this image showing a computer CPU cabinet and title written " CPU parts name hindi"

Computer CPU Parts क्या क्या होता है? पार्ट्स का नाम और काम क्या है?

Computer CPu में काफी सारे पुर्जे को मिलकर एक complete system बनता है. हर एक Individual parts का अपना एक अलग काम है. कंप्यूटर को efficient एक साथ काम करने के लिए Parts महत्यपूर्ण भूमिका निभाते है.

जैसा की Processor, Motherboard(Circuite Board), RAM, ROM, Hard Disk इत्यादि. ये सारे Computer parts को एक कैबिनेट के अंदर सजाया जाता है. इसे ही CPu कहते है. जिसका पूरा नाम है Central Processing Unit. और असलमे ये ही कंप्यूटर है. बाकि जो हम इसके साथ इस्तेमाल करते है, Monitor, Keyboard, Mouse बगैर एक्सटर्नल supporting parts है.

कंप्यूटर CPU के पुर्जों का नाम – Parts of Computer CPU

  1. Motherboard
  2. Processor/CPU
  3. RAM (Random Access Memory)
  4. ROM (Read Only Memory)
  5. BIOS
  6. Hard Disk Drive (HDD) or Solid State Drive (SSD) – Storage
  7. SMPS (switched-mode power supplies)
  8. Graphic Processing Unit (GPU)
  9. Optical Disc Drive (ODD)

What is Motherboard, Processor? (CPU parts)

1. Motherboard:
दोस्तों Motherboard क्या है? ये एक मुख्य अंग है कंप्यूटर की. Motherboard एक printed circuit board है. जिसमे कंप्यूटर की अन्य अंश लगा हुआ रहता है. जैसे की CPU, BIOS, memory, mass storage interfaces, serial and parallel ports, expansion slots और हर किस्म का controllers.

Motherboard is part of Computer

मदर बोर्ड एक पतली सी प्लेट का ऊपर सर्किट बना हुआ रहता है. इसके द्वारा control किया जाता है सभी ports को. motherboard के साथ expansion card को जोर कर इसकी परिधि को बारया जाता है. ताकि Optical Drive और Audio के लिए Connection जोड़ा जाये.

2. Processor:
दोस्तों CPU का मतलब हम समझते थे कंप्यूटर का वो बॉक्स जिसे computer case कहते है. जिसके अंदर motherboard, RAM ये चीजे लगी रहती है. मगर असलमे PROCESSOR क्या है? ये होती है कंप्यूटर के motherboard में लगी एक छोटा सा पुर्जा. जिसे computer brain आप कह सकते है.

Processor is a CPU part

प्रोसेसर के मदत से कंप्यूटर हर program को operate करते है. वैसा ही जैसे हमारा दिमाग करता है. इसे ही CPU भी कहते है. और इसकी quality निर्भर करता है speed के ऊपर. यानि processor speed जितनी ज्यादा होंगे कंप्यूटर उतनी fast काम कर पायेगी.

What is RAM, ROM? (Parts of CPU)

3. RAM:
क्या आप जानते है, RAM किसे कहते है? कंप्यूटर में हम जो भी गतिविधि दोहराते है, वो सभी RAM द्वारा access किया जाता है. इसीलिए इसे Random Access Memory कहते है. ये computer memory की एक form है. इसकी मूल काम है real time में data को temporarily save करके रखना.

RAM as a part of computer

जैसे अभी आप हमारे hindi blog subhra som पढ़ रहे हो. ये डाटा RAM द्वारा print किया जा रहा है. मगर जैसे ही आप दूसरी वेबसाइट को खोलते हो ये डाटा खो जायेंगे. मगर, अगर आप हमारे इस Hindi article को bookmark करके रखते हो, तो वो hard drive में सेव रहेंगे.

इसी तरह online के अलावा अगर आप computer में कोई software में कुछ लिख रहे हो या कोई काम कर रहे हो, वो जबतक आप save नहीं करेंगे, वो Ram में temporary ही save होंगे. इसलिए काम करते करते अगर computer off हो जाये तो डाटा खोने का डर रहता है. इसीलिए बिच बिच में file save कर लेना चाहिए.

RAM को मापने के लिए Megabytes (MB) और Gigabytes (GB) Unit का इस्तेमाल किया जाता है.

4. ROM:
Computer manufacturer द्वारा डाला गया ये एक software होता है. जिसे यूजर कोई modify या remove नहीं कर सकता. ये कुछ जटिल programming होता है जो system को चलाने के लिए महत्यपूर्ण भूमिका निभाते है.

ROM is a CPU part

ROM का full form है Read Only Memory. और इसका नाम इसके चरित्र के ऊपर दिया गया है. कुछ कुछ साधारण सी device में ROM एक complete operating system का काम करता है. उनमे दूसरे OS की जरुरत नहीं परता. इसे firmware भी कहा जाता है. इसका मतलब है permanent software program जिसे read-only memory में डाला गया है.

What is BIOS, HDD, SDD?

5. BIOS:
दोस्तों BIOS क्या है? क्या आप जानते है. अगर नहीं तो बताते है. BIOS एक फर्मवेयर है. और booting process इस firmware के द्वारा perform किया जाता है. कंप्यूटर ऑन करते ही कुछ समय ये लेता है साडी चीजे load करने के लिए. जैसे Operating system, software’s बगेरा screen पर लोड होकर आते है. इसे बूटिंग कहते है. और BIOS इसी काम को करते है. ये PC की system board में पहले से ही install रहता है, और computer on होते हि सबसे पहले येही run करता है.

BIOS is a important part

6. HDD – SDD (Storage):
कंप्यूटर storage device HDD or SDD क्या है और कौन सा है बेहतर? चलिए जानते है. HDD मतलब hard disk drive एक प्रचलित और पुराने ज़माने का computer storage है. इनमे mechanical platters (or disk) रहता है. जो घूमते रहता है. इसके ऊपर लगा read/write head डाटा को सेव करता है. इनमे moving parts होने के कारन power consumption भी ज्यादा होता है.

HDD is essential part

SSD एक नए ज़माने का कंप्यूटर स्टोरेज device है. असलमे ये एक chip है जो डाटा को save करके रखता है. ये HDD से बोहोत ही fast data save कर सकता है. और बोहोत ही कम power consume करता है. आजके हाई-end machine में SSD ही लगा रहता है.

SDD is advanced part of CPU

What is SMPS, GPU, ODD?

7. SMPS:
दोस्तों SMPS हमारे कंप्यूटर में एक महत्वपूर्ण parts है जिसके माद्यम से electronic power supply को ठीक तरह कंप्यूटर में प्रबेश कराया जाता है. SMPS का full form है switched-mode power supply. मगर इसे switcher के नाम से भी जाना जाता है. इनमे एक switching regulator लगा रहता है. जो बिजली की आपूर्ति को कुशल तरीके से प्रबाहित करते है. ताकि ज्यादा या काम voltage के कारन computer में कोई खराबी न आये.

SMPS is a important part of Computer CPU

8. GPU:
Graphics Processing Unit या GPU एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है. जो graphics जैसे की image को process करने के काम में लगता है. ये डिस्प्ले डिवाइस में लगी रहती है. जो frame buffer के जरिये छवियों के निर्माण में तेजी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. GPU का उपयोग मोबाइल फोन, पर्सनल कंप्यूटर, वर्कस्टेशन, गेम कंसोल आदि में किया जाता है.

GPU is a important part of Computer Gaming

9. ODD:
Optical Disc Drive या ODD एक disc drive है. ये उपयोग किया जाता है कंप्यूटर से कोई डाटा, इमेज, movie, file बगेरा को DVD डिस्क पर copy करने के लिए. इसे हम जलती भासा में disc write भी कहते है. इसमें एक laser light लगा हुआ रहता है. जो प्रकाश spectrum के भीतर या पास laser light या electromagnetic waves का उपयोग करके optical disc से डेटा read and write करता है.

ODD is important in PC

Read also: History of computer in Hindi

computer memory visuals with text "computer memory hindi me"

computer memory: types, primary and secondary memory, history in Hindi

कंप्यूटर में डाटा (input data) को सम्भाल कर रखना(save) और जरूरत पड़ने पर उसे फिरसे हाज़िर(retrieve) करनेका काम जो करता है उसे Computer Memory कहते है.

Intro: Computer Memory हिंदी: Computer Memory एक सामान्य शब्द है. जो भी डिवाइस कंप्यूटर में डाटा को store करने का काम करता है, उसे हम computer memory कहते है. memory का अर्थ है स्मृति. और computer जैसा हर electronic device में भी ये database को याद रखता है, अपने अंदर स्टोर करके. और जबभी user कोई डाटा को फिरसे पुनर्प्राप्त करना चाहता है, उसे memory से प्राप्त करवाया जाता है. मेमोरी का एक popular name, storage या store भी है.

Computer Memory in Hindi

in image a question asked "what is computer memory in hindi"

दोस्तों, Computer या किसीभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में Memory का मतलब है स्मृति या याददाश्त. जैसा की हम इन्शानो में होता है. एक उदाहरण से समझते है. Input device, जैसा माउस और कीबोर्ड द्वारा प्राप्त निर्देश को कंप्यूटर मेमोरी में स्टोर और सेव किया जाता है. यूजर (यानि के हम और आप) mouse के माध्यम से कोई program को संचालित करके क्लिक करते है. Keyboard से कुछ type करते है, और ये data के रूप में memory में store होता है.

इसके बाद मान लीजिये user ने computer device को बंद कर दिया. फिर कुछ देर बाद वो वापस से device power on करता है और उसी काम को continue करता है. तो वो पहले अपने अधूरा काम को माउस के मदत से फिरसे खोलता है. डाटा पुनर्प्राप्त होता है किउकी वो मेमोरी में store किया हुआ रहता है. बरना data lost हो जाता. इसे ही मेमोरी कहते है और computer memory इसी काम को अंजाम देता है.

कंप्यूटर या अन्य कोईभी electronic device में दो स्टेप्स में data store और retrieve (पुनर्प्राप्त) का काम होता है. इसी आधार पर प्राइमरी और सेकेंडरी इस दो भाग में computer memory को बिभाजित किया गया है. जिसके बारेमे निचे जानेगे.

What are the types of computer memory

This image represents the basic categories of computer memory

कंप्यूटर में मेमोरी का मतलब समझा जाता है प्राथमिक मेमोरी (primary memory) को. पर general category किया जाये तो computer memory को हम दो basic type में बिभाजित करते है. दो तरह का computer memory होता है.

1. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) या माध्यमिक मेमोरी

Primary memory in hindi

RAM and ROM distinguish
  • RAM
  • ROM

प्राथमिक या primary memory वो होता है जो motherboard और cpu के संग्ल्ग्न होता है. और ये मदरबोर्ड में ही संगयुक्त रहता है. जैसा की RAM and ROM. प्राइमरी मेमोरी processor(cpu) के साथ साथ काम करते है. और इससे cpu आसानीसे और तेज़ीसे data read कर पाते है. जो कंप्यूटर को fast work करने में मदत मिलता है. Primary Memory को main memory भी कहते है. किउकी कंप्यूटर का एक मुख्य काम data read इसी के माध्यम से होता है.
Primary memory का दो केटेगरी होता है. Volatile memory और Non-volatile memory. Volatile Memory किसे कहते है? दोस्तों Volatile का मतलब है, जब भी हम device को power off करते है RAM में save हुआ data भी erased हो जाता है. Non volatile में ऐसा नहीं होता है. इसमें power off करने के बाद भी डाटा वही पर रहता है. मगर modern system में primary memory का volatile रूप का ही इस्तेमाल किया जाता है.

what is RAM (random access memory)

RAM का पूरा नाम है random access memory. ये कंप्यूटर का एक primary memory है और इसे main memory कहते है. दरहशल हम जो भी program या application हमारे compute या mobile डिवाइस में खोलते है, वो पहले RAM में ही load होता है. और डिवाइस जरुरत का primary data read करते है इसी से.

हम अक्षर मोबाइल पर multiple application का इस्तेमाल करते है एक साथ. और कंप्यूटर में भी multi tasking करते है. इस सभी को प्राथमिक स्तिथि में RAM का सहारा मिलता है. इस वजय से, अगर system ram ज्यादा हो तो हमारा डिवाइस भी फ़ास्ट चलता है. RAM volatile होने के कारन ये डाटा को temporary store करता है.

Types of RAM

  • DRAM
  • SRAM
  • NVRAM

DRAM: Dynamic RAM को शॉर्ट फॉर्म में DRAM कहते है. आमतौर पर Computer RAM का मतलब DRAM को ही समझा जाता है. किउकी ज्यादातर इस्तेमाल इसका ही होता है. ज्यादातर कंप्यूटर में DRAM ही लगते है, और ये कई दशकोसे चले आ रहे है. DRAM में दो तरह का प्रणाली होता है. Single data rate और double data rate. पुराणी कंप्यूटर में सिंगल डाटा रेट का इस्तेमाल होता था. वही नए ज़माने का कंप्यूटर डबल डाटा रेट का इस्तेमाल करता है.
(Note: जिस गति से डेटा कंप्यूटर के अंदर या फिर एक peripheral devices (जैसे माउस, कीबोर्ड, प्रिंटर) या कोईभी input और output device और कंप्यूटर के बीच data transfer किया जाता है. उसे Data Rate कहते है.)

SRAM: SRAM का पूरा नाम है Static RAM. ये DRAM से आधुनिक और ज्यादा तेज़ है. SRAM ज्यादातर high-end server में इस्तेमाल होता है. ये आकार में काफी बड़ा होता है. और बोहोत ज्यादा expensive भी होता है. साधारण डेली यूज़ का कंप्यूटर में ये इस्तेमाल नहीं होता है. मगर, अगर हो भी तो data cache के लिए ही होता है. जिससे कंप्यूटर speed से काम कर पाता है.
चलिए नीचे देख लेते है DRAM और SRAM में क्या क्या मुख्य अंतर है?

DRAMSRAM
DRAM सस्ता है.SRAM DRAM महंगा है.
ये average speed देता है.ये लगभग तीन गुना faster काम करता है DRAM से.
ये पतला होता है.ये आकार में बड़ा होता है.
DRAM मिलता है Gigabytes(GB) में.SRAM मिलता है Megabytes(MB) में.
DRAM ज्यादा energy का खपत करता है.SRAM काम energy का करता खपत है.

NVRAM: NVRAM का पूरा नाम है non volatile random access memory. जी हाँ दोस्तों ये एक ऐसा कंप्यूटर मेमोरी का form है जो power off करने पर भी अपने अंदर data safely रख सकता है. इस NVRAM के बारेमे ज्यादा चर्चा नहीं होता है. किउकी इसकी अलग form ज्यादा popular हो चूका है. जैसे की flash memory. मगर है तो ये भी non volatile RAM ही. NVRAM का सबसे unique बात ये है, की इसमें battery लगते है. ये CMOS की बैटरी से power लेता है.
NVRAM का उदहारण है Ferroelectric RAM, FeRAM(F-RAM) और Magnetoresistive RAM(MRAM).

दोस्तो RAM का और भी कई प्रकार होता है. जिसे हमने एक दूसरा hindi article में डिटेल्स में बताया है. RAM के बारे मे पूरी जानकारी इस आर्टिकल में पढ़िए “RAM क्या है? कितने प्रकार का होता है? RAM काम कैसे करता है?”

what is ROM (read only memory)

ROM का full form है read only memory. ये भी device का primary memory है मगर इसका काम थोड़ा अलग होता है. सबसे पहलीबाट ये RAM के जैसा volatile नहीं होता है. ये Non volatile है. इसका मतलब डिवाइस off होनेके बाबजूद डाटा इसीमे मौजूद रहता है. मगर इसका डाटा कुछ अलग होता है. ROM में जो data रहता है, वो device manufacture द्वारा डाला हुआ कुछ programming होता है. जो system अच्छी तरह ran करने के लिए आबस्यक होता है. इसीलिए इसमें feed किया हुआ data को erase नहीं किया जा सकता है.

