ATM FULL FORM: एटीएम का फुल फॉर्म क्या है?

एटीएम का फुल फॉर्म हिंदी में : आज के ज़माने में एटीएम, के बिना काम नहीं चलता है. और हम सब ही ATM का इस्तेमाल अपने हर रोज का पैसे सम्बंधित कामो में करते है. मगर एटीएम का फुल फॉर्म किस किस को पता है? हाथ ऊपर कीजिये! मज़ाक था. हो सकता है हमारे बोहोत दोस्त एटीएम का पूरा नाम जानते है. मगर कुछ दोस्त ऐसे भी है जीने ये पता न हो. उनके लिए ये लेख. मगर जो जानते है वो भी जरा रुक जाइये. किउकी इस आर्टिकल में हम सिर्फ atm का full form ही नहीं बताएंगे, इसके अलावा एटीएम से सम्बन्धी ऐसी जानकारियां लाये है, जो आपको कभी पता नहीं था.

क्या मिलेगा इस आर्टिकल मे और ये किसके लिए है: दोस्तों अगर आप एक स्टूडेंट है तो आपको इस आर्टिकल में atm का full form तो मिले मिलेंगे ही(जो सायद आपको पता है), उसे छोड़ कर atm का इतिहास, atm का दूसरा नाम, atm का जनक, atm का बिभिन्य types सभी मिलेंगे. जो आपके कॉम्पिटिटिव एग्जाम में पूछा जा सकता है.

और अगर आप एक पैरेंट हो, तो आपके बच्चे का स्कूल में भी quiz में पूछा जाता है इस तरह का सवाल. अगर आप इनमे से दोनों ही नहीं हो, तो फिर जानकारी के लिए आप आगे पढ़ सकते है. मज़ा आएगा. तो चलिए देखते है सुभ्रा सोम की इस लेख को जिसका शीर्षक है “एटीएम फुल फॉर्म (ATM का full form क्या है)”.

एटीएम का पूरा नाम क्या है

ATM FULL FORM क्या है? ATM कैसे काम करता है? ATM को पहली बार कहा इस्तेमाल किया गया था. एटीएम को किसने बनाया? ATM History
एटीएम का फुल फॉर्म क्या है

एटीएम का पूरा नाम है:Automated teller Machine

एटीएम का फुल फॉर्म हिंदी में

हिंदी में: स्वचालित नकदी मशीन (स्वचालित टेलर मशीन).

एटीएम क्या है

विश्लेषण: ये एक electro-mechanical (विद्युत यांत्रिक) मशीन है, जो स्वचालित है. जिसे चलाने के लिए कोई banking staff, जिसे teller कहते है. उनकी जरुरत नहीं परता है. कस्टमर खुदही एटीएम मशीन के सामने जा कर खुद ही पैसे निकाल सकते है. इसके लिए उन्हें बैंक द्वारा जारी किया गया एक ATM Card की जरुरत पड़ती है.

दोस्तों आपने atm का full form तो जान चुके है. अब आगे का जानकारियां.
ATM के माध्यम से self-service transactions को व्यावहारिक रूप दिया जाता है. और इससे यूजर को बार बार बैंक में जाने का जरुरत भी नहीं परता है. काम आसान हो जाता है. दरअसल एटीएम personal finances का manage करने का मॉडर्न तरीका को उपलब्ध कराता है.

ATM सिर्फ पैसे निकालने का काम ही नहीं करता है. इसके अलावा cash deposit, bill payment, account to account transfer भी किया जाता है. हालांकि ये सुविधा प्राप्त करने के लिए बैंक खाता धारक को साल में एक फीस भी देनी पढ़ती है बैंक को.

मुख्य तोर पर एटीएम दो किस्म (Variety) का होता है. पहला जो सिर्फ पैसे निकलने के लिए और बैलेंस अपडेट को देखना. और दूसरा पैसा निकलना, जमा करना, क्रेडिट लाइन भुगतान, मनी ट्रांसफर का काम भी एक ही मशीन में रहता है.

एटीएम का कार्ड क्या है

दोस्तों ATM Card एक plastic का कार्ड होता है. जिसके ऊपर एक magnetic strip या पट्टी लगा होता है. जिसे atm machine में डालकर पैसे निकालने या जमा करने का काम को किया जाता है. मैग्नेटिक स्ट्रिप के ऊपर उपभोगता संबंधित बिसेस जानकारिया बैंक द्वारा encode किया जाता है.

magnetic stripe of ATM card

और ये code को पढ़ने के लिए atm machine के अंदर कुछ कार्ड रीडर atm में लगे रहते है. वो स्ट्रिप को full form में scan करते है. इसके बाद machine, जानकारिया अपने बैंक के system में भेजते है. और customer अपने account के साथ ट्रांसक्शन कर पाते है. और इसलिए कभी कभी server down के कारण atm काम नहीं करता है. ये काम इंटरनेट bank server के माध्यम से होता है.

