, NVIDIA, Supermicro, EVGA आदि उल्लेखनीय है.

Popular Motherboard manufacturer 2020 (उत्पादक)

  • ASRock
  • Asus
  • Biostar
  • EVGA Corporation
  • ECS
  • Gigabyte Technology
  • Intel
  • MSI (Micro-Star International)
  • AOpen
  • ABIT

How to choose a motherboard

New PC खरीदना है या पुराने को upgrade करवाना है. कंप्यूटर का foundation बनाने में motherboard, processor, RAM आदि का सही चयन जरूरी है. दोस्तों बाजार में कई कंपनियां है. और बहुत सा motherboard models उपलब्ध है. जिनके features भी अलग अलग होते है. Form Factor और components भी भिन्न होते है. ऐसे में सही मदरबोर्ड को choose करना काफी challenging हो सकता है. चलिए बताते है motherboard buy करते वक़्त आपको किन चीजोंका points बनाकर बोर्ड को लेना है.

1st, 2nd, 3rd steps

1. Platform
First step मैं आपको processor या CPU का चयन करना है. जो motherboard brain है. इसके लिए आपको अपने work के अनुशार entry-level या ultra-fast CPU को चुनना है. अगर आपका जरुरत सिर्फ web browsing, छोटा मोटा office work, small editing और low-end games खेलना है तो पहला option बेहतर होगा. High-end processor आपको advanced level high graphic games खेलने के लिए, या high resolution video editing के लिए बेहतर होगा. आप Intel या AMD में से एक ले सकते हो. Intel का ninth-generation और AMD का Zen 2 या Zen 3 बेहतर है.

2. Motherboard
Second Step मैं आपको अपना motherboard को चुनना होगा. मदर बोर्ड का चयन करते वक़्त आपको दो चीजे ध्यान में रखना होगा.
१. processor socket. जिससे मदरबोर्ड CPu के साथ connect होंगे. आपका CPu के अनुशार ये सॉकेट होना चाहिए. सॉकेट में Supported CPUs उल्लेखित रहता है.
२. chipset. ये basically motherboard software and hardware का कॉम्बिनेशन होता है. इसीसे motherboard का अन्य parts ठीक तरीके से काम करता है.

3. Form Factor
Third Step मैं आपको Form Factor को देखना है. फॉर्म फैक्टर के बारेमे आप ऊपर जान चुके है. motherboard बिभिन्य size और shape में आते है. आपको cpu case को मदरबोर्ड के साइज के हिसाब से चुनना है. या आप cpu case के हिसाब से motherboard को चुन लीजिये. comparitively बड़े आकार का motherboard होने से फ़ायदा ये मिलता है, की आप ज्यादा components उसमे लगाने का option पाओगे.

4th, 5th, 6th Steps

4. Expansion Options
Forth Step में आपको देखना है मदर बोर्ड को expand करने का क्या options आपको मिल रहा है. जिसे PCI slots कहते है. ताकि future upgrade में आप extra components लगा सको. जैसे networking card, graphics card, sound card इत्यादि.

5. DIMM of RAM
Fifth Step मैं आपको कोनसा RAM लगाना है ये decide कर लेना है. 4 Gb, 8Gb, 16Gb जो भी Ram आप लगाने बाले हो आपको motherbord में बने ram का module के अनुशार RAM का चयन करना है. इसे DIMM कहते है. जितने ज्यादा DIMM slots होंगे, उतना ज्यादा RAM लगाने का option आपको मिलेगा.

6. Storage
Sixth Step स्टोरेज का. अब आपको देखना है, storage connectors को. क्युकी आप HDD या SDD storage अपने सिस्टम में लगाने बाले हो. आपको अपना स्टोरेज के अनुशार motherboard में देख लेना है उसे लगाने का कनेक्टर मौजूद है या नहीं. बेस्ट होगा अगर SDD और HDD दोनों का connector मौजूद हो. HDD और SDD के बारेमे हमने आपको ऊपर बता चुके है.

7th, 8th, 9th Steps

7. Graphics Card Slot (GPU)
Seventh Step में देखना है graphic card के लिए motherboard में जगह है या नहीं. किउकी अच्छे graphics के लिए हमें extra ग्राफ़िक कार्ड भी लगाना है. वैसे मदरबोर्ड के साथ inbuilt GPU रहती है. पर वो low-powered GPU होती है. Heavy graphic game खेलने के लिए अलग से graphic card लगाने पड़ते है.

8. Ports and Connections
Eighth Step में देख लेना है motherboard में जरूरी peripherals connection के लिए ports बानी हुयी है या नहीं. इसके अलावा ये भी देखना है की cpu case मदरबोर्ड के साथ connection sockets match हो रही है या नहीं. नहीं तो हो सकता है सकता है, motherboard का port राइट साइड में है और case का socket hole लेफ्ट सेईदे में. mismatch ना हो जाये ये देखना है.

9. Brand
Finally Ninth Step में हमें motherboard brand को चुन लेना है. ऊपर का सारे जरुरत पूरा होने के बाद manufacturer को select करना है. इसके लिए ऊपर हमने popular motherboard manufacurer list भी प्रोवाइड कर चुके है. बस आपका मदरबोर्ड का चयन पूरा हुआ.

Summary – Features of Motherboard

Motherboard आपका central processing unit case में कुछ screws के मदत से जुड़ा हुआ रहता है. ये कंप्यूटर का वो हिस्सा है, जो एक आधार का काम करता है. माँ के जैसा ही ये कंप्यूटर का अन्य parts को अपने ऊपर धारण किये रखते है. इसीलिए इसे motherboard का नाम मिला. इनमे कई port के माद्यम से important components एक दूसरे के साथ जुड़ते है. Peripherals जुड़ते है स्लॉट के माद्यम से. Monitor, mouse, keyboard, network cables, USB ये सभी मदरबोर्ड से जुड़े रहते है.
निचे दिए गए points मदरबोर्ड का कुछ key features है. जो ध्यान देने योग्य है.

  • Motherboard बिभिन्य प्रकार का होता है. उसके साथ components जोड़ने के ऊपर उसकी type निर्भर करता है.
  • मदरबोर्ड Single type का CPU और बिभिन्य type का memory support करता है.
  • मदरबोर्ड Form Factor को मदरबोर्ड का अन्य components के मुताबिक होना आबस्यक है.
  • Power Supply, case और motherboard को साथ में काम करने के लिए एक दूसरे के साथ compatible होना आबस्यक है.
  • Hard Disk और Graphics Card को मदरबोर्ड के साथ compatible होना आबस्यक है.

Conclusion – निष्कर्ष

motherboard का जर्नी शुरू हुए सालों बीत गए. IBM ने सुरु किया. फिर धीरे धीरे Intel, AMD जैसा बड़ी कंपनियां मदरबोर्ड का निर्माण सुरु किये. आज हम धीरे धीरे २०२० को पार कर चले है. और बीतें सालों में computer के छेत्र में काफी बदलाव भी हुए. जिनमे motherboard का advance होना आबस्यक था. हमारे कम्यूटर के साथ motherboard भी small होते गए. और हम ये अंदाजा भी लगा सकते है, आनेबाले सालों में technology और कितनी आगे जायेंगे. आपके साथ subhra som hindi blog भी भबिस्य के टेक को स्वागत करते हुए मिलते है अगली hindi article के साथ. आपने समय दिया, आपका तहे दिलसे धन्यवाद्.