Types of ROM

  • PROM
  • EPROM
  • EEPROM

PROM: PROM का पूरा नाम है Programmable Read-Only Memory. ये ROM का ही एक प्रकार होता है. मगर इससे थोड़ा अलग होता है. किउकी ROM में system manufacturer द्वारा पहले से ही प्रोग्राम को डाला हुआ है. मगर PROM में ऐसा नहीं होता है. इसमें यूजर का जरुरत अनुशार एक programmer द्वारा प्रोग्राम इसमें डाला जाता है. मगर program को इंस्टॉल करने के बाद इसे मिटाना मुश्किल है.

EPROM: इसका पूरा नाम Erasable Programmable Read-Only Memory है. नाम से ही पता चल रहा है इसमें प्रोग्राम डालने के बाद इसे मिटाया भी जा सकता है. और फिरसे reprogram भी जा सकता है. बाकि ये PROM का जैसा ही है. मगर इसके खास बात ये है, की जब भी data erase किया जाता है. इसे ultra violate रोशनी के साथ रख्हा जाता है.

EEPROM: EPROM का ही advanced रूप है Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory (EEPROM). इसकी खास बात है, इसे कंप्यूटर में ही इरेस करके नए प्रोग्राम को इनस्टॉल भी किया जा सकता है. ये एक मात्र ROM है जिसमे read and write features देखने को मिलता है. program को अपडेट करते वक्त इसमें codes को write भी कर सकते है.

Difference between RAM and ROM

RAMROM
Volatile Memory हैNon-Volatile Memory है
Memory Capacity 1 to 256 GB प्रति chip या उससे भी ज्यादाMemory Capacity 4 to 8 MB प्रति chip
Read and Write दोनों कर सकता हैसिर्फ read कर सकता है
ये Temporary स्टोरेज हैये Permanent स्टोरेज है
इसे primary memory कहते हैइसे secondary memory कहते है
ये Fast हैये RAM से slow है
इसकी Type है SRAM and DRAMइसकी Type है PROM, EPROM and EEPROM
RAM को erase किया जा सकता हैROM को erase किया नहीं जा सकता

What is secondary memory in hindi

secondary computer memory
  • Hard disk drives (HDD)
  • Solid-state drives (SSD)
  • Optical drives (CD/DVD)
  • Pen drive, Memory Card (sd card)

सेकेंडरी मेमोरी या secondary memory मूल रूप से एक अलग device होता है. जो मदरबोर्ड के ऊपर mount किया हुआ नहीं रहता है. ये separate storage device होता है. जैसे Hard Disk, SSD, CD, DVD, Memory Card, Pen Drive इत्यादि. इनमे से HDD या hard disk drive और SSD (Solid State Drive) कंप्यूटर केस के अंदर ही बिठाया जाता है. बाकि सब external storage device है. Computer case के अंदर HDD या SDD मेमोरी में प्राइमरी मेमोरी से data transfer होता है. जरूरत पड़ने पर. किउकी ये दोनोही storage device है. डाटा को ट्रांसफर किया जाता है एक विशेष internal process के जरिये, जिसे virtual memory कहते है.

What is Hard disk drive?

Hard disk drive कंप्यूटर की एक secondary memory है. ये computer case के अंदर मदरबोर्ड से अलग बैठता है. ये एक electro-mechanical data storage device है. इसे permanent storage डिवाइस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. ये. data सुरक्षित सेव करके रख्हा जाता है. और जब भी future use के जरुरत परता है, ये मिल जाता है. modern electronic device में नए तौर का HDD भी देखने को मिलता है. जिसे external hard disk है. और ये एक pen drive के जैसा ही computer USB port में लगता है. जिसे आप बाहर से लगा कर इस्तेमाल कर सकते हो.

HDD की विशेषताएं (characteristics)

  1. इसमें heads लगी रहती है, जो घूमती है. इसे mechanical arm कहते है. इसीलिए ये slow भी होती है.
  2. Start up के लिए लंबा समय लगता है.
  3. Disk access times: 9 से 15 milliseconds(MS) का वक़्त लगता है.
  4. Hard disk drive फैन लगी रहती है. किउकी इसमें लगी mechanical heads घूमते वक़्त बोहोत heat produce करता है.
  5. Power Consumption ज्यादा होता है.

what is ssd in computer in hindi?

मॉडर्न स्टोरेज डिवाइस में Solid state drive आते है. ये एक external storage device है जो modern computer में और laptop में लगते है. ये आधुनिक और ज्यादा efficient device है. जो data store करते है तेज़ी से. इसमें integrated circuit लगा हुआ रहता है और flash memory के जरिये files को स्टोर करता है.

SSD की विशेषताएं (characteristics)

  1. SSD बोहोत ही fast होता है. ये HDD से लगभग सौ गुना तेज़ीसे file transfer कर सकती है. किउकी इसमें कोई mechanical arm नहीं रहता है.
  2. ये बहुत हल्की और आकार में भी पतली होती है.
  3. power consumption HDD के मुकाबले बहुत ही काम होता है.
  4. इसमें कोई मैकेनिकल head न होने के कारण ये silent भी होता है.
  5. SSD ज्यादा समय तक चलती है. इसकी durability HDD से ज्यादा होता है.

CD/DVD in hindi

Modern एक्सटर्नल स्टोरेज डिवाइस में से DVD popular storage device है. ये secondary storage में आते है. इसका पूरा नाम Digital Versatile Disc or Digital Video Disc है. ये एक digital optical disc होता है. जो rapidly rotate करते हुए डाटा को सेव करते है. जिसे disc write कहते है. इसके लिए optical DVD writer का इस्तेमाल किया जाता है.
CD भी इसी तरह का disc होता है. जिसका पूरा नाम Compact Disc है. ये DVD से कम storage capacity बाला होता है. मगर काम उसी तरह करता है.

CD/DVD की विशेषताएं (characteristics)

  1. Compact Discs (CDs) और Digital Versatile Discs (DVDs) इलेक्ट्रो ओप्टिकल डिवाइस है.
  2. इनमे कोई magnetic field नहीं होता।
  3. Hard disk के जैसा CD/Dvd चुम्बकीय छमता से छतिग्रस्त नहीं होता।
  4. read and write प्रक्रिया में इसमे power consumption ज्यादा होता है.
  5. CD और DVd को laser तकनीक से इस्तेमाल किया जाता है. DVd writer में laser लगा हुआ रहता है.
  6. दोनों में से ज्यादा storage DVd में मिलता है. और दोनों में ही Rewrit का ऑप्शन रहता है.

what is pen drive in hindi

Pen Drive भी एक सेकेंडरी डिवाइस है, जो external storage device है. Pen के जैसा ढक्कन लगा हुआ ये डिवाइस मिलता है. आज कल दूसरे तरह का भी पेन ड्राइव मार्किट में उपलब्ध है. ये एक USB Flash drive होता है. जिसमे flash memory का इस्तेमाल किया जाता है डाटा स्टोर करने के लिए. ये एक portable storage device है. Flash drive के बारेमे हमने निचे बताया है.

Pen Drive की विशेषताएं (characteristics)

  1. Storing और data transferring करने का एक सहज, आसान और भरोसेमंद storage device है.
  2. आकार में small size और पेन के जैसा देखने में.
  3. USb port में ही connect हो जाता है, ये plug and play डिवाइस।
  4. high capacity storage का सुबिधा. जो modern pendrive में 1Tb(Tera Byte) से 2Tb का space मिल सकता है. जो Large file को स्टोर और ट्रांसफर कर सकता है.
  5. ये एक Flash Drive है.
  6. Data transfer rate: USB version 2.0 में 35 Mbps तक स्पीड दे सकता है. USB version 3.0 में 625 Mbps तक स्पीड देता है.
  7. ये सस्ता भी होता है.

sd card

इसका पूरा नाम Secure Digital है. जिसे short-form में SD Card कहा जाता है. ये सेकण्डरी स्टोरेज है, जो बोहोत ही छोटा आकर का होता है. ये mobile, tablet, computer में इस्तेमाल किया जाता है. ये भी flash memory का इस्तेमाल करता है. SD कार्ड का बोहोत सारे variation मौजूद है. उनमे से एक है micro SD card. आज कल बोहोत high capacity बाले कार्ड्स भी उपलब्ध होते है.

SD card की विशेषताएं (characteristics)

  1. ये सेकेंडरी मेमोरी है और इसलिए इसमें non-volatile memory है.
  2. SD कार्ड में स्टोरेज capacity range 128 MB to 2GB.
  3. cards का default format होता है FAT16.
  4. इस memory में बिभिन्य तरह का variation देखने को मिलता है. normal SD card, SDHC card, or SDXC card.
  5. SDHC का पूरा नाम है SD High Capacity.
  6. SDHC cards capacities होता है 4GB से 32GB तक. और default format FAT32 है.
  7. SDXC का पूरा नाम है SD Extended Capacity.
  8. इसकी 64GB to 2TB तक storage capacity होता है. और default format exFAT होता है.
  9. SD cards की और दो वैरिएंट्स है Mini SD card और Micro SD Card.
  10. SD कार्ड durable होता है. और लम्बे समय तक चलता है. अगर अच्छे से रख्हा.
  11. इन Secure digital Cards(SD Cards) की एक विशेष फीचर ये है, की इसमें रख्हा images format के बाद भी recover किया जा सकता है. इसके लिए card recovery softwares का इस्तेमाल किया जाता है. formatting भी अगर इन सॉफ्टवेयर के द्वारा किया जाये तो फिर full format होता है.

ऊपर बताया गया basic computer memory का दो types प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी. आपने प्राइमरी और सेकेंडरी मेमोरी का कुछ example भी देख चुके है. मगर इसके अलावा और भी कई प्रकार का कंप्यूटर मेमोरी मौजूद है. जैसे cache memory, flash memory. चलिए अब जानते इनके बारेमे. उससे पहले, आपका टेक्निकल ब्लॉग subhra som आपको कैसा लग रहा है, कमेंट में जरूर बताएं. इस हिंदी ब्लॉग में क्या क्या टॉपिक आपको चाहिए ये भी बता सकते है. चलिए आगे बढ़ते है.

Cache computer memory

दोस्तों Cache Memory एक छोटा सा memory device है जो processor core के आसपास ही नज़र आते है. ये एक बिशेस काम में मदत करता है. ये data copy करके अपने अंदर सेव करके रखता है, जो बार बार user द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए ये main memory locations को नज़र रखता है. और ये पता लगता है main memory का कौनसा लोकेशन repeatedly use किया जा रहे है. और जो डाटा अधिकबार इस्तेमाल किये जाते है, cache memory उसका एक कॉपी बना लेता है. इससे फ़ायदा ये होता है, की यूजर को fast response मिलता है.

Cache Memory प्राथमिक और सेकेंडरी दोनों रूप से इस्तेमाल होता है. अगर primary memory के रूप में ये इस्तेमाल हो तो, cache को सीधा processor के ऊपर या आसपास ही integrate किया जाता है.

Flash Memory definition

Flash Memory को flash storage भी कहा जाता है. ये एक non volatile memory chip होता है. जिसका इस्तेमाल USB flash drive मतलब pen drive में किया जाता है. pen drive का केस के अंदर ये एक electronic solid-state chip नज़र आते है. इसका काम भी data transfer करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अक्षर एक computer से अन्य कंप्यूटर में डाटा को हम pen drive जैसा flash memory storage के माध्यम से ही करते है. इस chip को electronically erase और reprogram भी किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल MP 3 players, digital cameras और SSD Cards (solid-state drive cards) में भी किया जाता है.

Difference Between Flash Memory and Cache Memory

FlashCache
Non volatileVolatile
Flash memory is slow then cacheCache memory is faster
Flash memory type: Secondary memoryCache memory type: primary or secondary cache memory
Location: Outside CPULocation: CPU chip or Motherboard
two types of flash memory: NOR and NANDtwo types of Cache memory: L1 Cache and L2 Cache

3D XPoint Drive

थ्री डी क्रॉस पॉइंट नाम से जाना जाता है 3D XPoint ड्राइव एक non volatile memory है. इसे July 2015 में Intel and Micron Technology साथमे मिलकर बनाया. Optane और QuantX नाम से बाजार में मिलने बाले ये storage device प्रीमेरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी का बिच का characteristic बाला है. ये secondary memory से कई ज्यादा fast है. मगर DRAM से slow है. वही कीमत में ये RAM से सस्ता भी है. मगर सेकेंडरी मेमोरी से कुछ महंगा है.

3D XPoint को लगाने का सबसे अच्छी बात ये है की non volatile होने के कारन, RAM के जैसा power off करने पर data lost नहीं होता है. मगर इसे आमतौर पर hosting server पर ही इस्तेमाल किया जाता है. साधारण daily use computer में को नहीं मिलता है.

First Computer Memory

Freddie Williams and Tom Kilburn ने पहला “random-access digital storage device” को बनाया. जिसे Williams tube या the Williams–Kilburn tube नाम से जाना जाता था. इसमें कई सारे tubes लगे रहते थे. जिसमे एक tube 1024 से 2560 bits of data को स्टोर करने का छमता था.
इसे British patents के लिए उन्होंने 11 December 1946 और 2 October 1947 को अप्लाई किये. और United States patent के लिए 10 December 1947 और 16 May 1949 को अप्लाई किये.

Who invented computer memory

Robert Heath Dennard
सन् 1967, सितंबर का महीने में, अमेरिकी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और आविष्कारक रॉबर्ट हीथ डेनार्ड ने सिंगल ट्रांजिस्टर बाले dynamic random access memory या DRAM का अबिष्कार किये. इसे सबसे प्रख्यात और आधुनिक कंप्यूटर मेमोरी माना जाता है.

History in hindi

  • सबसे पहला memory storage का इस्तेमाल हुआ था punch card के रूप में. जिसे computer में program डालने और उसे store करने के लिए बनाया गया था. इसे 1837 में Charles Babbage ने Analytical engine में इस्तेमाल किये थे. जो कप्यूटर का आदि रूप था.
  • पहला drum memory को बनाया गया 1932 में. इसे बनाने बाले थे Austrian developer “Gustav Tauschek” ने.
  • Atanasoff-Berry Computer का नाम बोहोतो ने सुना होगा. हमने subhra som में इसके बताया है what is RAM इस आर्टिकल में. खैर, Atanasoff computer में पहलीबार regenerative capacitor drum memory का इस्तेमाल हुआ.
  • इसके बाद आया Williams tube नाम का कंप्यूटर मेमोरी आया 1947 में। जो असल में CRT (cathode-ray tube) था.
  • UNIVAC 1101 या ERA 1101 वो पहला कंप्यूटर था जिसमे working memory देखा गया. जो मेमोरी से प्रोग्राम चलने में सक्षम था. फिर 1951 में पहला RAM का पेटेंट किया गया, और इसे करने बाले थे अमेरिकी कंप्यूटर बैज्ञानिक Jay Forrester.
  • Z22 नाम का कंप्यूटर में पहलीबार magnetic storage memory का इस्तेमाल हुआ.
  • one-transistor DRAM cell के लिए 4th June, 1968 में Dr. Robert Dennard को पेटेंट मिला।
  • 1969 में Intel द्वारा बाजार में लाया गया पहला 1024-bit ROM और 64-bit SRAM.
  • 1978 में पहला EEPROM develop किया गया. जिसका नाम था Intel 2816. और इसे बनाये थे Intel के साथ George Perlegos ने.
  • 1996 से सुरु हुआ DDR SDRAM और September 2014 से DDR4 SDRAM का बिक्री. source:computerhope.com

Conclusion – निष्कर्ष

हमारे नए धरा के जीवन शैली में कंप्यूटर का महत्व पूर्ण साधन है. और computer memory कंप्यूटर में इस्तेमाल किये जाने बाले एक बिशेष computer part है. आज हमने जाना computer memory किसे कहते है. और इसकी types के बारेमे जाना. हमने ये भी जाना primary और secondary memory किसे कहते है. हर popular memory का नाम और उसका इस्तेमाल characteristic हमने बताया.