ATM काम कैसे करता है

ATM का काम करने का तरीका को अगर सारांश किया जाये तो.. मानलीजिए आप एक यूजर है, और आपने घर के सामने लगा हुआ ATM मशीन में जाते है. (जिसका पूरा नाम, full form आप जानते है). आपके हाथ में प्लास्टिक से बना हुआ atm कार्ड है. जिसमे ब्लैक कलर का पट्टी है. और दिमाग में कार्ड का pin number भी है. तो चलिए एटीएम में.

  • आपने कार्ड को मशीन में डाला.
  • अब सबसे पहले आपको atm pin को मशीन के keyboard में type करना होगा
  • मशीन आपका पिन को read करेगा, और आपका बैंक के सिस्टम में मौजूद आपका अकाउंट को खोले का.
  • अब आप जितने पैसे निकालना चाहते हो उसे type करोगे.
  • atm आपका अकाउंट में मौजूद उस पैसे को deduct कारगी, और मशीन के अंदर पहले से डाला हुआ currency को आपको अपने withdraw window के जरिये देंगी. जिसे Cash dispenser कहते है.
  • अब आप अपना card निकाल लोगे. सह में आपको एक slip भी मिलेंगे.

एटीएम का कार्य (function of atm)

  • नकद जमा करना
  • नकदी की निकासी
  • नकदी का हस्तांतरण
  • खातों का विवरण
  • मिनी स्टेटमेंट
  • बिल का भुगतान
  • खाता शेष विवरण
  • प्रीपेड मोबाइल का रिचार्ज
  • पिन कोड बदलना

atm के parts क्या क्या है?

हर computerized device के जैसा ही ATM में भी Input parts और Output parts डिवाइस का संगमिश्रण रहता है. एटीएम में बेसिक पार्ट्स को नीचे बताया गया है. मगर ये समय के साथ upgrade किया जाता है. ताकि atm machine एक जबरदस्त काम करे. और इसमें कोई faults न हो.

Input Device

Card Reader: ये एटीएम कार्ड का मैग्नेटिक स्ट्रिप को पढ़ने के लिए मशीन के अंदर कार्ड होल्डर में लगी होती है. ये सूक्ष्म जनारिया पढ़ती है और आगे के करवाई को करने के लिए आपको अबसर देती है.

Keypad: कीपैड के जरिये आप अपना पिन और अमाउंट को टाइप करते है. इसमें 0 से 9 नंबर रहता है. और साथ में transaction का चयन करने का बटन, enter button, clear button, cancel button और प्लस माइनस का बटन भी रहता है.

Output Device

Display screen: ये एक कंप्यूटर के जैसा मॉनिटर रहता है. जिसके जरिये आप अपना इनपुट काम को करते वक़्त देख पाते है. और पैसे निकलने के बाद अपना अकाउंट डिटेल्स भी देख पाते है.

Speaker: स्पीकर्स आपको सूचित करता है, की कोई बटन अपने ठीक से दबाये या नहीं. या फिर आपका पिन अपने सही डाला या नहीं. इससे यूजर को सुब्धा होता है.

Receipt printer: cash निकलने के बाद रिसिप्ट देने के लिए प्रिंटर कहता है. जो मशीन में ही रहता है. इससे आपको अकाउंट बैलेंस का डिटेल्स परचा के रूप में मिलता है.

Cash dispenser: एटीएम का केंद्रीय पार्ट होता है ये. इसमें आपको अपना पैसे दिया जाता है. ये एक window या फिर tray के जैसा होता है.

एटीएम के प्रकार (types of atm)

दोस्तों, आगे बढ़ने से पहले, एक छोटा सा प्रयत्न करें. आपको ये लेख एटीएम का फुल फॉर्म क्या है कैसे लग रहा है कमेंट में जरूर बताये. चलिए आगे बढ़ते है…
हममें से ज्यादातर को एटीएम के कितने प्रकार(types) होते है ये नहीं पता. हाँ मालूम है मालूम है! आप काफी समझदार हो. और आपको full form तो atm का पता ही है. और ये भी काफी लोग जानते है. मगर जिन्हे नहीं पता उन्हें हम बताय देते है. इसमें क्या ;D

Online atm: ये एटीएम जो हम सब आम तोर पर इस्तेमाल करते है. ये हर एक transaction में अपडेट होता है. और इसके data bank के साथ हमेशा जुड़ा रहता है. इसीलिए server down तो काम तमाम.(घबराये मत, मेरा बोलने का मतलब है, आप पैसे नहीं निकाल पाओगे उस वक्त) इसमें आप अधिकतम अपना खाता का हर एक पाई निकाल सकते है.