हमने Hindi में history of computer memory भी उपलब्ध करवाया. भबिस्य में भी हम subhra som के द्वारा आपको quality article आपके भासा हिंदी में लाते रहेंगे. आपको इस आर्टिकल में दिए गए जानकारिया valuable लगा तो Facebook, twitter, WhatsApp में दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है. भबिस्य में भी आपका hindi blog subhrasom के साथ बने रहिये. अपने अपना समय दिया, इसके लिए आपको तहे दिलसे द्य्न्यवाद। जाते जाते एक comment जरूर करें. Thank You All!!!

image of computer RAM and text written what is ram in hindi in blue color

RAM क्या है? काम कैसे करता है? RAM को हिंदी में क्या कहते है?

RAM कंप्यूटर का अस्थायी(temporary) memory होता है. जिसे काम करते वक़्त, कंप्यूटर data save करने के लिए इस्तेमाल करते है..

Introduction of RAM(Hindi): RAM जिसका पूरा नाम है Random-access memory, कंप्यूटर का एक memory form है. ये ROM से अलग है. इसे भी storage की तरह इस्तेमाल किया जाता है. मगर ये temporary storage के जैसा काम करता है. computer में जब कोई data हम process करते है, तब उस वक़्त RAM में वो डाटा सेव होते है. इसके कारन इसे working memory कहते है.

RAM के बारे में विस्तार से जानने से पहले, जान लेते है computer memory कितने प्रकार का होता है. दोस्तों computer या Mobile device में जो मेमोरी इस्तेमाल होता है उसे दो भाग में बिभाजित किया जाता है. Primary Memory और Secondary Memory. और RAM इसी primary memory में आते है.

RAMROM
2 Types of Computer’s Primary Memory: RAM and ROM

Computer, Tablet, Mobile जैसा डिवाइस में प्राइमरी मेमोरी भी दो भाग में बंटा हुआ है. जिसका नाम है RAM and ROM. आज हम RAM के बारे में ही बात करेंगे. सेकण्डरी मेमोरी में आते है Hard Disk, Floppy Disk, CD, Pen-drive इत्यादि. तो चलिए जानते है RAM in Hindi इस हिंदी ब्लॉग में. जिसका नाम है subhra som.

RAM क्या है? (What is RAM in Hindi)

RAM Hindi me

दोस्तों हम आज के समय में computer का इस्तेमाल अक्सर करते है. हमारे घरों में एक Desk Top Computer जरूर होता है. अगर कभी कंप्यूटर ठीक से काम ना किया, या सफाई करते वक़्त हम CPU को जरूर खोलते है. उसके अंदर लम्बा हरा रंग का एक या दो RAM नज़र आते है. PC Upgrade करते समय भी हम RAM को change करते है. ताकि हमारा System और Fast हो जाएँ. इसी RAM के बारे में जरुरी जानकारी आज जानेगे.

RAM असलमे motherboard का एक मुख्य component के तौर पर जानी जाती है. ये computer processing speed के लिए जिम्मेदार है. मतलब तेज़ी से काम करने के लिए RAM का Use किया जाता है. ये एक computer device है जो कंप्यूटर को allow करते है Input Data को read and write करने के लिए. जिससे processor समझते है क्या प्रोसेसिंग करना है. और उसके हिसाब से user को result देता है.

Random Access Memory इसका पूरा नाम है. नाम में ही RAM का काम को दर्शाता है. किउकी ये कंप्यूटर का working memory है, वर्क करते समय डाटा RAM में सेव होते रहता है और erased भी होते रहता है. RAM को Direct access memory भी कहते है. किउकी ये temporary save हुआ डाटा है. और इसे hard drive में सेव नहीं किया गया. और data का हर byte RAM से direct access किया जा सकता है. इसके लिए complicated path का जरुरत नहीं होता है. किउकी सबसे पहले data RAM में सेव होता है, इसीलिए इसे primary storage भी कहते है.

RAM किसने बनाया? (Who Invented RAM)

सं 1967 में पहलीबार RAM का अबिष्कार किये Robert Heath Dennard ने. वो एक American electrical engineer और Inventor है. वो बनाये थे dynamic random access memory या DRAM को. जिसके लिए वो transistor का इस्तेमाल किये थे.

RAM को हिंदी में क्या कहते है?(RAM in Hindi)

किउकी रैम, कंप्यूटर का primary मेमोरी है. इसीलिए hindi में हम रैम को कंप्यूटर प्राथमिक ममोरी कह सकते है. वैसे रैम का official Hindi name तो कुछ नहीं है. पर काम का ऊपर base करके ये नाम से हम इसे समझ सकते है.

RAM काम कैसे करता है? (How does RAM work)

RAM work steps

Random-access memory या RAM काम करते है कुछ साधारण steps में. जबभी यूजर computer में कुछ click करता है. वो सबसे पहले RAM में load होता है. इसका मतलब अगर आप कोई movie play करने के लिए destination folder में जाकर movie का फाइल में क्लिक किये. झट से RAM उस file को अपने अंदर ले लेता है.

इसके बाद display screen में RAM आपका movie को दर्शाता है. फिर अगर आप movie को forward या backward करते हो तो वो RAM से आगे पीछे होता है. किउकी पहले ही RAM data को store कर चुके है.

वैसा ही अगर आप कोई software को click किये है, तो सबसे पहले program file जो computer drive में store है. वह से RAM में data load होता है. फिर जो भी command आप देते हो, उसके हिसाब से RAM data supply करते रहता है. और processor उसे प्रोसेस करते रहता है. ऐसे आपका काम होता है. RAM इसलिए main memory नाम से भी जानी जाती है.

Basic RAM कितने प्रकार का होता है? (types of basic RAM)

दोस्तों तीन प्रकार का RAM देखा जाता है. SRAM, DRAM और MRAM. मगर रैम का दो प्रकार ही बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. Static RAM (SRAM) और Dynamic RAM (DRAM). निचे हम एक एक करके सारे RAMs का डिटेल्स जानेगे.

  • SRAM
  • DRAM
  • MRAM

SRAM

Static Random Access Memory या SRAM कोई भी डाटा को instant load कर सकता है. CPU यहाँ से Data को direct access करता है. और इस काम के लिए ये six-transistor memory cell का इस्तेमाल करता है. जिसे MOSFETs कहते है. ये SRAM बोहोत ही fast data load करने में सक्छम है. और इसकी फ़ास्ट काम करने के कारन ये DRAM से expensive भी है.

इसे चलने के लिए बहुत ही कम power की जरूरत परता है. ये SRAM कंप्यूटर का Cache memory बनाने में मुख्य भूमिका निभाती है. 1990 दशक से आज भी ये इस्तेमाल होते जा रहे है. ज्यादातर LCD Screen, Router, Digital Camera में इस्तेमाल किया जाता है.

SRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • DRAM से SRAM तेज है.
  • ये Long term चलती है.
  • ये DRAMs की तुलना में कई गुना अधिक महंगा है.
  • इसे ज्यादातर Cache Memory के लिए use होता है.
  • ये DRAMs की तुलना ज्यादा space लेता है.
  • इसे बार बार refresh नहीं होना परता है, DRAM के जैसा.
  • SRAM module का Electricity Consumption कम है.
  • इसकी 1 Cycle का समय DRAM से कम लगता है. किउकी access के बिच में इसे pause होने की जरुरत नहीं पड़ता. इसलिए ये fast काम करता है.
  • SRAM volatile है, मगर system power on रहते वक़्त ये खुदको बिना recharge किये ही data value बरकरार रखता है.

DRAM

Dynamic Random Access Memory या DRAM थोड़ा slow है SRAM के मुकाबले. ये काफी पुराना system है. ये पाया जाता था 1970 से 1990 के मध्य भाग में. और ये transistor and capacitor का इस्तमाल करता है मेमोरी स्टोर करने के लिए. जो साथ में मिलकर DRAM cell का निर्माण करता है.

इसे चलने के लिए electric power की जरुरत परता है. ये खुदको समय समय पर refresh करते रहता है. ताकि charge बनी रहे. बार बार रिफ्रेश करने के कारण इसकी काम करने के छमता slow हो जाती है. ज्यादा तर पुराने home PC में DRAM ही इस्तेमाल होता था. ये मुख्य तौर पर networking hardware, video games, PC में इस्तेमाल किये जाते थे. अभी DDR RAM का इस्तेमाल होता है. जिसके बारे में नीचे बताया गया है.

DRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • SRAM से DRAM काफी slow है.
  • ये short term चलती है.
  • SRAM से सस्ता है.
  • इसे बार बार refresh होने की जरुरत पड़ता है.
  • ये space कम लेता है.
  • DRAM का Electricity consumption ज्यादा है, किउकी इसे refresh होने के लिए every milliseconds ज्यादा power की जरुरत पड़ता है.
  • इसे data access के बिच में विराम चाहिए, इसलिए ये slow हो जाता है.
  • DRAM volatile है. PC power off करते ही ये shut down हो जाता है. और power on रहते वक़्त भी इसे बारबार खुदको recharge होना पड़ता है data value बरकरार रखने के लिए.

MRAM

Magnetoresistive Random Access Memory या MRAM के नाम से ही पता चल रहा है, की इसमें चुम्बकीय शक्ति का इस्तेमाल होता है. जी हाँ ये data save करता है magnetic power से. ये आधुनिक technology का कमाल है. ये अन्य RAMs के तुलना में काफी कम power consume करता है. small devices जैसे mobile, tablet के लिए ये आदर्श है. इसमें बेहतर storage भी मौजूद है. और ये फ़ास्ट भी है. ये nonvolatile है.

MRAM विशेषताएँ (characteristics)

  • ये high speed operation में सक्षम है.
  • MRAM की long टाइम तक चलती है.
  • ये inexpensive भी है.
  • ये आकार में SRAM छोटा भी है.
  • MRAM काफी lower power consumption करती है.
  • ये electric charge की जगह पे magnetic storage elements के रूप में स्टोर होती है.
  • ये non-volatile है.

Modern RAM का प्रकार (types of Modern RAM)

रैम तो बहुत सारे किस्म का है. मगर आज का कंप्यूटर (today’s computer) में निचे बताई गयी रैम को ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. उनमे से कुछ basic ram है जो हमने ऊपर ही बता चुके है.

  • SRAM (Static RAM)
  • DRAM (Dynamic RAM)
  • SDRAM (Synchronous Dynamic RAM)
  • SDR SDRAM (Single Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • DDR SDRAM, DDR2, DDR3, DDR4 (Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • GDDR SDRAM, GDDR2, GDDR3, GDDR4, GDDR5 (Graphics Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM)
  • Flash Memory

SDRAM क्या है? (What is SDRAM in Hindi)

Synchronous dynamic random access memory या SDRAM जो DRAM का परिवर्तित रूप है. ये रैम Simple DRAM से बोहोत ज्यादा fast और advanced है. ये system clock के साथ खुदको सिंक्रनाइज़ करता है. इसका मतलब दोनों एक ही समय पर processing हो सकता है. ये CPU clock के साथ sync होता है.

SDRAM यूजर का input देने के बाद respond करता है. Synchronize होने के कारण CPU parallel data को साथ में operate कर सकता है. SDRAM में ये खूबी है. इसका मतलब हुआ अगर यूजर ने कोई input दिया, मगर पहला इनपुट अभी तक processing हो रहा है. फिरभी ये नया input को भी साथ में ही process करेंगे. जिसे pipe-lining कहते है.

SDR SDRAM क्या है? (What is SDR SDRAM in Hindi)

‘Single Data Rate Synchronous Dynamic Random Access Memory’ या SDR SDRAM भी डायनामिक मेमोरी का एक variation है. ये एक clock cycle में single data process कर सकता है. असलमे ये SDRAM का ही बर्धित नाम है. ये दोनों ही एक ही है. सं 1993 में बाजार में आये और अभी भी मौजूद है. इसे मुख्य तौर पर Computer और Video Gaming console के लिए बनाया गया था.

DDR SDRAM क्या है? (What is DDR SDRAM in Hindi)

इसका पूरा नाम Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM है. इसमें और SDR में मुख्य अंतर ये है, इसमें Double Data परती क्लॉक साइकिल प्रोसेस होता है. गति में ये SDR से दुगना है. किउकी डबल डाटा प्रोसेसिंग करने का छमता इसमें है. सं 2000 में ये मार्किट में आयी और आज भी मौजूद है. और इसे Computer Memory के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. निचे DDR की और variation को देख लेते है.

DDR2 क्या है?

DDR SDRAM का उन्नत रूप है DDR2 . ये इसकी short नाम है. इसका पूरा नाम DDR2 SDRAM है. किउकी ये इन्ही के बिरादरी का है. double data rate को upgrade किया गया है DDR2 में. इसमें भी दो read और दो write होता है प्रति clock cycle में. मगर इसका clock speed को बढ़ाया गया है. इसके लिए ये और भी गतिशील हो चूका है अपने पुराने version DDR1 के मुक़ाबले. इसकी speed 533 MHz है. जहा पुराणी DDR1 में 200 MHz में ही सिमित था. इसकी power consumption भी कम है DDR(DDR1) के तुलना में. जो 1.8 V है. इसमें 240 pins का संरचना किया गया. जो की DDR से बोहोत ज्यादा है. इसके लिए ये ज्यादा capable हुआ.

DDR3 क्या है?

Up gradation के साथ DDR RAM का और उन्नत रूप है DDR3. ये सं 2007 में बाजार में आयी. जिसका processing power और बेहतर के साथ ये speed up हो गया. इसकी electricity consumption और कम हुयी. जो 1.5 V है. साथ में ये और भरोसेमंद हुआ पहले के मुक़ाबले. इसमें pins की संख्या 240 ही है.

DDR4 क्या है?

आज ज्यादा इस्तेमाल होने वाले RAM है DDR4. ये बाजार में आयी सं 2014 में. इस advanced RAM में बेहतर signal processing के साथ 1600 Mhz का क्लॉक स्पीड दिया गया है. इसमें memory capacity ज्यादा है. ये SDRAM का सबसे improved रूप है. reliability में भी ये अन्य से ज्यादा शक्तिशाली है. इसमें pins के संख्या 288 है.

DDR5 क्या है?

14 July 2020 को release किया गया नवीनतम RAM को, electronic device के मार्किट में. इसका ऑफिसियल नाम है Double Data Rate 5 Synchronous Dynamic Random-Access Memory. इसमें मुख्य विशेषताएं है बिजली की खपत कम करना और doubling bandwidth.

इसे Rambus द्वारा बनाया गया. जो एक अमेरिकी technology कंपनी है. इसकी memory voltage to 1.1 V है. जो power consumption को कम करती है. ये बोहोत ही फ़ास्ट ram है. इसमें on-board voltage regulators का इस्तेमाल किया गया इसकी अधिकतम गति को प्राप्त करने के लिए. DDR 5 में 288 pin है और ये 51.2 GB/s per module स्पिड को ये सपोर्ट करता है.

Memory cell क्या है? (What is Memory Cell Hindi)

कंप्यूटर में RAM का Memory Cell होता है. जो असल मे building blocks है. ये वो electronic circuit है, जो बाइनरी जानकारी 0 and 1 को संग्रहीत करता है. ये काम करता है set reset process से. ये प्रक्रिया चलता है, जबतक value में set के चैत्र में 1 और reset के चैत्र में 0 न आ जाये. dynamic RAM memory में सेल बनता है एक transistor और एक capacitor से. और static RAM memory में cell बनता है लगभग five transistors की मदत से.

VRAM क्या है? (what is VRAM in hindi)

Video Random Access Memory इसका पूरा नाम. नाम से ही पता चल रहा है ये graphic data के लिए होता है. VRAM के द्वारा हम हमारे कंप्यूटर का graphic power को बढ़ाते है. ये image data को store करने का काम करता है. ये CPU और video card के बिच में लगी हुयी buffer है.

RAM की clock Speed किसे कहते है?

मूल तौर पर RAM में Clock Speed की मतलब RAM की Speed को समझा जाता है. मतलब कितनी fast RAM की data save करने की छमता है, उसकी measurement. एक सेकंड में RAM कितनी बार मेमोरी को एक्सेस कर पता है. इसे ही clock speed कहते है. ये मापा जाता है megahertz (MHz) में.

RAM की clock cycle क्या है?

क्लॉक स्पीड के बाद clock cycle आती है. घड़ी की एक पूर्ण चक्कर लगाने को क्लॉक साइकिल कहते है. उसी तरह प्रति सेकंड में कितनी बार RAM पूर्ण चक्कर पूरा करता है. उसे Clock Cycle of RAM कहते है. उद्धरण के तौर पर, अगर RAM का clock speed है 3200 MHz. फिर इसकी clock cycle होगी 3.2 billion प्रति सेकंड. इसका मतलब ये हुआ, अगर RAM cycle प्रति सेकंड में ज्यादा होगी, तो ये ज्यादा तेज़ी से डाटा स्टोर कर पायेगी. और system भी फ़ास्ट और स्मूथ चलेगी. सूत्र: wepc.com

RAM Form Factor क्या है?

दोस्तों फॉर्म फैक्टर क्या होता है? हमने motherboard का form factor के बारेमे यहाँ बताया है. इसे पढ़ेंगे तो आपको form factor क्या है उसकी आईडिया जरूर हो जाएगी. मगर Ram form factor के बारेमे थोड़ा सा जानना जरुरी है.

दो तरह का कॉमन फॉर्म फैक्टर रैम में भी देखा जाता है. एक है DeskTop PC के लिए और दूसरा है Laptop के लिए. DIMM (Dual In-Line Memory Module) form factor है PC के लिए होता है. SO-DIMM (Small Outline DIMM) रहता है Laptop में. आप मदरबोर्ड फॉर्म फैक्टर जरूर पढ़ लें. दोनों का काम एक ही है. मगर ये अलग है इनकी size और शेप में. DIMM और SODIMM slots एक दूसरे से अलग होता है.

How Much RAM Do You Need?

दोस्तों आपका कंप्यूटर का configuration मुताबिक आपको कितने Gb का RAM लेना चाहिए? साधारण परिस्तिथि में कितना रैम पर्याप्त होता है? ये सब जानते है. उससे पहले आप ये धियान जरूर रखे, computer RAM और Laptop RAM दोनों अलग होता है. दोनोको आप अदलाबदली नहीं कर सकते.

साधारण PC या Laptop में 4 GB RAM पर्याप्त होता है. मगर अगर आपका सिस्टम में आप light gaming करना चाहते हो, तो 8 GB का रैम का जरुरत होता है. मगर extreme gaming के लिए 16 GB या उससे ज्यादा रैम आपको बेहतर performance देंगे.

रैम का जरूरत कई चीजों के ऊपर base करता है. जैसे की आपका Operating System का Version, software कोनसा चलेगा, motherboard कौनसा है इत्यादि इत्यादि. motherboard का slot जिसमे आप रैम को बिठाओगे. उसे भी देखना जरुरी है. जिसे DIMM slots कहते है. मगर normal तौर पर ज्यादातर रैम compatible होता है slots के साथ.

RAM की इतिहास हिंदी में (History of RAM in Hindi)

दुनिया का सबसे पहला RAM बनाया गया 1947 में. जिसका नाम था Williams Tube . इसे बनाये थे Freddie Williams और उनके नाम के ऊपर ही इस memory का नाम विलियम tube. ये पहले के ज़माने का कम्प्यूटर्स में बतौर digital storage इस्तेमाल किया जाता था. इसको बनाने में Tom Killburn भी Freddie के साथ थे. इसमें मूल तौर पर एक cathode ray tube लगा रहता था. पर इसकी storage capacity काफी कम था. सिर्फ सौ से हज़ार bits ही इसका कैपेसिटी था. इससे पहले data store करने के लिए vacuum tube का इस्तेमाल होता था. जो बोहोत ज्यादा बड़ा और स्लो भी होते थे. मगर williams tube आकार में छोटा और speed में fast था.

Magnetic-core memory

सन 1955 से 1975 के बीच में Magnetic-core memory का इस्तेमाल होता था रैम के रूप में. इसे बनाया गया था 1947 में और develop किया गया था सत्तर के दशक का मध्य भाग तक. इसमें magnetized rings लगा हुआ होता था. और इसमें हर रिंग में 1 bit data store हुआ करता था. 1968 में Robert Dennard ने invent किये पहला Dynamic Random Access मेमोरी (DRAM). फिर Intel ने बनाया 1 Kb का RAM Chip सं 1969 में.

First IC RAM

इसके बाद 1970 के सुरुवात में integrated circuits का दौर सुरु हुआ. IC असल में silicon surface के ऊपर electronic circuits का कुछ सेट बैठा हुआ रहता है. MOS Dynamic रैम का अबिष्कार हुआ इसी साल. एक साल बाद ROM को बाजार में लाया गया. ये था erasable and programmable मेमोरी. जो RAM से अलग है. सं 1971 में इंटेल द्वारा digital multichip computer memory को लाया गया.

First 1 MB RAM

सन् 1983 में Apple द्वारा पहला 1 Mb RAM को लाया गया. जो तहलका मचाने बाला था. 1 Mega Bite से सफर 1 Tera Bite तक पोछा लगभग चौबीस सालों में. 2007 को 1 Tb बाला External Hard Drive को बाजार में लाया गया. ये रैम तो नहीं है. पर storage का माध्यम तो है. इस बिच में कई आबिष्कार हुए. कुछ कुछ successful रहा और कुछ नहीं चले. पर धीरे धीरे technology के छेत्र में बढ़ते बढ़ते आज हम DDR3L और DDR4 memory तक पोहोच चुके है.

motherboard vector image with yellow background and text written "motherboard in hindi (details) in red color.

Motherboard: क्या है? कैसे काम करता है? Details in Hindi

Motherboard एक printed सर्किट बोर्ड होता है. जिसमें connectors/dedicated ports की मदत से computer या अन्य डिवाइस के प्रमुख उपकरण जुड़े रहते है..

परिचय – Motherboard in Hindi: Motherboard मूल तोर पर एक plate के ऊपर circuit draw किया हुआ एक आधार है. इसे जरुरत अनुशार system के लिए circuit के मुताबिक components को जोड़ने के लिए इस्तेमाल करते है. ये computer (या other expandable device) का मुख्य बोर्ड है, इसलिए इसे main printed circuit board या PCB कहते है. ये Layers of fiberglass(शीसे रेशा) और Copper(तांबा) से बनाई जाती है. फाइबर ग्लास Insulation के लिए और तांबा से सर्किट का रास्ता बनता है.

Motherboard क्या है? (What is Motherboard – Hindi)

motherboard in hindi

Computer motherboard का definition के बात करें तो, ये कंप्यूटर में लगी वो platform है जहा सारे Units वापस में जुड़ते है. इस पतली सी प्लेट में प्रिंट किया हुआ सर्किट के जरिये electronic components एक दूसरे के बीच में communication कर पाते है. जैसे Hard disk, Mouse & keyboard, USB, Parallel port, CPU Chip, RAM slots, PCI slot इत्यादि.

कोनसी unit में क्या data किस components के जरिये input और output करेंगे ये motherboard की circuit के जरिये डिवाइस को बताया जाता है. मदरबोर्ड ये भी सुनिश्चित करता है की हर यूनिट में power supply ठीक तरह हो पाए. ये बनते है fiberglass और copper से. ये है मदरबोर्ड की परिभाषा(definition).

Two main functions of the motherboard
Power Supply: Properly supply electrical power to the individual components
Provide Route: Give a route to allow the components to communicate with each other

उदाहरण के लिए: ये mother board कुछ हमारे घर का बिद्युत का mainboard के जैसा काम करता है. कौनसा कोने मे क्या चल रहा है, एहि से plan करते है. वैसा ही कोई device में कोनसा circuit क्या काम करेंगे वो motherboard में ही printed रहता है. इसलिए इसे planar board भी कहते है. इसके अलावा भी बोहोत सारे नाम है. जैसा की – main circuit board, system board, baseboard, logic board, mobo.

Motherboard को किसने बनाया?(Inventor of Motherboard)

First Motherboard का निर्माण में किसी एक बेक्ति का तो नाम नहीं है. पर इसे IBM कंपनी ने personal computer के लिए बनाया. जिसे Planar कहा जाता था. इसके बाद पहला AT motherboard को IBM ने August 1984 में प्रस्तुत किया. AT का डिटेल्स नीचे बताया गया है.

Motherboard का प्रकार (How many types of Motherboard)

4 types of Motherboard: मूल तौर पर चार तरह का motherboard पाया जाता है. जैसे की XT, AT, Baby AT and ATX.

XT Motherboard

eXtended Technology से बनाये जाने के कारण इन्हें XT motherboard कहते है. ये पहले के ज़माने का model motherboard है. जिनमे Low Insertion Force (LIF) sockets रहता था. इसमें पुराने processor लगते थे. इनमे कोई port नहीं होते थे. 12 पिन वाले कनेक्टर की मदत से power supply किया जाता था. इनमे RAM slot में Dual In-Line Memory Module लगते थे. इसके साथ एक Industry Standards Architecture (ISA) स्लॉट दिखी जाती थी. extra cards लगाने के लिए.

AT Motherboards

Advanced Technology(AT) मदरबोर्ड थोड़ा आधुनिक थे. इनमे 20 पिन बाले power connector का इस्तेमाल होता था. इसके साथ PGA (Pin Grid Array) Socket, SD Ram slots, ISA slots भी रहते थे. इसे IBm ने बनाया था. और बादमे Baby AT द्वारा अधिक्रमण किया गया था. Baby AT के बारे में निचे बताया गया है. AT का एक्साम्पल 386, 486 motherboard.

Baby AT

इसके बाद XT और AT motherboard का मिलाजुला रूप आया Baby AT नाम का मदरबोर्ड. इनमें पहली बार DDR Ram slots दिया गया. इसमें दो तरह का processor sockets रहता था. slot type सॉकेट्स और PGA sockets. इसके अलावा SD Ram slots, PCI slots, ISA slots भी थे. इसमें 12 Pin power connector, 20 Pin power connector और Ports ये तीनो सुबिधा मौजूद था. Pentium-III और Pentium-IV इस तरह का मदरबोर्ड है.

ATX Motherboard

Advanced Technology eXtended या ATX motherboard आज हम इस्तेमाल करते है. ये latest motherboard है. इसे ATX form factor से डिज़ाइन किया जाता है. (form factor का बारेमे निचे बताया गया है.) ATX में 20 pins और 24 pins का कनेक्टर और port रहता है. साथ में MPGA Processor Sockets, DDR Ram slots, PCI slots, AGP slots, SATA connectors जैसा मुख्य features भी रहते है. Pentium-IV, Dual-Core, Core 2 Duo, Quad Core, i3, i5, i7 आदि इसके उधारण.

Motherboard पोर्ट और कंपोनेंट्स (Motherboard Ports and Components)

motherboard in cpu case
  1. Mouse & keyboard
  2. CPU Chip
  3. CPU slot
  4. RAM slots
  5. ROM Chip
  6. Hard Drive slots
  7. Northbridge with heat sink
  8. Southbridge
  9. USB
  10. Parallel port
  11. PCI slot
  12. IDE controller
  13. CMOS Battery
  14. Floppy controller
  15. AGP slot
  16. ISA slot
  17. Power connector

functions of Mouse & Keyboard, CPU Chip, CPU Slot

Mouse & keyboard:
माउस और कीबोर्ड के जरिये हम कोई भी data computer में डालते है. Motherboard के साथ माउस और कीबोर्ड External port के जरिये direct connect रहता है. ये सबसे प्रचलित सिस्टम है. इसमें DIN connector का इस्तेमाल होता है. इसे AT-style keyboard कहा जाता है. ये हमारे घरोमे पुराने Computer में देखने को मिलेंगे. जिसमे mouse और keyboard DIN connector से ज़ुरा हुआ है.

मगर अभी modern computer में छोटा आकृति का PS/2 port keyboard connector का इस्तेमाल हो रहा है. जो मदर बोर्ड के साथ माउस और कीबोर्ड को जोरते है.

CPU Chip:
Motherboard में वर्ग की आकृति की, एक छोटा सा electronic components रहता है. इसे chip कहते है. ये एक motherboard parts है. और इस CPU chip का main काम होता है डाटा का प्राथमिक processing करना. microprocessor, microcontroller इस तरह का Cpu chip है.

CPU Slot:
CPU socket को CPU slot भी कहा जाता है. इसमें mechanical components लगी होती है. जिसका मुख्य काम है microprocessor और printed circuit board (PCB) को जोड़कर रखना.

functions of RAM Slots, ROM Slot, HD Slot

RAM Slots:
ये मुख्य रूप से computer में memory (RAM) को जोड़ने का काम करता है. ये एक socket होता है जो motherboard में लगी रहती है. जिसके ऊपर हम हमारे RAM को बिठाते है. इसे DIMM Slot कहते है (or DRAM). RAM कंप्यूटर का एक temporary memory होता है. जो काम करते वक़्त data save करता है. इसलिए इसे हम working memory भी कहते है. एहि कारन है RAM बढ़ने से computer speed भी बढ़ जाता है. किउकी तब कंप्यूटर एकसाथ ज्यादा programs में काम कर पाता है.

ROM Slot:
ये chip computer में रीड-ओनली मेमोरी को जोरता है. ये भी motherboard का एक unit है. इसके द्वारा कंप्यूटर में permanent or semi-permanent data को रखा जाता है. ROM के बजह से हम कंप्यूटर को ऑफ करने के बाद भी डाटा delete नहीं होता है.

BIOS का नाम आपने सुना होगा. ये एक Firmware होता है. जो कंप्यूटर ऑन करने के बाद booting process के समय hardware initialization को परफॉर्म करता है. ये BIOS chip भी ROM में ही लगी होती है.

Hard Drive Slot:
SATA Slot (serial advanced technology attachment slots) के जरिये hard drive को motherboard से जोड़ा जाता है. ये एक connector होता है जो कंप्यूटर का permanent storage जैसे HDD (hard drive) or SSD (Solid State Drive) को जोड़ता है. इशिमे हमारा saved files स्टोर रहता है. पुराने कंप्यूटर में PATA port का इस्तेमाल किया जाता था.

HDD में एक spinning platters रहता है. जो घूम कर data save करता है. ये पुराणी हो चुकी है. SDD आधुनिक है. और fast speed के साथ flash memory में डाटा सेव करता है

functions of North & South Bridge, USB Ports, Parallel Port

Northbridge with heat sink:
PAC या northbridge एक integrated circuit है. इसका main काम है CPU, AGP और memory के साथ कम्यूनिकेट करना. motherboard में एक socket के माध्यम से ये जुड़ी रहती है. नए कंप्यूटर में ये एक single chip के रूप में लगता है. पर पुराने कम्प्यूटर्स में तीन अलग अलग chips को मिलाकर northbridge बनता था. इसके साथ heatsink भी ज़ुरा रहता है. जो गर्मी को control करता है.

Southbridge:
कंप्यूटर का I/O functions, जैसा USB, audio, serial, BIOS आदि को कण्ट्रोल करता है Southbridge. एक सर्किट से जुड़ा होता है ये component.

USB Ports:
Motherboard में चार, छे या आठ USB Ports रहता है. जिनमे से दो या चार पोर्ट डायरेक्ट mother board के पिछले हिस्से में सोल्डर किया हुआ रहता है. इनका काम है USB Device को connect करना.

Parallel Port:
25 Pins वाले parallel port का इस्तेमाल किया जाता है printer, monitor, external Zip drive, scanner जैसे एक्सटर्नल डिवाइस को जोड़ने के लिए. इन्हे peripherals devices कहते है. और ये पोर्ट एक बार में डेटा के कई बिट्स send कर सकते है. इसीलिए इन्हे parallel port कहते है. ये motherboard के साथ peripherals को संगयुक्त करने में काम आते है.

functions of PCI Slot, IDE Controller, CMOS Battery

PCI Slot:
PCI connectors को इस्तेमाल किया जाता है controller cards और अन्य उपकरणों को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए. ये मदरबोर्ड में बना हुआ एक सॉकेट है. तीन तरह का मुख्य PCI motherboard connector मिलते है. जिन्हे एकसाथ Slots कहते है.

IDE Controller:
Integrated Drive Electronics या IDE मूल तौर पर hard drive को motherboard के साथ जोड़ने का काम करता है. इन्हे ribbon cable लगा हुआ रहता है. जो flexible होता है और देखने में फीता का जैसा लगता है.