Offline atm: इस एटीएम के माध्यम से आप अपना खाता के ज्यादा भी निकाल सकते है. किउकी इसके database बैंक के साथ जुड़ा नहीं रहता है. ये कुछ काम के चीज है. मगर ठैर जाइये, बैंक को आपको राशि लौटाना भी परता है. एक्स्ट्रा फीस के साथ. और निकालते वक़्त भी एक अधिकतम सीमा रहता है भाई.

On site atm: इस टाइप का एटीएम को आप बैंक के अंदर ही इस्तेमाल कर सकते है. मतलब, इसतरहा का एटीएम बैंक के branch के अंदर ही होला जाता है. और लोग इसे इस्तेमाल करते है जिसे भरमे लाइन में नहीं खरा होना है.

Offsite atm: ऑफ साइट एटीएम का मतलब है, एकमात्र वो एटीएम जिसके आगे पीछे, अगल बगल कोई और अन्य एटीएम बैंक द्वारा दिया नहीं गया हो. मतलब, कोई दूर के इलाके में किसी बैंक का एक ही एटीएम मौजूद है. कभी कभी उस बैंक का कोई ब्रांच भी इलाके में नहीं होता है. मगर एटीएम लगा गर रखते है. ये ही है offsite atm.

White lebel atm: ये उस तरह का atm होता है जिसे bank के बजाय कोई थर्ड पार्टी(non-banks) द्वारा लगाया जाता है. इस एटीएम को आप बैंक के एटीएम जैसा ही पैसा निकलने के लिए इस्तेमाल कर सकते है. ये भी Rbi द्वारा मान्यता प्राप्त होते है. सो आप सिक्योर ट्रांसक्शन कर सकते है. पैसा आपके बैंक खाते से ही काटेंगे.

Yellow label atm: ये भी non banking थर्ड पार्टी द्वारा स्थापित की जाती है. मगर सिर्फ E-commerce काम के लिए.

Brown label atm: ये कोई service provider द्वारा लगाया गया atm machine होता है. ये असल में संयुक्त उद्यम(JV) है बैंक और सर्विस प्रोवाइडर के बिच में. एटीएम मशीन के hardware और लीज थर्ड पार्टी के अंदर होता है. और नकद प्रबंधन और बैंकिंग नेटवर्क से एटीएम को जोड़ने का काम बैंक देखते है.

Orange label atm: इस तरह का एटीएम shares के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

Pink label atm: अगर आप महिला है तो ये आपके लिए और सिर्फ आपके ही लिए है. रंग से ही पता चल रहा है इस एटीएम का इस्तेमाल women banking के लिए किया जाता है.

Green label atm: एग्रीकल्चर में इस एटीएम का इस्तेमाल किया जाता है. जी हाँ इसे कृषि लेनदेन के लिए बनाया गया है.

ATM का इतिहास

1► जॉन शेफर्ड बौरोन ने एटीएम का अबिष्कार किये.
2► दुनिया का पहला एटीएम बना 27 जून 1967 में. जिसे Barclays नाम का Bank branch के माद्यम से बनाया गया London में.
3► फिर 1970 में ये सुबिधा को लाया गया जिससे एक बैंक का एटीएम को दूसरे बैंक में इस्तेमाल किया जा सकता है.
4► ATM Industry Association (ATMIA) के मुताबिक साल 2015 में, लगभग 35 लाख एटीएम पूरी बिस्वा में चल रही है. अभी ये तादात बढ़ चुकी होगी।
5► भारत में पहली एटीएम 1987 में HSBC बैंक के लिए बनाया गया. जिसे ‘हांगकांग और संघाई कॉर्पोरेशन’ द्वारा स्तापित किया गया.

सारांश

ATM का पूरा नाम है Automated teller Machine. एटीएम को हम पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल करते है.एडवांस्ड एटीएम के जरिये पैसा जमा, फण्ड ट्रांसफर भी किया जाता है. एटीएम एक कार्ड के मदत से काम करता है. जिसमे एक 4 digit का पिन दे कर चलाया जाता है. एटीएम फाइनेंसियल कामो को आसान बनाने के लिए उत्तम मशीन है.

दोस्तों हमारे एटीएम का फुल फॉर्म क्या है ये आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट में बताकर कृपा करने का प्रयास जरूर करें. और अगर शेयर कर देंगे तो मेरा खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा. हमारे हिंदी ब्लॉग subhrasom से जुड़े रहें. अगले लेख जल्द ही पेस किया जायेगा. समय देने के लिए धन्यवाद्.

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