CMOS Battery:
Current time and date को सठिक रखने के लिए motherboard में ये बैटरी लगी होती है. system reboot के समय CMOS Battery घरी को backup power देता है. और इसके बजह से System Clock का parameter सठिक समय बता पाता है.

functions of Floppy Controller, AGP Slot, ISA Slot, Power Connector

Floppy Controller:
FDC एक electronic chip controller है. जो मदरबोर्ड पर embed किया हुआ रहता है. और ये floppy drive का कार्यक्षमता को नियंत्रण करते है.

AGP Slot:
Accelerated Graphics Port या AGP Slot इस्तेमाल किया जाता है video card लगाने के लिए. Motherboard में ये connector के साथ graphic card को लगाकर high graphic games को खेला जाता है. Gaming PC में ये इस्तेमाल होता है.

ISA Slot:
expansion cards लगाने के लिए ISA Slot का इस्तेमाल होता है. इसका Industry Standard Architecture है. इन्ह कनेक्टर के जरिये मदरबोर्ड में video card, network card, extra serial port इत्यादि लगाया जाता है.

Power Connector:
PC में इलेक्ट्रिसिटी की आपूर्ति करने के लिए power supply unit का इस्तेमाल किया जाता है. और mother board में power supply करने के लिए दो 4 pin या एक 8-pin बाले auxiliary connector का इस्तेमाल होता है. यह कनेक्टर motherboard में प्रोसेसर और अन्य उपकरणों को अतिरिक्त बिजली प्रदान करता है.

Motherboard Diagram

motherboard diagram

ऊपर हमने motherboard की रेखा-चित्र उपलब्ध करवाया है. इस diagram से आपको आसानी होगी, मदर बोर्ड में कौनसी parts कैसी दिखती है. इस motherboard diagram में labels के साथ हर एक अंश को आप देख सकते है. इस diagram में CPU socket कहां पर लगता है ये देख सकते हो. CPU मतलब माथेरबोर्ड का ब्रेन जिसे processor कहते है. ये इसी स्थान पर है.

इसके बाद RAM के लिए स्लॉट को पीला और हल्दी रंग में देख हो. Northbridge और Southbridge किसे कहते है ये तो आप जान ही चुके हो. diagram में look भी देख लीजिये. इसके बाद ATX power, IDE, AGP Slot को देखा जा सकता है. डायना चैत्र में PCI स्लॉट मिलेंगे. घरी और तारिक को बैकअप देने बाले CMOS battery बिच में है. मगर ये निचे के तरफ भी होते है. Keyboard, Mouse, Audio Port, USB पोर्ट जैसा peripheral को नाम के साथ चिन्हित किया गया है.

Motherboard Form Factor क्या है?

Motherboard का Form Factor निर्धारित करता है इसकी shape and size को. फॉर्म फैक्टर से निर्धारित होता है किस प्रकार के case और power supply मदरबोर्ड के लिए उपयुक्त होगा. इसके अलावा motherboard का structure भी form-factor निर्दिस्ट करता है.

असलमे form factor एक दर्जी जैसा काम करता है. जैसे आपके बॉडी शेप के मुताबिक आपका कपड़ो का शिलाई होता है. जैसे दर्ज़ी आपका शोल्डर, कॉलर, रिस्ट का अलग अलग माप लेता है. जैसे आपका शैर्ट के हिसाब से पैंट बनता है. और दोनों के हिसाब से शूट बनता है. वैसा ही form factor से पता चलता है. motherboard में कोनसा चीज कहा बैठेगी. किस तरह का मदरबोर्ड का कंप्यूटर केस होना चाहिए. RAM कैसा होना चाहिए. RAM का form factor यहाँ जानिए. एक लाइन में कहे तो form factor असल में एक measurement chart होता है. कोईभी device के लिए.

मदरबोर्ड का इतिहास (History of Motherboard in Hindi)

history of motherboard

साल 1970 में, जब motherboard की आज की model नही बनी थी, ये पतली प्लेट का circuit board जो हम आज इस्तेम्मल करते है. तब, उस वक्त कुछ अलग सा system का प्रचलन था. एक बोर्ड के जगह पर, कई सारे printed circuit board तब इस्तेमाल किये जाते थे. जिन्हे एक card-cage case में सेट किया जाता था. components को backplane के द्वारा sockets के माद्यम से बोर्ड के साथ जोड़ा जाता था. ये एक classic system था. Backplane असल में छोटा आकृति का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड होता है. जिनमे कई सारे sockets लगे रहते है. Example: ubiquitous S-100 bus(1970)

Planar

1981 में पहलीबार modern motherboard को IBM company ने हमारे पर्सनल कंप्यूटर में इस्तेमाल करने के लिए बनाया. इसे Planar कहा जाता था. इस “Planar” Motherboard कई छोटे छोटे holes बना हुआ रहता था. जिनके जरिये electronic components को कनेक्ट किया जाता था. इस system को breadboard कहा जाता है. इन्ह मदरबोर्ड में तार के मदत से chips, RAM, CPU को लगाया जाता था.

फिर आया AT mother board का दौर, जब 1984 के अगस्त महीने में IBM ने AT और Full-size AT motherboard form factor को बाजार में लाया. AT के बारेमे हमने ऊपर बात किया है. फुल AT साइज अनुपात 12″ wide और 13.8″ deep था. जो एक full size AT tower case में बैठता था.
फिर IBM ने इसको और upgrade करके 1985 में baby AT को ले कर आएं. इसे BAT भी खा जाने लगा. और ये बेबी AT early 1990s तक चलता रहा.

Western Digital नाम की कंपनी 1987 में बनाया LPX motherboard. जिसका पूरा नाम है “Low-Profile EXtended motherboard”. ये मदरबोर्ड फिट होते थे slim-line और low-profile case में. इसमें expansion boards motherboard के समानांतर रहते थे. जिसके कारन system बोहोत ही पतला दिखाई देता था. और size में भी छोटा होता था. मगर size-small होने के कारन इसमें expansion slots दो या तीन ही रहता था. इस board में video adapters लगी रहती थी. साथ में sound भी बोर्ड में मौजूद थी. मगर दाम में सस्ता था.

इससे एक साल पहले ही 1986 में Gigabyte(GB) का जनम हुआ. जिसे बनाया है Taiwan के Yeh pei-cheng ने. 1987 में ही Taiwan में स्थित, दुनिया का fifth largest motherboard निर्माण संस्था Elitegroup(ECS) ने ECS boards को बनाया.

Our gen motherboard

इसके बाद मार्किट में आया Intel अपने ATX motherboard का पहला संस्करण लेके. साल था 1995. जुलाई के महीने में इंटेल के द्वारा बनाई गयी हमारे आज का मदरबोर्ड. जो बोहोत ही ज्यादा advanced और configuration बाले थे. फिर तो ये चलता रहा और बहुत सारे कंपनी ने motherboard बनाया. इनमे से AMD, Kontron, NVIDIA, Supermicro, EVGA आदि उल्लेखनीय है.

Popular Motherboard manufacturer 2020 (उत्पादक)

  • ASRock
  • Asus
  • Biostar
  • EVGA Corporation
  • ECS
  • Gigabyte Technology
  • Intel
  • MSI (Micro-Star International)
  • AOpen
  • ABIT

How to choose a motherboard

New PC खरीदना है या पुराने को upgrade करवाना है. कंप्यूटर का foundation बनाने में motherboard, processor, RAM आदि का सही चयन जरूरी है. दोस्तों बाजार में कई कंपनियां है. और बहुत सा motherboard models उपलब्ध है. जिनके features भी अलग अलग होते है. Form Factor और components भी भिन्न होते है. ऐसे में सही मदरबोर्ड को choose करना काफी challenging हो सकता है. चलिए बताते है motherboard buy करते वक़्त आपको किन चीजोंका points बनाकर बोर्ड को लेना है.

1st, 2nd, 3rd steps

1. Platform
First step मैं आपको processor या CPU का चयन करना है. जो motherboard brain है. इसके लिए आपको अपने work के अनुशार entry-level या ultra-fast CPU को चुनना है. अगर आपका जरुरत सिर्फ web browsing, छोटा मोटा office work, small editing और low-end games खेलना है तो पहला option बेहतर होगा. High-end processor आपको advanced level high graphic games खेलने के लिए, या high resolution video editing के लिए बेहतर होगा. आप Intel या AMD में से एक ले सकते हो. Intel का ninth-generation और AMD का Zen 2 या Zen 3 बेहतर है.

2. Motherboard
Second Step मैं आपको अपना motherboard को चुनना होगा. मदर बोर्ड का चयन करते वक़्त आपको दो चीजे ध्यान में रखना होगा.
१. processor socket. जिससे मदरबोर्ड CPu के साथ connect होंगे. आपका CPu के अनुशार ये सॉकेट होना चाहिए. सॉकेट में Supported CPUs उल्लेखित रहता है.
२. chipset. ये basically motherboard software and hardware का कॉम्बिनेशन होता है. इसीसे motherboard का अन्य parts ठीक तरीके से काम करता है.

3. Form Factor
Third Step मैं आपको Form Factor को देखना है. फॉर्म फैक्टर के बारेमे आप ऊपर जान चुके है. motherboard बिभिन्य size और shape में आते है. आपको cpu case को मदरबोर्ड के साइज के हिसाब से चुनना है. या आप cpu case के हिसाब से motherboard को चुन लीजिये. comparitively बड़े आकार का motherboard होने से फ़ायदा ये मिलता है, की आप ज्यादा components उसमे लगाने का option पाओगे.

4th, 5th, 6th Steps

4. Expansion Options
Forth Step में आपको देखना है मदर बोर्ड को expand करने का क्या options आपको मिल रहा है. जिसे PCI slots कहते है. ताकि future upgrade में आप extra components लगा सको. जैसे networking card, graphics card, sound card इत्यादि.

5. DIMM of RAM
Fifth Step मैं आपको कोनसा RAM लगाना है ये decide कर लेना है. 4 Gb, 8Gb, 16Gb जो भी Ram आप लगाने बाले हो आपको motherbord में बने ram का module के अनुशार RAM का चयन करना है. इसे DIMM कहते है. जितने ज्यादा DIMM slots होंगे, उतना ज्यादा RAM लगाने का option आपको मिलेगा.

6. Storage
Sixth Step स्टोरेज का. अब आपको देखना है, storage connectors को. क्युकी आप HDD या SDD storage अपने सिस्टम में लगाने बाले हो. आपको अपना स्टोरेज के अनुशार motherboard में देख लेना है उसे लगाने का कनेक्टर मौजूद है या नहीं. बेस्ट होगा अगर SDD और HDD दोनों का connector मौजूद हो. HDD और SDD के बारेमे हमने आपको ऊपर बता चुके है.

7th, 8th, 9th Steps

7. Graphics Card Slot (GPU)
Seventh Step में देखना है graphic card के लिए motherboard में जगह है या नहीं. किउकी अच्छे graphics के लिए हमें extra ग्राफ़िक कार्ड भी लगाना है. वैसे मदरबोर्ड के साथ inbuilt GPU रहती है. पर वो low-powered GPU होती है. Heavy graphic game खेलने के लिए अलग से graphic card लगाने पड़ते है.

8. Ports and Connections
Eighth Step में देख लेना है motherboard में जरूरी peripherals connection के लिए ports बानी हुयी है या नहीं. इसके अलावा ये भी देखना है की cpu case मदरबोर्ड के साथ connection sockets match हो रही है या नहीं. नहीं तो हो सकता है सकता है, motherboard का port राइट साइड में है और case का socket hole लेफ्ट सेईदे में. mismatch ना हो जाये ये देखना है.

9. Brand
Finally Ninth Step में हमें motherboard brand को चुन लेना है. ऊपर का सारे जरुरत पूरा होने के बाद manufacturer को select करना है. इसके लिए ऊपर हमने popular motherboard manufacurer list भी प्रोवाइड कर चुके है. बस आपका मदरबोर्ड का चयन पूरा हुआ.

Summary – Features of Motherboard

Motherboard आपका central processing unit case में कुछ screws के मदत से जुड़ा हुआ रहता है. ये कंप्यूटर का वो हिस्सा है, जो एक आधार का काम करता है. माँ के जैसा ही ये कंप्यूटर का अन्य parts को अपने ऊपर धारण किये रखते है. इसीलिए इसे motherboard का नाम मिला. इनमे कई port के माद्यम से important components एक दूसरे के साथ जुड़ते है. Peripherals जुड़ते है स्लॉट के माद्यम से. Monitor, mouse, keyboard, network cables, USB ये सभी मदरबोर्ड से जुड़े रहते है.
निचे दिए गए points मदरबोर्ड का कुछ key features है. जो ध्यान देने योग्य है.

  • Motherboard बिभिन्य प्रकार का होता है. उसके साथ components जोड़ने के ऊपर उसकी type निर्भर करता है.
  • मदरबोर्ड Single type का CPU और बिभिन्य type का memory support करता है.
  • मदरबोर्ड Form Factor को मदरबोर्ड का अन्य components के मुताबिक होना आबस्यक है.
  • Power Supply, case और motherboard को साथ में काम करने के लिए एक दूसरे के साथ compatible होना आबस्यक है.
  • Hard Disk और Graphics Card को मदरबोर्ड के साथ compatible होना आबस्यक है.

Conclusion – निष्कर्ष

motherboard का जर्नी शुरू हुए सालों बीत गए. IBM ने सुरु किया. फिर धीरे धीरे Intel, AMD जैसा बड़ी कंपनियां मदरबोर्ड का निर्माण सुरु किये. आज हम धीरे धीरे २०२० को पार कर चले है. और बीतें सालों में computer के छेत्र में काफी बदलाव भी हुए. जिनमे motherboard का advance होना आबस्यक था. हमारे कम्यूटर के साथ motherboard भी small होते गए. और हम ये अंदाजा भी लगा सकते है, आनेबाले सालों में technology और कितनी आगे जायेंगे. आपके साथ subhra som hindi blog भी भबिस्य के टेक को स्वागत करते हुए मिलते है अगली hindi article के साथ. आपने समय दिया, आपका तहे दिलसे धन्यवाद्.

Image represent Computer information in hindi

what is Computer? how it work? types of computer? in Hindi

Computer एक electronic device है, जो user के द्वारा डाला गया Input data को process करके store करता है. और user को output data प्रदान करता है..

परिचयComputer in hindi: Computer एक electronic device है, जिसे data process करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मतलब Computer एक ऐसा machine है. जो कोई भी डेटा को Binary language (0 और 1) के माद्यम से process और store करके user को रिजल्ट प्रदान करता है. Computer सिर्फ 0 और 1 numeric language ही समझता है.

कंप्यूटर क्या है – What is a computer (Hindi)

Computer in hindi

Computer एक ऐसा electronic machine है, जिसे computer programming के माध्यम से instruction दिया जाता है. ये आदेश कुछ arithmetic or logical operations (अंकगणित या तार्किक संचालन) के अनुक्रम को पूरा करने के लिए दिया जाता है. और ये मशीन दिए गए instruction को store(संग्रहीत), retrieve(पुनर्प्राप्त), and process data(संसाधित) के अनुक्रम में पूर्ण करता है.

Steps:

आसान भाषा मे कहा जाये तो, कंप्यूटर के माध्यम से दस्तावेज को type करने के बाद, इस machine में सुरक्षित store करके रख सकते है. और बादमे जब भी जरुरत परे उस दस्तावेज(डाटा) को फिरसे पुनर्प्राप्त कर सकते है. इसके इलावा और भी बोहोत सारे काम कंप्यूटर के माध्यम से आसानीसे कर सकते है. जैसे कोई mathematical calculation कुछ click में ही हमें मिल जाते है.

हमारे मनोरंजन के लिए games खेल सकते है. computer में मन पसंद movies देख सकते है. video presentations और Image presentations बना सकते है. नया art design बना सकते है. Computer एक इलेक्ट्रोनिक यंत्र है और हमारे जीवन को गति देनेके लिए बनाई गयी है.

कंप्यूटर कैसे काम करता है – How computer works

पहले स्टेप में, कंप्यूटर यूजर्स से data collect करता है. Data संग्रहीत करने के प्रक्रिया को input कहते है. फिर data store होता है और processing के लिए आगे बरता है. उसके बाद processed data फिरसे स्टोर किया जाता है. और फाइनली output दिया जाता है. ये प्रक्रिया कुछ निचे दिया गया चित्र जैसा ही होता है.

Computer Work Steps

दिए गए चित्र में, कंप्यूटर की कार्य प्रक्रिया को steps में describe किया गया है. अगर उन्हें मुख्य 3 भागों में उल्लेखित किया जाये तो वो हो सकता है Input Data, Process Data और Output Data.

कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्या है – Computer hardware and software

दोस्तों हमने computer hardware और software के बारे में काफी सुन रख्हा है. मगर असल में ये होता क्या है?चलिए जानते है.

computer hardware and software

Hardware
हार्डवेयर आपका कंप्यूटर का हर वो हिस्सा है जो physical components से बनी होती है. मतलब जिसे आप अपने आँखों से देख सकते हो और छू सकते हो वो सभी hardware है. जैसे की आपके computer mouse, keyboard. आपका CPU, PROCESSOR, RAM और हर एक छोटा छोटा पुर्जा सभी हार्डवेयर है.

Software
सॉफ्टवेयर के बात करें तो वह सभी programs और operating information, जो computer को बताता है क्या करना है और किस तरह करना है. असलमे softwares के द्वारा कंप्यूटर कोईभी काम को करने का निर्देश प्राप्त करता है. जैसे की Operating Software, web browsers, word processors, games, Application Software. इसको दो भाग में समझते है.

एक है System Software, जिसे आपका computer OS भी कहा जाता है. जैसे Windows 7,Windows 10, Vista, Xp, Linux, MacOS, Ubuntu इत्यादि. ये आप अपना कंप्यूटर On करते ही home screen पर जो दीखते है. ये आपके कंप्यूटर में न्य program को मैनेज करते है. इसलिए इसे Operating System यानी OS कहते है.

दूसरा है Application software एक software package है, जो एक निर्दिस्ट कार्य को करने के लिए आप अपने कंप्यूटर में डालते है. जैसे की Photoshop, Coreldraw, Microsoft Office (Word, Excel, PowerPoint), Media Player, Google Chrome इत्यादि.

कंप्यूटर सिस्टम के मूल भाग – Basic parts of a computer system

Basic parts of a computer system
  1. Monitor
  2. CPU (Central Processing Unit)
  3. Keyboard
  4. Mouse
  5. Speakers
  6. Printer
  7. UPS
Basic Parts NameWorkInput/Output/Processing Device/Power Supplier
MonitorDisplay the resultsOutput Device
CPUProcess DataProcessing Device
KeyboardType Data/Entering DataInput Device
MouseGive a input to the computer by PointingInput Device
SpeakersSound OutputOutput Device
PrinterPrint a DataOutput Device
UPSBattery Backup SystemPower Supplier

कंप्यूटर CPU के पुर्जों का नाम – Parts of Computer CPU

Parts of Computer CPU
  1. Motherboard
  2. Processor/CPU
  3. RAM (Random Access Memory)
  4. ROM (Read Only Memory)
  5. BIOS
  6. Hard Disk Drive (HDD) or Solid State Drive (SSD) – Storage
  7. SMPS (switched-mode power supplies)
  8. Graphic Processing Unit (GPU)
  9. Optical Disc Drive (ODD)

दोस्तों बताये गए CPU Parts के नाम के बारे मे हमने डिटेल्स में बताये है. जानने के लिए क्लिक करें Continue Reading

कंप्यूटर के प्रकार – Types of computer

Size and shapes के हिसाब से computer विभिन्न types का होता है. कंप्यूटर की प्रकार किया जा एकता है उसके usability या प्रयोज्य के हिसाब से. हमारे परिचित कंप्यूटर Desktop और Laptop है. पर अभी इनके अलावा Tablets भी काफी लोकप्रिय कंप्यूटर बन चूका है. Desktop computer सामान्य तौर पर personal computer नाम से परिचित है.

पर इससे भी बड़ी एक कंप्यूटर हमारे इस्तेमाल में रोज लगता है. और हमने नाम भी सुना है. मगर ज्यादातर लोगोको पता ही नहीं की Server भी एक कंप्यूटर ही है. सर्वर के माद्यम से ही आप हमारे Hindi Blog को पढ़ पा रहे हो. ये Internet के साथ जुड़ा हुआ एक बिशाल network की जाल सा होता है. नीचे इसके विषय में और जानकारी प्राप्त करें.

Desktop Computers
(डेस्कटॉप कंप्यूटर)

desktop

हमारे घर पर, ऑफिस, स्कूल में और स्थानीय cyber cafe इस्तेमाल किये जाते है desktop computer. इनमे एक CPU, Monitor, Keyboard, Mouse और UPS रहता है. कुछ कुछ लोग sound system भी लगाते है. मगर ये external part है.

वैसे UPS भी अतिरिक्त हिस्सा ही है. इसके बिना भी कंप्यूटर चल सकता है. ये power cut पर backup देने के लिए एक बेटरी होता है. पर अभी computer के साथ इसे लोग इस्तेमाल करता ही है. Desktop लोग घर पर इस्तेमाल करते है personal काम के लिए, इसीलिए इसे personal computer नाम दिया गया. इसका design एक desk या टेबल पर रखने के लिए किया गया है.

Laptop Computer
(लैपटॉप कंप्यूटर)

laptop

छोटा सा portable computers हम इस्तेमाल करते है, जो दिखने में एक बड़ी डायरी जैसी लगती है. हलाकि ये लगभग 15″ का होता है. इसे हम laptop के नाम से जानते है. इसमें physical component बोहोत छोटे आकार में रहती है.

keyboard laptop body में ही संयुक्त रहती है. और mouse के जगह पर एक touch pad रहती है. जिसे हम ऊँगली से छू कर चलाते है. इनमे सेंसर लगी रहती है. उंगलिको आप जिधर घुमाएंगे माउस के जैसा उधर pointer चलेगी. इसमें speakers भी लगी रहती है. और ज्यादातर लैपटॉप में DVD player भी उपलब्ध रहता है. असलमे ये एक compact computer है. जिसे आप कही भी इस्तेमाल कर सकते हो. और कही भी ले जा सकते हो. इसे rechargeable battery से पावर मिलता है. घर पर आप इसे adapter लगाके सीधा बिजली से भी चला सकते हो.

Tablet computers
(टैबलेट कंप्यूटर)

tablet

Laptop से और भी handy computer है Tablet. इसे आप हाथ पर लेकर काम कर सकते है. ये देखने में एक बड़ा आकार का मोबाइल फ़ोन का जैसा लगता है. इसमें एक touch screen रहता है. जिससे आप type कर सकते हो. और ऊँगली के इस्तेमाल से mobile like काम कर सकते हो. इसमें physical components बहुत ही छोटे आकृति का लगता है. इन तरह का टेबलेट कंप्यूटर में नैनो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. Nano-technologies क्या है? नहीं जानते तो पढ़ लीजिये. खैर, Google’s Nexus 7, Apple iPad, Samsung’s Galaxy Tab ये सब ही टेबलेट है.

Servers
(सर्वर)

servers

Internet में इस्तेमाल होते है Servers. ये भी giant computer है. बल्कि ये कई कम्प्यूटर्स की समूह है. इसके माद्यम से एक network तैयार किया जाता है. और कई सारे कम्प्यूटर्स को इस नेटवर्क से जोड़ा जाता है. उदाहरण के लिए, हम जो भी इंटरनेट में search करते है या कुछ भी नेट पर काम करते है वो सर्वर के माद्यम से हमारे personal computer तक पोहोचते है. किउकी हमारा PC जुड़ा रहता है उस बिशाल कंप्यूटर के साथ internet के माद्यम से.

कंप्यूटर के कुछ और प्रकार – Few more types of computer

ऊपर बताई गई Traditional Computer के प्रचलित प्रकार है. जिसे हम कंप्यूटर नाम से जानते है. मगर इनके अलावा कुछ other type of computer है. जिसे कंप्यूटर न कहके हम Smartphone, Gaming Console, Smart Watch, Smart TV आदि के नाम से जानते है. चलिए अब एक एक करके इनके बारेमे संक्षिप्त में बिबरन लेते है.

Pocket Computer

Smart phone computer

Smart Phone: दोस्तों आज के जमाने में हम अपने पॉकेट में smart computer ले कर घूमते है. जिसे हम Smart Phone कहते है. इन्हे कंप्यूटर कहने का तात्पर्य क्या है? ये एक computer में होने बाले हर काम को primary steps में करने में सक्छम है. जी हाँ, Apps के द्वारा आप हर वो काम कर पाएंगे, जो एक प्रचलित कंप्यूटर (popular computer) कर सकते है.

इनमे आप word excel sheet का काम कर सकते हो. छोटा मोटा डिज़ाइन बना सकते हो. Image video edit कर सकते हो. Net surfing के साथ games खेल सकते हो. movies देख सकते हो. Camera से photo click कर सकते हो. एक्साम्पल: Apple iPhone एक दमदार Smart Computer है.

Wearable Computers

Watch which is smart watch is also a computer

Smart Watch: इस तरीके के computers को आप हाथ में पहन सकते है. इन्हे wearable computer कहा जाता है. इनमे application के द्वारा आप smartphones के जैसा ही बोहोत से काम कर सकते हो.

पर इन्हे उपयोग किया जाता है fitness tracker और phone call receiver के रूप में. ये स्मार्ट वाच आपका दिलके धरकन को माप सकता है. आपका डेली fitness रूटीन को monitor कर सकते है. एक्साम्पल: Samsung Gear के बेहतरीन wearable computer है.

New Gen Computer

video gaming console computer

Video Gaming Console: New Gen Computer कह सकते है इन्हे आप. किउकी gaming तो हाल ही में popular हुयी है. Gaming Console Computer ही है. बस इसमें आप सिर्फ गेम्स खेल सकते हो. इसके लिए आपको monitor की जरुरत पड़ेगी. या फिर आप इसे अपने television के साथ भी जोड़ सकते हो. एक्साम्पल: PlayStation 4 Pro, Xbox One S ये दोनों ही powerful game console है.

smart tv computer

Smart TV: Technology का smart होने के साथ ही हमारे चारो और की चीजे भी बदल रही है. लगभग सभी साधारण सामग्री smart device में परिबर्तित हो रही है. उनमे आपका TV भी शामिल है. अभी जमाना आ गया है smart TV का. जिसे आप android TV भी कहते हो. जिसमे फ़ोन के जैसा ही apps की भंडार है. और इन apps के जरिये आप लगभग वो सारे काम कर सकते हो जो आप computer में करते हो.

आप online content को अपने TV पर ला सकते हो. video streaming कर सकते हो. YouTube, Netflix जैसे सर्विस की उपयोग भी कर सकते हो. एक्साम्पल: Samsung Smart TV, Sony, TCL के popular smart TV काफी चलती है.

कंप्यूटर का अनुप्रयोग – Application of the Computer

दोस्तों आज का समय पूरी तरह computer dependent हो चूका है. हमारे घर से लेकर सामने बाला दुकान या super market सभी जगह कंप्यूटर पोहोच चुके है. इसके बिना हम हमारे जीबन सोच भी नहीं सकते। हमारे education, business, finance, travel, marketing, health, Security, Insurance, Communication, Engineering सभी में आज कंप्यूटर अनिबर्य एक सामग्री बन चूका है. यहाँ तक की Government Sector में भी यूज़ किया जाता है.

कोई भी production और invention कंप्यूटर के बिना मुश्किल सा लगता है. हमारे Smartphones से लेकर हमारे cars तक में computer chip का इस्तेमाल होता है. अभी तो bikes भी chips लगी आ रही है. चलिए थोड़ा डिटेल्स में जानते है computer की कुछ उपयोग.

Education, Business, Banking

Education में कंप्यूटर:
Computer Based Education या CBE अभी के शिक्षा व्यवस्था में काफी पॉपुलर एक प्रयोग है. इसमें नियंत्रण, वितरण और सीखने का मूल्यांकन (control, delivery, and evaluation) के माद्यम से छात्रों को सिखाया जाता है. जिसमे students और भी तेजी से सीखते है. इसके अलावा स्टूडेंट्स की दस्ताबेज database के रूप में रख्हा जाता है. ये paperless work को बराबा देता है. और भी कई नए methods लाया गया है कंप्यूटर के माद्यम से शिक्षा देने की. जैसे अभी Online Classes कभी चर्चा में है. जिससे स्टूडेंट्स घर बैठे सिख सकता है.

Business में कंप्यूटर:
Calculation में तेजी और accuracy लाने के लिए अभी छोटा बड़ा सभी business में कंप्यूटर का उपयोग होने लगा है. इससे छोटेमोटे दुकानदार अपने customers का खता मैनेज करते है. और वही बड़ा सा business organizations अपने employees का Payroll calculations करते है. इसके अलावा Sales analysis, stocks के Maintenance, Finance management और Budget देखने के लिए computer काम में आता है.

Banking में कंप्यूटर:
वित्तीय कार्य में कंप्यूटर तो जैसे जान बन चुका है. computer के बिना बैंक जैसे बंद सी हो जाएगी. किउकी bank में लगभग हर काम कंप्यूटर की माध्यम से ही किया जाता है. customer की खता क जानकरी. cash flow सभी को manage computer द्वारा किया जाता है. इसके अलावा अभी ग्राहक online banking से सारे काम अपने laptop पर बैठ कर ही कर लेता है. ATM से कॅश निकलते वक़्त computer screen पर ही सारे display से navigation किया जाता है.

Marketing, Healthcare, Communication, Defense

Marketing में कंप्यूटर:
मार्केटिंग आज के जमाने का सबसे बड़ा छेत्र में से एक है. और online marketing तो हर बिज़नेस में इस्तेमाल होता है. चाहे आप कुछ सामान ख़रीदे इसमें आपको computerized catalogues मिलते है. या अगर आप online ads का यूज़ करे, दोनों ही मार्केटिंग कंप्यूटर के बिना सम्भब नहीं है. छोटा बड़ा हर किस्म का business अभी sell promote करने के लिए Google ads या Facebook ads का इस्तेमाल करते है. और ये एड्स को बनाते है ads professional. वो कंप्यूटर का इस्तेमाल करके शानदार graphic बनाते है. Video भी बनाई sells में बड़ोतरी होती है.

Healthcare में कंप्यूटर:
स्वास्थ्य देखभाल में भी कंप्यूटर मौजूद है. कैसे? hospitals, labs, dispensaries सभी में तो कंप्यूटर रहता है. ये रोगियों का और medicines का रिकॉर्ड कंप्यूटर में रखते है. इसके अलावा CT scans, ECG, ultrasounds, EEG सभीमे कम्प्यूटर्स मौजूद है. और अभी तो Surgery भी computer से हो रहा है.

Communication में कंप्यूटर:
हम text message, voice message या picture के माध्यम से लोगो से online communicate करते है. जैसे email भेजते है, Video-conferenc करते है, Chatting करते है. इन सभीमे computer या smartphones का इस्तेमाल करते है.

Defense में कंप्यूटर:
Military में कंप्यूटर एक जरूरत बन चुका है. देश की रक्षा में missiles, tanks, और modern weapons भी कंप्यूटर से परिचालित होता है. नए जमाने का drone, robotic aircraft का इस्तेमाल मिलिट्री में होता है. इन्हे भी कंप्यूटर से ही चलाया जाता है.

Government, Engineering, Entertainment

Government में कंप्यूटर:
हमारे गवर्नमेंट हर काम में कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है. जैसे नया बजट पेश किया जाता है. उसे कंप्यूटर की मदत से ही तैयार किया जाता है. Income tax department में दस्तावेजों को कंप्यूटर में सेव करके रखा जाता है. voters lists को computerize किया गया, ताकि और भी सही तरीके से voting हो पाए. Weather forecasting को हम कंप्यूटर की मदत से ही जान पाते है. और भी गवर्नमेंट चैत्र है जहां कंप्यूटर इस्तेमाल में लगता है जैसे Traffic control, Aviation, Space, Tourism इत्यादि.

Engineering में कंप्यूटर:
दोस्तों कोई भी अविष्कार में, अभी कंप्यूटर के सहायता से प्रयोग आसान हुआ है. या इउ कहे, मुमकिन हुआ है. कोई कोई बिज्ञान के चैत्र कंप्यूटर के बिना अधूरी है. अगर हम space science के बात करें. तो उसमे कंप्यूटर अनिबर्य है. मगर वह और भी advanced computer का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा modern engineering में workshop में आधुनिक robots रहते है. कोई research में कंप्यूटर का उसे देखा जाता है.

Entertainment में कंप्यूटर:
मनोरंजन के चित्र तो बिना कंप्यूटर का मानो थम सी जाये. Editing, Scripting, Layout, Recording इन सभी काम में कंप्यूटर का इस्तेमाल होता है. Movies का shooting होने के बाद उन्हें कंप्यूटर में frame किया जाता है. Posters का design कंप्यूटर पर ही होता है. और अगर दूसरी तरफ देखे तो आप TV पर जो सीरियल देकते है और सीरियल के बिच में जो ads देकते है उन्हें भी computer की जरुरत परा है. आजकल तो movie tickets भी online booking की जाती है.

कंप्यूटर का फायदा – benefits of computer

दोस्त 2020 में कंप्यूटर हमारे जीवन का एक अंस बन चूका है. हमारे कोई भी काम को कंप्यूटर की मदत से, तेजीसे और ज्यादा perfection के साथ हम कर सकते है. कंप्यूटर हमारा समय का बचत करते है. और time consuming काम को कई गुना जल्दी कर देता है. और कंप्यूटर में हम एक साथ कई कामोंको कर सकते है. पहले के ज़माने में हम दस्ताबेज(important documents) को सम्हाल कर कई रखते थे और बाद में भूल भी जाते थे.

मगर अभी Computer Era में आसानी से जरूरी दस्तावेज को computer file के रूप में सम्हाल कर रख सकते है. और जरूरत पड़ने पर मिल भी जाता है. computer एक मशीन नहीं जैसे एक multi tasking manager के जैसा हमारे साथ काम करता है. वैसे और भी अनगिनत value कंप्यूटर हमारे जीबन में जोड़ रहा है. इसीलिए अगर लाभ के बारे में कहे तो Computers की अनगिनत benefits है हमारे लाइफ में.

फिरभी computer popularity, उनके तीन कामों के लिए बढ़ती ही जा रही है. वो है
1. Speed से काम को करने का काबिलियत.
2. Accuracy से काम को करने का हुनर.
3. Multitasking करने का योग्यता.

Speed-Accuracy-Multi Tasking

Speed:
दोस्तों एक मनुष्य ही computer invent किया है. मगर ये एक machine है. और हम सब जानते है मशीन में काम करने का power एक इन्शान से बोहोत ज्यादा होता है. और ये electronic machine लगातार बिना थके speed के साथ काम को जल्दी कर सकते है. हाँ ये बात अलग है की इसे एक इन्शान की assistance जरूर चाहिए. मगर अभी तो advanced computer तो ऐसा बन चूका है. जो automatic तरीके से human interference के बिना ही काम कर सकता है.

Accuracy:
Perfection की बात करें तो वो इंसान के level का नहीं हो सकता. मगर accuracy computer में ज्यादा होता है. हम मनुस्य एक समय के बाद थकने लगते है. और हमारा दिमाग भी थक जाता है. तब काम में भी गलतियां होने की probabilities पर computer एक device है. जो mechanical और computing तरीके से repeatedly एक ही काम को १००% accuracy से कर देता है. वो कोई calculation हो या फिर अन्य काम हो.

Multi-tasking:
मल्टीटास्किंग कंप्यूटर की एक नायब गुण है. जो एक कंप्यूटर को इन्शान से बोहोत ही काबिल बना देता है. multitasking मतलब एक ही समय पर अलग अलग काम को एक साथ करना. और कंप्यूटर एक साथ कई command को लेकर result आपको दे सकता है.

कंप्यूटर का नुकसान – Disadvantage of Computer

हज़ारो advantages के बाद भी कंप्यूटर की कुछ गंभीर drawback या disadvantage को हम नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते. सबसे महत्यपूर्ण बात ये है की, कंप्यूटर damage कर रहा है manpower का इस्तेमाल. बड़े बड़े organization अपने छत्र में इन्शान के जगह पर कंप्यूटर को ज्यादा प्रेफर कर रहे है.

एक सदी पहले भी जहा hand made को ज्यादा प्रोत्साहन दिया जाता था. अभी robots उनका जगह ले चुके है. handmade products तो हम कभीकभार साख से खरीद लेते है. पर इसे लाख हम drawback कह ले.मगर प्रगति को तो स्वागत करना ही परता है. पर कंप्यूटर की इस्तेमाल बढ़ने के साथ हज़ारो लोग बेरोजगार भी हो गए है. आने बाले समय में ये और ज्यादा होने बाला है. दोस्तों कंप्यूटर की disadvantages को अगर टेक्निकल नज़रियाँ से देखे तो इनके और कई प्रकार का harm है. जैसे…

  • Computer Virus
  • Cyber Crime
  • Privacy Hacking
  • Health Issues
  • Create Dependency
  • Impacts the Environment

Virus, Cyber Crime, Hacking

Computer Virus: कंप्यूटर वायरस कोई जिबनु नहीं बल्कि ये computer virus एक प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम है, जो अगर सिस्टम में आ जाये तो वो पहले से run कर रहा computer programs को बदल देता है. इसके लिए ये वायरस खुदका code system में install कर देता है. और आपका कंप्यूटर hack भी हो सकता है. इसीलिए हम anti virus software का इस्तेमाल करते है. जो कुछ हद तक protection देता है.

Cyber Crime: Online network और computer का इस्तेमाल करके अगर कोई किसी को धमकी देता है. या फिर किसका financial statement को चोरी करता है. या फिर जरुरी data को कॉपी करता है. तो इसे हम साइबर क्राइम कहते है. वैसे ये छोटा उद्धरण था. इससे भी बड़े पैमाने पर cyber crime होता होगा.

Privacy Hacking: Hacking भी साइबर क्राइम के अंदर आता है. इसमें भी किसीकी इजाजत के बिना उसके प्रॉपर्टी में नोकझोक किया जाता है. बस फ़र्क़ इतना है की ये ऑनलाइन होता है. इसीलिए कई बड़े बड़े company अपना खुदका hacking expert को रखते है. इन Security hacker का काम होता है, कंपनी को online protect करना.

Health Issue, Dependency

Health Issues: computer screen से कई तरह का हानिकारक rays निकलते है. इनमे से एक UV radiation भी होता है. जो हमारे eyes और skin के लिए harmful होता है.हलाकि अभीके modern LCD or LED screens बोहोत कम या न के बरार इन रेज़ को निकालते है. फिरभी देरतक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से, आंखोमे strays जरूर होता है. इनके इलावा weight gain, anxiety जैसे common health issue हो सकता है. अगर आप सावधानी से इस्तेमाल कर सकते है. और बिच बिच में ब्रेक लेते है. फिर कोई असुबिधा नहीं होने का संभावना है.

Create Dependency: दोस्तों कंप्यूटर काम को आसान तो बनाता है, साथ में ही हमें अलसी और dependent भी बना देता है. हम कोई चीज कंप्यूटर में type करते वक़्त auto correction tool का इस्तेमाल करते है. आप खुदही सोचो, अगर हमारे spelling errors को हम spell checker से सुधरते रहे तो हम गलती को सुधरने के लिए सिखने का कोशिश कभी नहीं करेंगे. और निर्भर रहेंगे spell checker के ऊपर. और भी tools है जिसके ऊपर हम निर्भर है. जैसे calculator, Grammarly, GPS इत्यादि. ये सभी helpful tools है.

Environment Pollution

Impacts the Environment: हर घर पर एक कंप्यूटर तो होता ही है. पर अभी तो एक से ज्यादा भी है. laptop, tablet, smartphone, smart gadgets इत्यादि. ये घराब भी होते है. इनके पार्ट्स को बदला भी जाता है. और बदले हुए चीजोंको फेका जाता है. कुछ recycle भी होते है. मगर जो रीसायकल नहीं होते है, वो चीजे environment प्रदुसित करते है.

Note: दोस्तों advantage और disadvantage को हमने बता तो दिया. मगर हमारा खुद का नजर में computer एक आशीर्वाद है इन्शान के लिए. कंप्यूटर को अगर तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो ये एक बड़ी power है. हमारे hindiblog को आप computer या mobile के इस्तेमाल से ही पढ़ रहे है. और हमने भी इनके मदत से ही subhra som को बना पाएं. कंप्यूटर के बिना आजका जमाना चल नहीं सकता. ये हमारा राय है.

History

दोस्तों Charles Babbage को father of computer के नाम से जाना जाता है. और ये नाम उनको मिला था digital computer को बनाने के कारन. कंप्यूटर एक Latin शब्द से लिया हुआ वर्ड है. इसकी पीछे इतिहास Continue Reading

Summary

  1. Computer एक electronic device है, जिसे data process करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
  2. हमारा Computer सिर्फ 0 और 1 numeric language ही समझता है.
  3. हम Computer को programming के माध्यम से instruction दिया जाता है.
  4. Computer दिए गए कमांड को store(संग्रहीत), retrieve(पुनर्प्राप्त), and process data(संसाधित) के अनुक्रम में पूर्ण करता है.
  5. कंप्यूटर की कार्य प्रक्रिया का मुख्य 3 steps है. Input Data, Process Data, Output Data.
  6. Basic parts of a computer system: Monitor, CPU (Central Processing Unit), Keyboard, Mouse, Speakers, Printer, UPS
  7. Parts of Computer CPU: Motherboard, Processor/CPU, RAM, ROM, BIOS, Storage, SMPS, GPU, ODD
  8. Types of computer: Desktop Computers, Laptop Computer, Tablet computers, Servers
  9. Other Types of computers: Smartphone, Smartwatch, Video Gaming Console, Smart TV.
  10. Application of the Computer: Education, Business, Banking, Marketing, Healthcare, Communication, Defense, Government, Engineering, Entertainment.
  11. Computer का फायदा: Speed-Accuracy-MultiTasking.
  12. Computer का नुकशान: Computer Virus, Cyber Crime, Privacy Hacking, Health Issues, Create Dependency, Impacts the Environment.
  13. हम कंप्यूटर की 5th Generation में है.

processor vector image

Processor meaning in Hindi – What is processor? How works on computer?

Processor (“What is” and “how it works“) Hindi: Processor एक ऐसी चीज है जो computer या अन्य electronic device के अंदर संस्थापन किया जाता है. ये एक small chip है, जो यूजर द्वारा कोई भी data को अपने अंदर सही तरीके receive करते है. जिसे input कहते है. और data को उतना ही सही तरीके से user needs के ऊपर ध्यान देते हुए processed result को deliver करते है. जिसे output कहते है. आसान भासा में हम processor meaning in hindi को समज सकते है. और ये भी सवाल का जवाब पा सकते है how processor work या processor काम कैसे करता है.

Processor meaning in hindi

ये तो हमने जान लिया processor क्या है और ये काम कैसे करते है. processor meaning भी हम जान चुके है. अब अगर बात करें प्रोसेसर को हिंदी में क्या कहते है. तो processor in hindi में क्या कह सकते है ‘संसाधित करने का यन्त्र’.

मतलब (meaning)?
वैसे तो processor hindi में भी प्रोसेसर नाम से ही परिचित है. या आप इसे केवल संसाधक कह लीजिये. इसका अलग से कोई नाम तो नहीं दिया गया. मगर आप इसके काम का बिस्लेशन है. तो मान लीजिये आपका कोई कंपनी है और आप उसको सही तरीके से चलने के लिए एक मैनेजर रख्हा हुआ है. बस computer में प्रोसेसर भी ये ही काम करते है.

The technical term of processor:
हीट सिंक जिंक और कॉपर मिश्र धातु द्वारा बनाया गया है और प्रोसेसर से जुड़ा हुआ है.
A Heat sink is made by zinc and copper alloy and is attached to the processor.

What is Processor in hindi

सहज और एकमात्र भाषा मे कहे तो processor हमारे मस्तिष्क का जैसा ही एक controller है जो एक electronic device को मैनेज और कंट्रोल करता है. Processor computer की brain है और इसके द्वारा ही computer ठीक तरह से काम कर पाता है. Processor computer के अलावा कोई भी gadgets में लगा हो, काम एक ही तरह करता है. इस hindi blog में आपको पूरी जानकारी मिलेंगी.

Computing में एक processing unit लगी रहती है. जिसे processor कहते है. जो एक electronic circuit है. ये computer hardware और software के बिच में एक bridge बनके external data को अपने अंदर ले कर उसे process करता है. और उसके बाद यूजर के command के तहत मनचाही results या output प्रदान करता है.

Processor ये सारे काम millions और trillions of calculations के माध्यम से कर पाते है. और इतनी सारे calculation process ये कई टूकरो में करते है. इसलिए इन्हे microprocessor भी कहते है. हलाकि सबसे परिचित term जो हम सब इस्तेमाल करते है, वो है CPU. जिसका पूरा नाम और अर्थ है central processing unit. वैसे CPU बहुत सारे components की समष्टि को कहते है. दोस्तों ये hindi blog आपको क्या value दे रही है? कमेंट कीजियेगा.

Type of processor

  • Hardware
  • Software
Processor Info-graphic structure
Type of processor

Hardware Processor

Processor की दो प्रकार में से hardware processor वो है जिसमे electronic circuit शामिल है. जिसका काम है external data process करना. जैसे की memory. Hardware processor में CPU, Multi core processor और front end processor शामिल है. Central processing unit (CPU) के अंदर microprocessor आते है. किउकी एक प्रोसेसर अपना काम कई टुकरोंमे बाँट कर करते है. जो हमने पहले ही बताया.

दोस्तों प्रोसेसर की प्रकार भेद में micro processor की और भी ज्यादा sub section है. जिसे आप ऊपर दी गयी info-graph और नीचे दी गयी लिस्ट में देख सकते है.

  • Application-specific instruction set processor (ASIP)
  • Graphics processing unit (GPU)
  • Physics processing unit (PPU)
  • Digital signal processor (DSP)
  • Coprocessor
  • Floating-point unit
  • Network processor

Digital signal processor या DSP का और एक deviation है. जिसे Image processor कहते है. इसका काम होता है image को process करके output देना. आम तौर पर Camera, mobile phones आदि में लगाई जाती है.

Software Processor

दोस्तों hardware processor के बाद आते है software processor. जो दो तरह का होता है. एक है word processor. जिसका hindi meaning है शब्द संसाधन. और दूसरी है document processor. जिसका हिंदी में मतलब है दस्तावेज का प्रोसेसर या processing. मूल तौर पर document processor के माद्यम से text document को process करता है computer. ये एक application है.

दूसरे छेत्र में document processor application के द्वारा process की गयी data को document processor एक visual layout के माद्यम से finale output देता है.

What is CPU?

दोस्तों CPU पूरा नाम है Central Processing Unit. ये processor एक computer chip है. जो motherboard के साथ जुड़ा हुआ रहता है. पर इसको कई अन्य चीजोंका सहारा मिलता है एक complete data process करने के लिए.

हमारे CPU या processor एक hi-tech calculator की तरह ही काम करते है. Means इसे काम करने के लिए एक operating system की जरूररत परती है. जिसे हम Os कहते है. Os computer, laptop, mobile phones, tablets, digital camera से लेकर उन्ह सभी modern device में रहती है, जन्मे CPU chip रहता है. ऑपरेटिंग सिस्टम या Os में जो लोक प्रिय है, उनका नाम है Microsoft Windows, Apple mac OS, Linux, Android and Apple’s iOS.

CPU processor chip कई आकृति में होते है. जैसे कि round या squares. खैर motherboard के ऊपर processor को एक heatsink device से भी जोड़ा जाता है. किउकी जब CPU data process करते है तब बोहोत गर्मी का उतपादन होता है. heat-sink उस गर्मी को control करता है. ताकि data processing में कोई बिपत्ति न आ पाएं. Calculator के जैसा काम करने वाले इस processor या CPU को कई कंपनी अनेक shape और size में बनाती है. popular processor बनाने वाली कंपनी है Intel.

इंटेल और अन्य microprocessor निर्माता पहले से ही next generation chips पर काम कर रहे हैं. ताकि भविष्य में और भी smart processor का निर्माण किया जाये.

Diagram of basic CPU
CPU diagram

Components of CPU (CPU में क्या क्या parts रहती है)

चलिए थोड़ा जान लेते है processor parts या components क्या क्या लगती है. और काम क्या करती है.

  • Memory or Storage Unit
  • Control Unit (CU)
  • ALU (Arithmetic Logic Unit)
ComponentsWork(English)Work(Hindi)
Memory or Storage UnitStore Dataडेटा को store करता है
Control Unit (CU)Extracts instructions from memory and decodes and executes them.मेमोरी से निर्देश निकालता है और डिकोड करके उन्हें निष्पादित करता है
ALU (Arithmetic Logic Unit)Performs arithmetic and logical operations.अंकगणित और तार्किक संचालन करता है।

Function of the CPU/Processor

दोस्तों अब तक हम जान चुके है processor in hindi. Processor क्या है. और processor को CPU कहने का तात्पर्य. अब जानेगे CPU computer में क्या काम (function) करते है और कैसे करते है? दोस्तों क्या आप जानते है ये CPU जो एक processor है असल में computer में किउ लगी रहती है? चलिए जानते है.

Function of CPU
Function of CPU

CPU का मुख्य काम जो है, वो है hardware और software को सम्भालना. कोई भी data, information, या instruction इनके द्वारा किया गया कोईभी गतिबिधि को ये processor control करते है. ये commands के माध्यम से सारी चीजें करती है. computer program को चलाने के लिए दी गयी आदेश को commands कहते है. ये computer का भासा होता है. और इस computer language के जरिये ही कम्यूटर समज पाते है आप क्या कहना चाह रहे हो. और ये साडी प्रक्रिया processor (CPU) में चलती है. इसी कारण से इसे computer brain कहते है.

जैसे की आप ऊपर दी गयी info-graph देख रहे है. CPU चार तरह का काम को अंजाम देने के लिए कंप्यूटर में लगी रहती है. क्या क्या है वो काम?

  • Receive Information: सबसे पहले एक user की information को CPU अपने अंदर input करता है. Computer की भाषा में इसे कहते है Fetch.
  • Calculation: अब क्या डाटा user ने put किया है उसे processor (CPU) calculate करके पता लगाता है. इसे Decode कहते है.
  • Operation: अब receive की हुयी data को internal processing किया जाता है. इसे Execute कहते है.
  • Result: अब user को result प्राप्त कराते है. इसे Writeback कहते है.

Fetch प्रक्रिया

सबसे पहले processor data fetch करती है. मतलब memory से data को प्रोसेसिंग के लिए अपने अंदर ले कर अति है. ये कार्य एक नंबर या कई sequence of numbers के द्वारा होता है. memory से data को fetch करने का निर्देश P C नाम का Program counter देती है. ये पहली चारा घटने के बाद P C दूसरी instruction को देती है. और इसी तरह से fetch प्रक्रिया चलते रहता है. Modern processor में cache data के रूप में instruction पहले से ही मौजूद किया जाता है. ताकि fetch प्रक्रिया जल्दी हो पाए. जबभी data match करती है उसे cache counter से लिया जाता है.

Decode प्रक्रिया

Memory से लिया गया fetch data को अब अगले चरण में CPU processes करने के लिए रेडी है. Decode काम को करते है instruction decoder नाम की circuit . ये instruction को signal में बदल देती है. इसके बाद CPU का instruction set architecture (ISA) नाम का प्रक्रिया opcode नाम का field को बताते है क्या काम करना है. बस अब processor काम को अंजाम देती है.

Execute प्रक्रिया

Fetch and decode प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, अब समय है execute की. CPU architecture इसे निर्धारित करते है की execution एक single action से सम्पूर्ण हो पाएंगे। या फिर sequence of actions की जरुरत पड़ेगी. इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में सहायता करती है arithmetic logic unit (ALU). ये unit ALU ज्यादातर input and out put से खुदको जोर कर रखती है. किउकी processor की ये सबसे महत्या पूर्ण work को समय पर इसे पूरी करना है. वैसे execute process में CPU का लगभग सभी हिस्सा जरुरत अनुसार जुरकर काम पे लग जाती है. computer on करते ही Fetch-decode-execute cycle चालू होती है. और ये हर बार होती है.

Writeback प्रक्रिया

Storing की इस प्रक्रिया में executed data को memory में store किया जाता है. इस काम का जिम्मेदारी भी ALU के ऊपर रहती है. AlU out put memory से जुड़ा रहता है. अगर डाटा बोहोत ही ज्यादा बड़ी होती है, तब एक arithmetic overflow flag या V flag से रिजल्ट का साइज को समझाया जाता है.

Types of CPU (Available in the market)

दोस्तों सामान्य प्रयोजन के अनुशार 5 types of processor या CPU होते है. जैसे की

  • Microcontroller
  • Microprocessor
  • Embedded Processor
  • Digital Signal Processor (DSP)
  • Media Processor

मगर ये थोड़ा in depth जानकारी हो जाएंगे. जिसको और हिंदी ब्लॉग में explain करेंगे. अभी फ़िलहाल के लिए हम CPU कहने से जिस चीज को समझते है उसकी बात करते है. सामान्य तौर पर हम घर पर computer में CPU’s use करते है. जिसका कई प्रकार बाजार में पाया है. ये Cpu मतलब प्रोसेसर बनाने बलि सबसे परिचित कंपनी है Intel और AMD. जो हर दिन और बेहतर काम कर रहे है इस चैत्र में. Intention है और भी बेहतर CPU का खोज.

हम सबने Intel Pentium processor के बारेमे सबसे ज्यादा सुने है. और मुझे लगता है Pentium 4 सबसे ज्यादा हमारे घरोका system की CPU में लगा हुआ है. इसके अलावा Athlon, Duron, Celeron भी काफी popular processor है.

दोस्तों हम system on करते है, तब एक चीज नज़र आते है. वो है 32 bit और 64 bit. और हम processor की प्रकार इसी से समजते है. असल में इसे CPU architecture कहते है. 32 bit का मतलब होता है हमारे CPU 32 bits of data स्थानांतरण कर सकते है per clock cycle में. ये clock की गति को भी मापा जाता है clock speed के जरिये. Meaning जानेगे आगे इस hindi blog में.

Latest CPU’s

Nano Technologies में प्रगति के साथ साथ processor की टेक्नोलॉजी भी बदल रही है. दोस्तों architecture कि बदलाव के साथ अभी processor और भी आधुनिक बन चुके है. जैसे की Intel Itanium, AMD Opteron Series, Xeon Series, Core i9 processor, 9th Gen Core i5 and Core i7 models, i7-9700K और भी बोहोत सारे. ये आधुनिक processor है. और इसके लिए आपको high configuration system की जरुरत पड़ेगी. कुछ processor आपको play station में इस्तेमाल दिख जाएंगे. किउकी gaming processor तो high end होना जरुरी है. तभी high end gaming हो सकती है.

दोस्तों आपको लग रहा है ये core क्या है? बताएँगे आगे चलके. उससे पहले बता दे, अभी आप जो हर एक types of CPU की नाम देख रहे हो. मगर पहले हर प्रोसेसर को नाम नहीं बल्कि number से पहचाना जाता था. जैसे Intel 80486(486) processor. Intel की Pentium processor को पहले 80586 नंबर से पहचाना जाता था.

Processor of Mobile Phones

Mobile phones, tablets जैसा छोटे gadgets में फिट होने के लिए design किया जाता computer CPU से बहुत ही small size, नन्हा सा एक processor. जैसे computer CPU में chip-set बड़ी होती है. यहाँ portable computer के लिए small chips का इस्तेमाल किया जाता है. ये छोटा सा chip बोहोत ही कम voltage का खपत करता है. किउकी आप phones battery से चलाते हो. मगर Processor का काम करनेका method लगभग समान है.

Chip का design भी वैसे किया जाता है. और ये छोटासा processor बोहोत ज्यादा efficient है sleep mode के लिए. ताकि आप बार बार फ़ोन को lock unlock कर पाओ. इसकी और एक feature है, जब आप mobile का इस्तेमाल नहीं करते हो. उस हालत में processor की अधिकांश अंश बंद हो जाती है. तो अब आप जान चुके है what is cpu. हाउ CPu Works और जो बहोतो का सवाल था Processor meaning in hindi. मगर अभी और भी details देनी बाकि है. तो पड़ते रहिये.

Example of Mobile Processor

Processor NamePermormance
Apple A13 BionicVery High
Apple A12 BionicVery High
HiSilicon Kirin 990Very High
Qualcomm Snapdragon 865Very High
Qualcomm Snapdragon 855 PlusVery High
Qualcomm Snapdragon 855Very High
Samsung Exynos 990Very High
Samsung Exynos 9825Very High
Samsung Exynos 9820Very High
MediaTek Helio G90THigh

What is core in processor

अब ये Core क्या है. Processors के साथ इसे किउ बोला जाता है? सवाल अगर ये है तो जवाब भी हाज़िर है. दोस्तों CPu में कई core processor के बारे मे हमने सुना है. Core असलमे processor में ब्रेन का काम करता है. ये instruction लेता है. उसे पढता है और processing करता है. आसान भासा में आप कह सकते core processor में कई छोटे छोटे processor का समष्टि होता है. जो individually काम करता है. मतलब हर core एक task perform करता है.

पहले के ज़माने में हर processor में सिर्फ एक ही core हुआ करते थे. मगर अभी multi-core processor चलते है. जिसमे एक से ज्यादा cores रहते है.

example:- dual-core, triple-core, quad-core, 6-core, 8-core, and 12-core. इसके अलावा 16-core workstation processors का भी आबिस्कर किया गया.

What is Processor speed?

कितनी instructions and commands एक processor हैंडल कर सकता है. और कितनी तेजी से कर सकता है, इसके ऊपर CPU speed निर्भर करता है. Processor की speed को clock speed नाम से जाना जाता है. और इसको measure करते है gigahertz के जरिये. वैसे मूल तौर पर clock speed निर्भर करता है प्रोसेसर में number of cores कितने है.

What is CPU Clock speed or Clock rate

Clock Speed का अर्थ इस example से समझिये. घरी का पूरा एक चक्कर लगाने में समय कितना लगता है. वैसे हमारे घरोंका clock तो साठ सेकण्ड्स में अपना एक cycle पूरा करता है. वैसा ही processor में CPU’s clock speed rate को measure करने के लिए देखा जाता है, की एक second में CPU कितनि बार perform कर पाया.

Clock Speed rate को Hertz के द्वारा measured किया जाता है. मगर साधारण स्थिति में clock rate को gigahertz or GHz से मापा जाता है.

What is CPU Clock cycle

साधारण दृस्टि में clock cycle को हम मानते है speed of computer processor. technically समझे तो, इसे देखा जाता है इस तरह. एक oscillator के दो pulses के बिच का समय. oscillator एक circuit है जो repeated waveform बनाता है. और यहाँ दो wave को देख कर ही clock speed को जाना जाता है. और second में जितने ज्यादा wave बनेगे, processor speed उतनी तेज़ी से data processing कर पाएंगे.

History of the processor in hindi

सं 1960 के जमाने में पहली बार processor को बनाया गया. मगर ये आकर में बोहोत ही बड़ा और काम में बोहोत ही slow हुआ करते थे. मगर एहीसे सुरुवात हुयी future technology revolution का. जो आगे चलकर CPU बनने बाली थी. प्रोसेसर बाली silicon(SI) की खोज 1823 में Baron Jons Jackob Berzelius में किया था. ये एक basic component है processor बनाने की. मगर पूर्ण developed processor बनने में अभी सालो देर था.

Binary numbers 0 and 1 के ऊपर काम करने वाली processor आने में अभी वक़्त था. उससे पहले बोहोत components की खोज हुयी, जो आगे चलके CPU को बनाने बाली थी. सं 1968 में Robert Noyce और Gordon Moore नाम की बेक्ति ने एक कंपनी का रचना किया. जो आगे चलके क्रांति लाने वाली थी. कंपनी का नाम था Intel Corporation. और ये Intel ही 1971 में पहली Microprocessor की अबिष्कार किया. इस invention में Ted Hoff नाम की बेक्ति सहायता की. जो Intel का ही एक employee थे. और Microprocessor की co founder बने.

Processor revolution

Processor का नाम था Intel 4004. जो 60,000 OPS (operations per second) के स्पीड से काम कर सकती थी. और उस वक़्त इसकी कीमत थी $200. इसके बाद से लगभग हर एक दो साल में Intel एक नया औरभी improved processor को मार्किट में लेट रहे. और processor की क्रांति की सुरुवात हो चुकी थी.

Intel के इलावा अन्य कंपनी जैसे IBM, Motorola, Cyrix, Sun, AMD जैसे कंपनी भी अपना योगदान देते रहे. Intel ने Pentium processor को लाया March 22, 1993 में. Cyrix ने MediaGX processor को मार्किट में लाया 1996 में. उसी साल AMD ने introduced किया K5 processor. June 1998 में Intel द्वारा लाया गया पहली Xeon processor. AMD लाया Athlon processor series 1999 में और Opteron processors 2003 में. Intel ने released किया Core 2 Duo processor साल 2006 में. और इस तरह जर्नी चलती रही. कुछ लिस्ट हमने निचे शेयर किया.

YearInventionInventor
1823Invention of silicon (Si) (ये एक मुख्य component है प्रोसेसर की) Baron Jons Jackob Berzelius
1947Transistor (ये भी एक मुख्य component है प्रोसेसर CPU की)John Bardeen, Walter Brattain, and William Shockley
1958Integrated Circuit (IC) Robert Noyce and Jack Kilby
1971MicroprocessorIntel – Federico Faggin, Marcian (Ted) Hoff, Stanley Mazor, Masatoshi
19728008 processorIntel
1979Motorola 68000, a 16/32-bit processorMotorola
1987SPARC processorSun
1989CoprocessorsCyrix
1991AM386 microprocessorAMD
1991Intel 486SX chipIntel
1993Pentium processorIntel
1995Cx5x86 processorCyrix
1996MediaGX processorCyrix
1997Pentium IIIntel
1998Xeon processorIntel
1999Athlon processorAMD
2000Duron processorAMD
2001Pentium 4 processorIntel
2003Pentium MIntel 
2005Dual-core processorAMD
2006Core 2 Duo processorIntel

Conclusion (निष्कर्ष)

प्रोसेसर की प्रगति की लम्बी इतिहास है दोस्तों. आज का modern CPu और सुरुवाती दोर का processor में जमी-आश्मान का फर्क आ चूका है. और digitization के साथ साथ technologies के field भी उन्नति के सिखर पर पोहोच रहे है. इनमे मुख्य भूमिका Intel, AMD जैसे कंपनी बरचर के भागीदारी निभा रहे है. इस Hindi blog में हमने कोशिश किया processor के बारे में हर जानकारी आसान सब्दो में समझा पाए. मगर हमने आधा ही बता सके. हमने बताया processor meaning in hindi. हमने बताया Processor क्या है (what is processor in hindi), हमने बताया computer cpu क्या काम करती है. इसके अंदर की बातें भी शेयर किया. processor की इतिहास भी आप जान चुके है.

Future processor और भी दमदार होने जा रही है future tech के साथ. ये हमारी उम्मीद से ऊपर जाकर काम करेगी. small size cpu हम use करेंगे जो powerful होगा और जिसका capabilities और भी बेहतर होगा. जो power consumption न के बराबर करेंगे. खैर ये तो हमारी कल्पना है. बिस्वास है ये सच जरूर होंगे. किउकी प्रगति के साथ साथ उन्नति अनिबर्य है. इसी hindi blog subhra som में आपको उसकी भी जानकारी मिलेंगी future में. बस आपका साथ बनी रहे.

दोस्तों अगर हमने आपको computer processor के बारे में कुछ भी जानकारी देने में सक्षम हुए, तो एक कमेंट जरूर करें. जिसे technology की article details में चाहिए हिंदी में, उसे ये आर्टिकल शेयर जरूर करें. आप अपना समय दिए, इसके लिए तहे दिलसे आपका धन्यवाद्.